Shakti ke Shiv - 27 in Hindi Women Focused by sheetal books and stories PDF | Shakti ke Shiv - 27

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Shakti ke Shiv - 27


रणविजय के भागते ही शक्ति भी उसके पीछे दौड़ पड़ी।

सुनसान गली में उसके कदमों की आवाज़ लगातार गूँज रही थी।

काफी दूर जाने के बाद अचानक रणविजय उसे दिखाई दिया।

शक्ति वहीं रुक गई।

उसने अपनी gun निकाली और ऊँची आवाज़ में कहा—
"रणविजय! रुक!"

लेकिन रणविजय ने पीछे मुड़कर देखा और फिर भागने लगा।

अगले ही पल शक्ति ने उसके पैर को निशाना बनाकर गोली चला दी।

धाँय!

गोली उसके पैर में लगी और वह लड़खड़ाकर जमीन पर गिर पड़ा।

गली लगभग सुनसान थी, इसलिए शक्ति ने बिना किसी और की सुरक्षा खतरे में डाले firing की थी।

वह तेज़ कदमों से रणविजय के पास पहुँची।

उसने उसका collar पकड़कर उसे ऊपर उठाया।

"भागने की बहुत जल्दी थी ना?"

रणविजय ने दर्द के बावजूद उसे घूरते हुए कहा—

"तुम मुझे पकड़कर क्या कर लोगी?"

शक्ति की आँखों में गुस्सा और बढ़ गया।

"क्या करूँगी?"

उसने उसे झकझोरते हुए कहा—

"जिस लड़की को तुमने सिर्फ़ एक 'तोहफ़ा' समझा था ना...

उसकी मौत का जवाब अब तुम्हें देना पड़ेगा।"

रणविजय कुछ कह पाता, उससे पहले शक्ति ने उसे दो-तीन वार किए।

"तुम जैसे लोग इंसानों को सामान समझते हो!"

एक और वार करते हुए वह बोली—

"तुम्हें लगता है पैसा और ताकत तुम्हें कानून से ऊपर कर देंगे?"

रणविजय चुप रहा।

शक्ति ने उसका collar फिर कसकर पकड़ लिया।

"गलत आदमी से टकराए हो, रणविजय। मैं तुम्हें सिर्फ़ गिरफ्तार करने नहीं आई हूँ... मैं तुम्हारे पूरे खेल का पर्दा उठाने आई हूँ।"

तभी पीछे से शिवाय की आवाज़ आई—

"शक्ति!"

वह तेजी से वहाँ पहुँचा।

"बस करो।"

शक्ति ने उसकी तरफ देखा भी नहीं।

"तुम बीच में मत आओ, शिवाय।"

शिवाय ने उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा—

"मैं तुम्हें रोक नहीं रहा... लेकिन इसे कानून के हवाले करो।"

शक्ति का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था।

"इसने कितनी जिंदगियाँ बर्बाद की हैं, तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है!"

तभी गली के दूसरे छोर से कुछ लोगों की आवाज़ें आने लगीं।

गोली की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग बाहर निकल आए थे।

धीरे-धीरे वहाँ भीड़ जमा होने लगी।

कुछ लोग दूर खड़े होकर इस पूरे दृश्य को देखने लगे।

शिवाय ने शक्ति की तरफ देखा।

"अब बहुत लोग हैं यहाँ।"

शक्ति ने एक गहरी साँस ली।

शिवाय ने आगे बढ़कर शक्ति को रोकने की कोशिश की।

"शक्ति... बस करो। लोग आ रहे हैं।"

शक्ति कुछ पल तक रणविजय को घूरती रही।

फिर उसने धीरे-धीरे हाथ रोक लिया और लंबी साँस लेने लगी।

लेकिन रणविजय के चेहरे पर अब भी घमंड था।

वह हल्का-सा हँसा।

"मुझे पकड़ने से कुछ नहीं होगा, शक्ति।"

शक्ति की आँखें उसकी तरफ उठीं।

रणविजय ने आगे कहा—

"मेरा network सिर्फ़ बनारस तक सीमित नहीं है। पूरे India में फैला हुआ है। मेरे ना होने पर भी मेरा काम चलता रहेगा।"

वह फिर हँसा।

"तुम लोगों को पता भी नहीं चलेगा कि तुम्हारी आँखों के सामने से लड़कियाँ कब और कहाँ गायब हो रही हैं।"

शक्ति की मुट्ठियाँ कस गईं।

रणविजय ने उसकी तरफ देखकर कहा—

"तुम मुझे पकड़कर समझ रही हो कि तुम जीत गईं?"

उसकी हँसी गली में गूँज गई।

शक्ति का चेहरा अचानक बिल्कुल शांत हो गया।

उसने अपनी belt उतारी और रणविजय की तरफ बढ़ी।

शिवाय ने तुरंत कहा—

"शक्ति..."

लेकिन शक्ति रुकी नहीं।

उसने रणविजय को देखते हुए सख्त आवाज़ में कहा—

"तुम्हें अपने network पर बहुत घमंड है ना?"

