जिंदगी की दूसरा किनारा पाठ 34
और वही बीच आंगन में मैच के सामने सोफे पर बैठे हुए डॉक्टर देव की माता-पिता
हंसते हुए और एक दूसरे से बातें करते हुए उसकी मां
हंसते हुए उसके पिता से कहती है
बस भी करो जी
और तभी अचानक
बात करते हुए
वो नजरे घुमा कर
अपने बेटे की तरफ देखा है
और अचानक उसे देखते हुए हंसना छोड़
ठहर जाता है
और वही अचानक डॉक्टर हेड
अपनी बेटी को भागते देख
सोचने लगता है कि क्या हुआ
और मुस्कुराना छोड़
उसका पूरा ध्यान अपने बेटे पर टिक जाता है
और वही ज्योति अपने बेटे को भागते हुए जाते देखा
अचानक से मुस्कुराना छोर
हॉकी अपने बेटे की तरफ हाथ बढ़ाते हुए
हल्की ऊंची आवाज में अपने पति से कहता है
इसे क्या हुआ
और यह कहते हुए
अचानक अपने हाथ हल्के नीचे करते हुए
मुड़कर अपने हस्बैंड की तरफ देखती है
और अचानक डॉक्टर हेड
अपनी वाइफ की बातों पर ध्यान देते हुए
और
अपने बेटे की तरफ देखते हुए
अपने बेटे को आवाज लगाकर ऊंची आवाज में कहता है
देव क्या हुआ
और वही देव बिना सुने
अपने कान के पास से फोन वाले हाथों को
अचानक नीचे करते हुए
दौड़ते हुए आगे बढ़ रहा है
और वही दूसरी तरफ टेबल के पास सोफे पर बैठी हुई
ज्योति
अपने पति को देखते हुए
अचानक कर घूमते हुए
और अपनी बेटे की तरफ देखते हुए
उसके तरफ हाथ बढ़ाकर रिएक्ट करते हुए
अचानक से हल्की ऊंची आवाज में कहती है
पहले आकर खाना तो खा ले
और वही देव बिना सुने दौड़ते हुए
आंगन से गलियारों की तरफ जाने लगता है
और
वही डॉक्टर हेड समझ जाता है
कि शायद हॉस्पिटल में कुछ हुआ होगा
और दूसरी तरफ अस्पताल में दृश्य थोड़ी तेज चल रहे हैं
और अस्पताल में
अचानक डॉक्टर के सारे टीम उसे
आईसीयू रूम में पेशेंट के पास है
वह सभी डॉक्टर अपने-अपने पोजीशन लिए
झुकते हुए पेशेंट की हालत को
और उन सभी मेडिकल सुविधा को नोटिस करते हुए
पेशेंट की हालत को नार्मल करने की कोशिश कर रहे हैं
और वो
नर्स मेडिकल सामान प्लेट में लिए
डॉक्टर के पास पेशेंट के बेड के सामने खड़ी है
और वही वैदेही अपनी बेटी कुछ कदम दूर
उसे देखते हुए खड़ी है
और वही उसमें से एक डॉक्टर जो उसके सर की थोड़ी साइड खड़े हैं
वो अचानक से
उसे पेशेंट को देखते हुए
पलट कर अपने हाथ उठाकर
उसे नर्स की तरफ बड़ाते हुए
उस नर्स की प्लेट से एक सिरिंज पड़कर उठाते हुए
सिरिंज को हाथ में लिए
घूम कर पेशेंट की तरफ देखा है
और
तभी अचानक बिप बिप करते हुए
पेशेंटकी लाइव मॉनिटर धीमा होते हुए
रिलैक्स हो जाता है
एकदम से नॉर्मल
और तभी अचानक लाइफ मॉनिटर के सामने खड़े डॉक्टर
लाइफ मॉनिटर को देखते हुए
उसकी आंखें चोड़ी हो जाती है
और अचानक नजरे घूमर डॉक्टर को आवाज लगाते हुए
ऊंची आवाज में कहता है
डॉक्टर
और तभी वह डॉक्टर लाइफ मॉनिटर की आवाज बंद होते सुनते हुए
और उस डॉक्टर की आवाज सुनते हुए
अचानक हाथों में सुई लेकर
हल्के सर उठा कर नजरे घूमते हुए
लाइव मॉनिटर की तरफ देखा है
और तभी अचानक से
यह सुनते ही
वह नर्स भी हल्की सीधी खड़े होते हुए
उस पेशेंट की तरफ देखकर
लाइफ मॉनिटर की तरफ देखती है
और उसके साथ-साथ सारे डॉक्टर भी नजर घूमर लाइव मॉनिटर की तरफ देखा है
और वह दूसरी तरफ डॉक्टर देव
दौड़ते हुए गलियारों से होकर
मूर्ति हुए
अचानक पश्चिम की तरफ जाता है
और अपने दोनों हाथ को आगे लाते हुए
फोन को बाय हाथ लेता है
दाएं हाथ हटाकर
