एक आम सी प्रेम कहानी
अंतिम भाग
लेखिका "अनामिका"
सगाई की खूबसूरत यादों के साथ वक्त पंख लगाकर उड़ गया। देखते ही देखते कुछ साल बीत गए। निहारिका अपनी कॉलेज की पढ़ाई में व्यस्त हो गई और मलय अपने काम में। इस बीच मलय को ऑफिस में एक छोटा-सा प्रमोशन भी मिला था। दोनों की जिंदगी सही ढर्रे पर चल रही थी, लेकिन हाल ही में निहारिका के चेहरे पर एक अजीब-सी शिकन रहने लगी थी।
उसे पास के ही शहर से एक बहुत बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप का ऑफर मिला था। यह उसका सपना था, पर दिक्कत यह थी कि दोनों परिवारों में पढ़ाई खत्म होते ही शादी की बात तय हुई थी। इसी झिझक के कारण वह यह बात किसी से कह नहीं पा रही थी।
जब मलय को इस बात का पता चला, तो उसने निहारिका का हाथ अपने हाथों में लिया और प्यार से मुस्कुराते हुए कहा, "तुम शायद भूल रही हो निहारिका, मैंने कहा था कि हम शादी की कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे। तुम्हारे सपनों को पूरा करना अब सिर्फ तुम्हारी नहीं, मेरी भी जिम्मेदारी है। मैं सिर्फ कहने के लिए पार्टनर नहीं बना हूँ... चलो, आज ही घर पर चलकर इस बारे में बात करते हैं।"
दोनों निहारिका के घर पहुँचे और जैसे ही बेल बजाई, निहारिका की माँ ने दरवाज़ा खोला। सामने मलय को देखकर वे मुस्कुराते हुए बोलीं, "अरे! हमारे भावी दामाद जी आए हैं!" यह सुनकर मलय और निहारिका दोनों थोड़े झेंप गए। मलय ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया, "कैसी हैं आप, आंटी?" माँ ने उन्हें अंदर बुलाते हुए घर का हाल-चाल पूछा।
तभी निहारिका के पापा भी वहाँ आ गए। मलय ने उन्हें भी प्रणाम किया और कुछ औपचारिक बातों के बाद सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा, "अंकल, हम आपसे एक ज़रूरी बात करने आए हैं।" यह सुनते ही माँ-पापा के चेहरे पर हल्की घबराहट तैर गई—अभी तो शादी की बातें शुरू हुई थीं, अब क्या बात हो गई?
तभी मलय ने आगे बात संभाली और निहारिका के इंटर्नशिप ऑफर के बारे में सब सच-सच बता दिया। सुनते ही पापा का चेहरा गर्व से खिल उठा! उन्हें अपनी बेटी की पसंद पर बेहद खुशी हुई कि उसने कितना समझदार और सपोर्टिव जीवनसाथी चुना है।
हालाँकि, निहारिका की माँ थोड़ी चिंतित थीं क्योंकि वे सगाई के बाद शादी की तारीख़ निकालने के लिए पंडित जी से मिलने की सोच रही थीं। इस पर मलय ने बड़े प्यार से उन्हें समझाते हुए कहा, "आंटी, हमने सगाई से पहले ही यह तय किया था कि निहारिका के सपने पहले पूरे होंगे। हम शादी में कोई जल्दबाज़ी नहीं करेंगे।" मलय के इस भरोसे ने माँ की चिंता भी दूर कर दी।
फिर इंटरव्यू वाले दिन, मलय खुद अपनी बाइक से निहारिका को इंटरव्यू दिलवाने ले गया...
निहारिका जैसे ही इंटरव्यू के लिए अंदर गई, मलय बाहर ही उसका इंतज़ार करने लगा। वह तब तक वहीं बैठा रहा जब तक निहारिका मुस्कुराते हुए बाहर नहीं आ गई।
मलय ने उत्सुकता से पूछा, "कैसा रहा इंटरव्यू?"
"बहुत अच्छा गया!" निहारिका ने जवाब दिया।
मलय ने बाइक की तरफ बढ़ते हुए कहा, "चलो, अब घर चलते हैं।"
पर निहारिका ने अचानक उसका हाथ पकड़कर रोका, "रुको.... मुझे आपसे कुछ कहना है।"
मलय थोड़ा हैरान हुआ, "क्या हुआ? सब ठीक तो है ना?"
निहारिका ने शर्माते हुए अपनी पलकें झुकाईं और बेहद प्यारे अंदाज़ में बोली, "मैं बस यह कहना चाहती थी कि... मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। और यह आज से नहीं है, जब मैंने आपको पहली बार देखा था, मेरा दिल तभी से आपका हो चुका था। जब सब शादी की जल्दी में थे, तब आपने मेरे सपनों को इतनी अहमियत दी। मुझे इतना समझने वाला पार्टनर मिला, मैं सच में बहुत खुशकिस्मत हूँ। हर चीज़ के लिए थैंक यू ...."
मलय तो जैसे स्तब्ध रह गया! आज तक हर बार प्यार का इज़हार उसी ने किया था, निहारिका ने कभी अपने दिल की बात खुलकर नहीं कही थी। आज पहली बार उसके मुँह से यह सुनकर मलय का दिल खुशी से झूम उठा। उसकी आँखों में एक अजीब-सी चमक आ गई।
उसने निहारिका का हाथ और कसकर थाम लिया। दोनों के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी, और इसी मिठास के साथ वे दोनों अपनी ज़िंदगी के एक नए और खुशहाल सफर की ओर आगे बढ़ गए।
❁ समाप्त ❁
लेखिका की ओर से:
प्यार साबित करने के लिए फिल्मों की तरह गुंडों से लड़ना या बड़ी-बड़ी बातें करना ज़रूरी नहीं होता। असली प्यार तो मलय की तरह चुपचाप साथ खड़े रहने, पार्टनर के सपनों को पंख देने और उसकी छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखने में होता है।
प्यार सिर्फ ज़ाहिर करने में नहीं, बल्कि साथ निभाने में है—चाहे वह किचन में खाना बनाते समय सिर्फ पास खड़े रहकर बातें करना हो, बच्चों के पीछे भागती-थकती पत्नी को प्यार से अपने हाथों से एक निवाला खिलाना हो, या फिर बुढ़ापे में जब कदम धीमे पड़ जाएं, तब पार्क की किसी बेंच पर हाथ थामकर सुकून के दो पल बिताना हो।
यही तो होता है सच्चा और सहज प्यार... जो हम अपने माता-पिता या दादा-दादी में देखते हैं। वे कभी प्यार का ढिंढोरा नहीं पीटते, बस एक अनकहा, अनसुना और खूबसूरत अहसास बनकर ज़िंदगी भर साथ निभाते हैं। शायद यही असली प्यार है।
विशेष आभार:
मेरी इस कहानी को पढ़ने और इसे इतना प्यार देने के लिए आप सभी का धन्यवाद! ❤️ जिन पाठकों ने समय निकालकर इतने प्यारे रिव्यूज और फीडबैक दिए हैं, उनका विशेष शुक्रिया। आपकी हर एक प्रतिक्रिया मेरे लिए बेहद मायने रखती है और मुझे आगे भी नया व खूबसूरत लिखने का हौसला देती है।