रणविजय की मुस्कान हल्की पड़ गई।

शक्ति ने belt अपने हाथ में कसते हुए कहा—

"अब तुम्हारे एक-एक आदमी को ढूँढ़कर तुम्हें दिखाऊँगी कि कानून की पहुँच तुम्हारे network से कितनी बड़ी है।"

रणविजय कुछ बोल पाता, उससे पहले शक्ति ने उसे belt से मारना शुरू कर दिया।

शिवाय ने एक बार फिर उसे रोकना चाहा—

"शक्ति, बस!"

लेकिन शक्ति का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था।

गली में जमा भीड़ खामोशी से यह सब देख रही थी।

और रणविजय के चेहरे से पहली बार उसका घमंड गायब होने लगा था।

शक्ति का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था।

वह रणविजय को belt से लगातार मार रही थी। उसकी आँखों के सामने बार-बार उसी लड़की का चेहरा घूम रहा था और हर बार उसका गुस्सा और बढ़ जाता।

"तुम्हें लगा था कोई तुम्हें रोक नहीं सकता?"

रणविजय चुप रहा।

शक्ति ने belt फिर उठाई।

"उस लड़की की चीखें शायद तुम्हें सुनाई नहीं दीं... लेकिन मैं उन्हें भूल नहीं सकती।"

वह उसे तब तक मारती रही, जब तक उसकी साँसें तेज़ नहीं हो गईं और उसकी आँखों के सामने घूमता हुआ उस लड़की का चेहरा धीरे-धीरे धुंधला नहीं पड़ गया।

तभी शिवाय ने फिर कहा—

"शक्ति... बस।"

इस बार शक्ति कुछ पल के लिए रुक गई।

उसी समय ACP विक्रम वहाँ पहुँच गया।

उसने स्थिति देखते ही constables को आदेश दिया—

"इसे arrest करो।"

दो constables आगे बढ़े और रणविजय को हिरासत में लेकर वहाँ से ले गए।

शक्ति ने belt वापस अपनी कमर पर लगाई और कुछ पल तक उसी दिशा में देखती रही।

उसके चेहरे पर गुस्सा अब भी था...

लेकिन अब उसके सामने सिर्फ़ एक लक्ष्य था—

उस लड़की को इंसाफ दिलाना।


रणविजय को पुलिस के हवाले किए जाने के बाद शक्ति कुछ देर तक वहीं खड़ी रही।

उसकी आँखों में आँसू थे।

शिवाय उसे देखता रहा, जैसे समझ ही नहीं पा रहा था कि इस वक्त उससे क्या कहे। उसके मन में कई सवाल थे। उसने शक्ति का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा था।

वह धीरे-धीरे शक्ति के पास आया और उसे अपने सीने से लगा लिया।

"शांत हो जाओ, शक्ति..."

शिवाय की आवाज़ बेहद शांत थी।

"मैं जानता हूँ... तुम्हारे अंदर इस वक्त बहुत कुछ चल रहा है।"

शक्ति ने कुछ नहीं कहा।

शिवाय कुछ देर तक उसे वैसे ही संभाले खड़ा रहा।

कुछ देर बाद...

शिवाय के घर में शक्ति सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी। अलिशा किसी काम से पुलिस स्टेशन गई हुई थी।

Shivay के घर में इस समय कोई नहीं है। उसने अपने भाई-बहनों को पहले ही राजस्थान वापस भेज दिया था।

टीवी पर आज तक की खबर चल रही थी।

स्क्रीन पर उसी गली का दृश्य दिखाया जा रहा था, जहाँ रणविजय को पकड़ा गया था। खबर में पुलिस की कार्रवाई और रणविजय की गिरफ्तारी की जानकारी दी जा रही थी।

शक्ति कुछ देर तक चुपचाप स्क्रीन देखती रही।

तभी दरवाज़ा खुला और कुशल अंदर आया।

उसने शक्ति को सामने सोफे पर बैठे देखा और उसके पास आकर बैठ गया।

शक्ति ने उसकी तरफ देखते हुए कहा—

"Thanks, कुशल। आज तुमने मेरी बहुत मदद की। अगर तुम रणविजय के transport के बारे में पता करके मुझे information नहीं देते, तो शायद हम कभी उस तक पहुँच ही नहीं पाते।"

कुशल हल्का-सा मुस्कुराया।

"अरे, इसमें thanks की कोई बात नहीं है। मैंने बस वही किया जो मेरे boss ने कहा था। मैंने सिर्फ़ उनके orders follow किए हैं।"

वह कुछ पल रुका और फिर बोला—

"आप thanks मत बोलिए। वैसे भी... आप मेरे लिए मेरी बहन जैसी हैं।"

शक्ति उसकी तरफ देखकर हल्का-सा मुस्कुरा दी।

लेकिन उसके मन में अभी भी रणविजय की कही हुई एक बात घूम रही थी—

"मेरा network पूरे India में फैला है..."

रणविजय गिरफ्तार हो चुका था।

लेकिन क्या उसका network सच में खत्म हो चुका था?

शक्ति की आँखें फिर टीवी की तरफ उठ गईं।


रणविजय सलाखों के पीछे था... लेकिन उसके शब्द अब भी शक्ति के कानों में गूँज रहे थे—क्या सच में ये कहानी यहीं खत्म हो गई थी, या असली खेल अभी बाकी था?

जानने के लिए पढ़ते रहिए—शक्ति के शिव।