*डॉक्टर और सीईओ - भाग 3: आरोप और भरोसा*
सुबह के 9 बजे थे। अनन्या अपने केबिन में बैठी उस 12 साल के बच्चे की रिपोर्ट देख रही थी, जिसकी कल जान बचाई थी। तभी दरवाजा बिना खटखटाए खुला।
हॉस्पिटल के HR हेड और विजय मल्होत्रा के साथ दो बोर्ड मेंबर अंदर आए।
HR हेड ने एक लिफाफा टेबल पर रखा, "डॉ. अनन्या, आपके खिलाफ एक गंभीर शिकायत आई है। कहा गया है कि आपने बिना बिलिंग क्लीयरेंस के, अपने पद का गलत इस्तेमाल करके एक ऑपरेशन किया है, जिससे हॉस्पिटल को नुकसान हुआ है। और आपने सीईओ के साथ निजी संबंध बनाकर ये प्रमोशन लिया है।"
अनन्या का चेहरा सफेद पड़ गया। हाथ में पकड़ी रिपोर्ट कांपने लगी।
"निजी संबंध?" अनन्या ने धीरे से कहा, "मैंने एक बच्चे की जान बचाई है। और आप इसे संबंध कह रहे हैं?"
विजय मल्होत्रा मुस्कुराए, "देखिए डॉक्टर, इमोशनल मत होइए। बोर्ड ने फैसला किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, आपको सस्पेंड किया जाता है। आप अपना केबिन खाली कर दीजिए।"
ये खबर पूरे हॉस्पिटल में आग की तरह फैल गई। नर्सें, वार्ड बॉय, सब फुसफुसा रहे थे। जिस बच्चे को अनन्या ने बचाया था, उसकी माँ रोती हुई अनन्या के पास आई, "डॉक्टर साहिबा, आपकी वजह से मेरा बेटा जिंदा है, और ये लोग आपको..."
अनन्या ने कुछ नहीं कहा। उसने अपना सफेद कोट उतारा, टेबल पर रखा और केबिन से बाहर निकल गई। उसकी आँखों में आंसू नहीं, एक अजीब सा सन्नाटा था।
इधर आर्यन को इस बात की खबर तब लगी जब वो दिल्ली में एक मीटिंग में था। उसके सेक्रेटरी ने फोन पर बताया, "सर, डॉ. शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। मिस्टर विजय ने बोर्ड की स्पेशल पावर इस्तेमाल की है।"
आर्यन ने मीटिंग बीच में ही छोड़ी और सीधे एयरपोर्ट के लिए निकला। पूरे रास्ते में उसे सिर्फ एक बात याद आ रही थी - ऑपरेशन के बाद कॉरिडोर में अनन्या की थकी हुई पर सुकून भरी मुस्कान।
शाम 6 बजे आर्यन सीधा हॉस्पिटल पहुँचा। बोर्ड रूम में सभी मेंबर मौजूद थे।
आर्यन ने दरवाजा जोर से खोला और कहा, "किसके कहने पर डॉ. अनन्या को सस्पेंड किया गया?"
विजय बोले, "बोर्ड के कहने पर। हमारे पास शिकायत है। एक सीईओ को इस तरह इमोशनल नहीं होना चाहिए। वो डॉक्टर तुम्हें बरगला रही है।"
आर्यन ने अपनी जेब से एक फाइल निकाली और टेबल पर पटक दी।
"ये उस बच्चे के पिता का बयान है, जिसे अनन्या ने बचाया। और ये उस रात के CCTV फुटेज की रिपोर्ट है, जिसमें दिख रहा है कि मैंने खुद बिलिंग डिपार्टमेंट को ऑर्डर दिया था। तो अगर किसी ने नियम तोड़ा है, तो वो मैं हूँ, डॉ. अनन्या नहीं।"
पूरा बोर्ड रूम शांत हो गया।
आर्यन ने आगे कहा, "और दूसरी बात, आपने कहा निजी संबंध? हाँ, है संबंध। एक डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध। अगर वो निजी है, तो मुझे गर्व है उस संबंध पर।"
उसने HR हेड की ओर देखा, "डॉ. अनन्या का सस्पेंशन अभी इसी वक्त खत्म करो। और आज के बाद, इस हॉस्पिटल में किसी भी डॉक्टर से बिना मेरी इजाजत कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा।"
फिर आर्यन बोर्ड रूम से निकला और सीधा उस छोटे से क्वार्टर में गया जहाँ अनन्या अपने पिता के साथ रहती थी।
दरवाजा अनन्या के पिता ने खोला। अनन्या अंदर बैठी थी, बिना कोट के, पहली बार इतनी कमजोर दिख रही थी।
आर्यन ने कहा, "आपने कोट क्यों उतार दिया, डॉक्टर साहिबा?"
अनन्या ने कहा, "क्योंकि अब मैं इस हॉस्पिटल की डॉक्टर नहीं रही।"
आर्यन ने अपने हाथ में लाया हुआ वही सफेद कोट आगे बढ़ाया, जो वो केबिन से लेकर आया था।
"आप इस हॉस्पिटल की नहीं, इस शहर की सबसे अच्छी डॉक्टर हैं। और लाइफकेयर को आपकी जरूरत है। मैं लेने आया हूँ आपको।"
अनन्या की आँखों में आंसू आ गए। उसने कहा, "पर सब लोग क्या कहेंगे?"
आर्यन मुस्कुराया, "लोगों का काम है कहना। हमारा काम है, धड़कनों को बचाना। चलिए, आपका मरीज आपका इंतजार कर रहा है।"
अनन्या ने कोट पहना। वो कोट नहीं, उसका आत्मविश्वास था।
अगले दिन जब अनन्या हॉस्पिटल पहुँची, तो पूरा स्टाफ तालियाँ बजा रहा था। वार्ड की नर्सों ने उसके केबिन में फूल रखे थे। उस 12 साल के बच्चे ने एक छोटा सा कार्ड बनाया था, जिस पर लिखा था - "थैंक यू डॉक्टर आंटी।"
विजय मल्होत्रा ने उसी दिन बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
शाम को, हॉस्पिटल की छत पर, जहाँ से पूरा मुंबई दिखता था, आर्यन और अनन्या खड़े थे।
अनन्या ने कहा, "आपने मेरे लिए अपने चाचा से लड़ाई क्यों की?"
आर्यन ने कहा, "क्योंकि आपने मुझे सिखाया कि बिजनेस में सबसे बड़ा प्रॉफिट, किसी की जान बचाना होता है। और मैं नहीं चाहता था कि मेरा सबसे कीमती प्रॉफिट, मुझसे दूर चला जाए।"
अनन्या शरमा गई। पहली बार, दो दिलों की धड़कन, एक ही लय में सुनाई दी।
हवा में सुकून था। नीचे, कार्डियक सेंटर की लाइटें जल रही थीं - जो अब सिर्फ एक सेंटर नहीं, उनके भरोसे की निशानी थी।
*[क्रमशः - भाग 4: क्या ये भरोसा प्यार में बदलेगा? और क्या अनन्या के पिता इस रिश्ते को मानेंगे?]*