और फिर हल्की झुकते हुए
अपने दाएं हाथ बढ़ाकर अपने पेन की पैकेट से
चाबियां निकलते हुए
अचानक से चाबी की बटनद बाता है
और वही उससे कुछ कदम दूर एक काली कार खड़ी है
और वह बटन दबाते ही जोर की
आवाज करता है
और तभी अचानक डॉक्टर देव दौड़ते हुए
कार के पास जाता है
और वही उसके कार के पास जाते ही
ऑटोमेटेकली कार के आगे की दरवाजा खुलता है
और वह अचानक झुकते हुए
कार में अपना पैर बढ़ाते हुए जाकर में बैठ जाता है
और वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में आईसीयू रूम में
वह डॉक्टर अभी हाथों में सीई रखते हुए
अचानक से लाइक मॉनिटर को देखते हुए
हल्के गहरी सांस लेकर खुद को शांत करता है
और फिर दोबारा
सर घुमा कर हल्की नज़रे नीचे करते हुए
उस पेशेंट की तरफ देखा है
और सिसकिया भरते हुए
गहरी सांस लेता हू
और वही
सारे डॉक्टर गहरी सांस लेते हुए
होंठ खोल कर सिसकिया भरते हुए
उठ खड़ा होता है
और वही वो नर्स हाथों में मेडिकल प्लेट पढ़ते हुए
नजरे घूम कर
उस पेशेंट की तरफ देखते हुए
हल्की सी स्माइल देती है
और वही वह डॉक्टर हाथों में सीई लेते हुए
और गहरी सांस लेते हुए
मरीज के पास से उट खड़ा होता है
और हल्की मुरते हुए
हाथों पड़ी हुई सीई को
हाथ बढ़ाकर उस नर्स की मेडिकल प्लेट में रखता है
और वही वैदेही अपनी बेटी को देखते हुए
अचानक से अपनी ठहरे हुए कदम को
हल्के अपनी बेटी की तरफ बढ़ती है
उसकी चेहरा शांत है पर
उसकी उसके धड़कन के साथ
डर और घबराहट में उसकी पूरी बॉडी कहां पर है
और वहीं दूसरी तरफ
डॉक्टर देव घबराते हुए
कार को स्टार्ट करते हुए
तेज कार को चला कर आगे ले जाते हुए
अचानक स्टेरिंग को घूम कर
कार मोड़ता है
मुड़ते ही कार तेज कर को चलते हुए
अस्पताल जाने के लिए रवाना हो जाता है
और
वहीं दूसरी तरफ हॉस्पिटल में
वह दूसरी नर्सरी कमरे के अंदर आती है
और गेट के पास खड़ी रहकर
आगे उस पेशेंट की तरफ देखती है
और वही वैदेही धीरे-धीरे
अपनी कदम बढ़ाते हुए
अपनी बेटी के पास जाती है
और वही सारे डॉक्टर पेशेंट को सही देखो
और लाइक मॉनिटर को सही से चलते देखा
और वैदेही को अपनी बेटी की तरफ जाते देखा
अचानक
सभी डॉक्टर पेशेंट के पास से साइड होते हुए
और घूम कर
फैशन से दूर बिच कमरे में आने लगते हैं
और वहीं दूसरी तरफ
डॉक्टर देव
घबराहट में पेनिक करते हुए
अपनी कार को तेज करते हुए
और सड़कों पर दौड़ आते हुए
अस्पताल जा रहे हैं
और वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में
आईसीयू रूम में
सेकंड में
वेदेही अपनी बेटी के बेड के पास जाते हुए
अचानक ठहर जाती है
और उन्हें देखते हुए
अचानक से अपने हाथ बड़ कर
अपने सामने रखी गई चेयर को पीछे खींचते हुए
अचानक चेयर को अपने हाथों से छोड़ते हुए
हल्के कदम बढ़ाकर दोनों हाथ आगे लाकर
एक एक दूसरे हाथों से क्रॉस करते हुए बांध कर
डर और घबराहट के मारे थरथराते हुए
अचानक से झुकता हुए अपनी बेटी के सामने
उसे चेयर पर बैठ जाती है
और
वही विच आईसीयू रूम में खड़े
वह सभी
डॉक्टर आपस में बात कर रहे हैं
पेशेंट को देखते हुए
उसमें से एक डॉक्टर हैरान होते हुए
और पेशेंट को गहरी आंखों से नजरे घूम कर देखते हुए
हल्की आवाज में कहता है
बिना कोई दवाई दिए
अचानक से फिर से नार्मल कैसे हो सकता है
और वहीं दूसरी तरफ
वह नर्स उस पेशेंट के पास कुछ कदम दूर खड़ी है
