that old clock in Hindi Spiritual Stories by Subhan Khan books and stories PDF | वह पुरानी घड़ी

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वह पुरानी घड़ी

वह पुरानी घड़ी

शहर के एक पुराने मोहल्ले में सिया अपनी दादी के साथ रहती थी। उसके माता-पिता दूसरे शहर में नौकरी करते थे, इसलिए सिया को अपनी दादी के साथ ही रहना पड़ता था।

दादी के पास एक बहुत पुरानी घड़ी थी। वह घड़ी हमेशा उनके कमरे की दीवार पर टंगी रहती थी। घड़ी की सुइयाँ अक्सर रुक जाती थीं, लेकिन दादी उसे फेंकती नहीं थीं।

एक दिन सिया ने पूछा, “दादी, यह घड़ी इतनी पुरानी है, फिर भी आप इसे क्यों संभालकर रखती हो?”

दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “इस घड़ी में सिर्फ समय नहीं, मेरी पूरी जिंदगी बसी है।”

सिया को दादी की बात समझ नहीं आई।

एक रविवार को दादी ने घड़ी उतारी और उसे साफ करने लगीं। तभी घड़ी के पीछे से एक छोटा-सा कागज नीचे गिरा।

सिया ने कागज उठाया।

उस पर लिखा था—“जब भी लगे कि सब खत्म हो गया है, समय को एक बार फिर चलाना।”

सिया ने हैरानी से पूछा, “दादी, यह किसने लिखा था?”

दादी कुछ देर चुप रहीं। फिर बोलीं, “तुम्हारे दादाजी ने।”

सिया ने पहली बार दादाजी के बारे में इतने करीब से कुछ सुना था।

दादी ने बताया कि शादी के कुछ साल बाद दादाजी की नौकरी चली गई थी। घर चलाना मुश्किल हो गया था। उस समय उन्होंने छोटी-सी दुकान शुरू की थी। कई बार दुकान में पूरे दिन एक भी ग्राहक नहीं आता था।

एक रात दादाजी बहुत निराश होकर घर लौटे। उन्होंने कहा था, “शायद मैं कभी कुछ नहीं कर पाऊँगा।”

तब दादी ने उन्हें वही घड़ी दिखाई थी और कहा था, “घड़ी रुक सकती है, लेकिन समय नहीं रुकता। हमें भी आगे बढ़ते रहना होगा।”

अगले दिन दादाजी ने फिर दुकान खोली।

धीरे-धीरे दुकान चलने लगी। कुछ वर्षों बाद उन्होंने उसी दुकान को बड़ा व्यापार बना दिया।

सिया ध्यान से दादी की कहानी सुन रही थी।

दादी ने कहा, “तुम्हारे दादाजी ने उस दिन यह बात लिखकर घड़ी के पीछे रख दी थी। वह कहते थे कि जब भी जिंदगी में हार महसूस हो, इसे पढ़ लेना।”

कुछ दिनों बाद सिया की जिंदगी में भी मुश्किल समय आया। स्कूल में उसकी परीक्षा खराब हो गई। उसे लगा कि वह आगे कुछ नहीं कर पाएगी।

वह उदास होकर कमरे में बैठी थी। तभी उसकी नजर दीवार पर लगी उसी पुरानी घड़ी पर पड़ी।

उसे दादी की बात याद आई।

उसने घड़ी उतारी और पीछे वही कागज देखा—

“जब भी लगे कि सब खत्म हो गया है, समय को एक बार फिर चलाना।”

सिया ने कागज को हाथ में लिया और मुस्कुराई।

उस रात उसने अपनी गलतियाँ लिखीं और अगले दिन से दोबारा पढ़ाई शुरू कर दी।

कुछ महीनों बाद उसके परिणाम आए। इस बार उसने अपनी पिछली परीक्षा से बहुत बेहतर अंक हासिल किए।

वह खुशी से दादी के पास दौड़ी।

“दादी! मैंने कर दिखाया!”

दादी ने उसे गले लगाकर कहा, “नहीं बेटा, तुमने सिर्फ परीक्षा पास नहीं की। तुमने हार के बाद दोबारा शुरुआत करना सीख लिया है।”

सिया ने पुरानी घड़ी को देखा। इस बार उसकी सुइयाँ चल रही थीं।

उसने धीरे से कहा, “दादी, अब यह घड़ी कभी नहीं रुकेगी।”

दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “घड़ी रुक भी जाए तो कोई बात नहीं। बस जिंदगी को मत रुकने देना।”

उस दिन सिया ने समझ लिया कि जिंदगी में सबसे बड़ी जीत कभी हार न मानना नहीं, बल्कि हार के बाद फिर से शुरुआत करना है।

सीख: मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता, लेकिन हमारी हिम्मत हमें मुश्किल समय से बाहर जरूर निकाल सकती है।