वैदेही को गहरी संवेदना भरी नजरों से देखते हुए
और तभी उस डॉक्टर की बात सुनते हुए
सभी डॉक्टर एक दूसरे से बातें करते हुए
और पेशेंट को देखते हुए
अचानक नजरे घूम कर लाइफ मॉनिटर
की तरफ देखा है
और फिर कुछ सेकेंड बाद नजरे
घूम कर पेशेंट की तरफ
और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में
वीर अपने उतरे हुए चेहरे लिए बाथरुम में
स्वर ले रहा है
उसके सर से गिरते हुए पानी उसके बॉडी की तरह बहते हुए आ रहा है
और वो अपने दोनों हाथों से सर के गली बालों को सहलाते हुए अपने हाथों को भीगी हुई चेहरे की तरफ करता है
हल्के अपनी आंखें बंद करते हुए
और
तभी अचानक बाथरूम के दीवार से के सेल्फ पर रखी हुई इसका फोन उठना है
और
तभी अचानक वह फोन की आवाज सुनते ही
चेहरे पर से हाथ हटाकर हटाकर नीचे करते हुए
साथ में आंखें खोलता है
और दो कदम दो कदम
आगे सेल्फ की तरह बढ़ता है
और अपने पानी वाले ही हाथ उठा कर आगे बढ़ाते हुए
अचानक फोन पे टेप करते हुए
फोन को उठाकर फोन स्पीकर पर डालता है
और अपनी कदम वही रोकते हुए
नहाते हुए फोन के आवाज सुनने लगता है
तभी अचानक उधर से तेज आवाज आती है
मैं आपकी कितनी देर से इंतजार कर रही हुं
भाई
और तभी वीर सबर लेते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहता है
ठीक है मैं नहानें के बाद आ रहा हूं
और वही नीचे बैठे तृषा
खाने के भरी हुई इमेज के सामने सोफे पर
तिरछी सीडीओ की तरफ मुंह करके बैठी हुई है
सीडीओ की तरफ नजर गिरा कर देखते हुए
और अपने बाएं हाथ में फोन लेकर
अपने चेहरे से थोड़ी दूर रखते हुए
आगे अपने भाई से चेहकती हुई आवाज में कहती है
औ
दुनिया कहां से कहां चलागया
और आप अब तलक बस सावर ले रहे है
और वही विर नहाते हुए
अपने बॉडी और चेहरे और सर पर हाथ मारते हुए
बस उसकी बातें सुनता रहता है
और वही तभी तृषा
सीडीओ की तरफ देखते हुए
चेहकते हुए आवाज में आगे कहती है
पता है कितना टाइम हुआ
और वही उसके पीछे
वह सिक्योरिटी गार्ड सुनील खड़ा है
और वही नाश्ते की मैच के बगल में
दोनों नौकरानी चुपचाप वहां खड़ी है
और वही अचानक वीर नहाते हुए
और अपनी बहन की बातें सुनते हुए
उदास भरी चेहरे और
हॉकी जल्दबाजी भरी आवाज के साथ कहता है
ठीक है
नहा कर आ रहा हूं
कुछ देर और तृषा
और तभी तृषा आंगन में बैठी सीडीओ की तरफ देखती हुई अपने भाई से
चाहकते हुए ऊंची आवाज में कहती है
जल्दी लिए नाश्ता ठंडा हो रहा है
और वही वीर बाथरूम में नहाते हुए
फोन के कटते ही
सर पर हाथ मारते हुए चेहरे से लाकर
नीचे हाथ करते हुए
उदास चेहरे के साथ
बस गहरी आंखों से आगे की तरफ देखा है
हल्की गेहरी सांस लेते हुए
और वहीं दूसरी तरफ अभिराज क्या अपार्टमेंट में
अभिराज लोभी में लगे हुए बेड पर चुपचाप
दोनों हाथ आगे करते हुए बैठे हुए हैं
अपने गंभीर चेहरे के साथ
और दूसरी तरफ
अपने कमरे में मालिका
अलमारी से सारा कपड़ा
दोनों हाथ डालते हुए खींचकर निकाल रही है
और ठीक अलमारी से कुछ कदम दूर
दो सूटकेस रखे हुए हैं
और वही मालिका के आंखों में आंसू है
और वह सिसकते हुए
सारे कपड़े को नीचे खींचकर गिर रही है
और मान में बरबराते हुए
वैदेही को गाली देते हुए कहती है
साली कुत्तिया
खुद को समझती क्या है
और वही मालिका के देख कर लगता है
उसके मन में डर है
अभिराज की
और बहुत ज्यादा नफरत वैदेही
और मेघना के लिए है
और वही वह सारे कपड़ों को निकालने के
बाद एक कदम बढ़ाकर
हाथ बढ़ाते हुए
साईट में रखी हुई सुटकेस को पकड़ के
खींचकर अपने तरफ लाती है
और दोनों हाथ लगा कर सुटकेस को खोलते हुए
गुस्से में
आगे गाली देते हुए कहती
पता नहीं यह सब कब मेरी जिंदगी से दूर होंगे
और फिर सुटकेस से अपना हाथ हटाते हुए
अचानक दांत भेजते हुए
आगे कहती है
सच में यह मर क्यों नहीं जाति
और फिर यह कहते हुए
अपने हाथ निचे करके सारे कपड़ों को पकड़ कर
बिना समेटे ही खींच खींच कर उठाते हुए
सूटकेस में भरने लगती है
सिसक सिसक कर रोते हू
और वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर देव के घर के
आंगन में
ज्योति अपने बेटे को जाते हुए देखा
अपने पति की तरफ देखते हुए
गुस्से में आगे देखते हुए
ऊंची आवाज में कहती है
तुम दोनों बाप बेटे ऐसे ही करते हो
हमेशा
अब दोपहर तक भूखे रहोगे
और वही डॉक्टर हैड अपने वाइफ की तरह देखते हुए
मुस्कुरा कर हल्की आवाज में कहता है
कोई बात नहीं
तुम लंच दे देना
मैं उसे जाते ही खिला दूंगा
और
तभी अचानक ज्योति
यह सुनते ही
पलटते हुए अचानक अपने हाथ उठाते हुए
अपने पति के सीने पर हल्के जोर से मारते हुए
गुस्से से मुंह बनाते हुए
ऊंची आवाज में कहती है
लंच बनाने की बातें मत करो
खुद बनाओ
और ले जाओ
और फिर ज्योति अचानक से नजर उठा कर अपने पति की तरफ देखते हुए
और उसके सीने पे से हल्की अपना हाथ हटाते हुए
गुस्से मे मुंह बना कर रियाक्ट करते हुऊ
आगे ऊंची आवाज में कहती है
आपने प्यारे बेटे के लिए
मैं तुम दोनो से तंग आ गई हुं
और तभी अचानक डॉक्टर हेड
नजरे उठाकर अपनी वाइफ की आंखों की तरह
मुस्कुराते हुए कुछ संकेड देखते हुए
अचानक अपने हाथ बढ़ाकर
अपने सीने के पास ठहरी हुई
अपनी वाइफ हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए
मुस्कुराकर हल्की आवाज में कहता है
हां क्या कर रही हो
तुम्हारा बेटा जल्दी गया
तुम्हारे बेटे की गलती तो मुझे
क्यों मार रही है
और
तभी अचानक ज्योति अपने पति का बातें सुन
और अपनी हल्की नजरे झुका कर
अपने पति को अपना हाथ पकड़ते देख
अचानक से अपनी हाथों की जोर से मुठिया बांधते हुए
कुछ संकेड ठहेर जाती है
और वही डॉक्टर हेड अपनी वाइफ की हाथ पकड़े हुए
और उने देखते हुए
मुस्कुराकर
अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए कहती है
क्या तुम चाहती हो कि दिन भर तुम्हारा बेटा भूखा रहे
और मैं यहां बैठकर तुम्हारा मार खाउ
और तभी ज्योति अपने पति की बातें सुनते हुए
अचानक नजरें उठाकर
अपने पति की चेहरे की तरह देखती हुए
अचानक से गुस्से मे आ कर
अपने पति की हाथों से अपने हाथों मूर्तियों को छुड़ाने की कोशिश करते हुए
और हल्की अजीब रियाक्ट करते हुए
अपनी पति से चंचल भरी ऊंची आवाज में कहती है
आ
छोरऐ ना जी
फिर आपको किसने रोका
आप भी जाऐ
और तभी अचानक डॉक्टर हेड
अपनी वाइफ को हाथों की मुठियो को अपनि तरफ
खींचकर हुए
और उने अपनी बाहों से लगाते हुए
मुस्कुराकर उने देखते हुए
और हल्की जोलाईन को सिकोड़ कर
होठों को खोलते हुए
हल्की ठेहराऊ भरी ऊंची आवाज मे कहता है
औ
तुम कितनी कठोर दिल है
जब तुम्हें अपने बेटे की तरह दरिया दिल होना चाहिए
और वही अचानक ज्योति अपने पति की सारे बातें इग्नोर करते हुए
बस उनके मुंह से अपने बेटे की नाम सुनते ही
अचानक रुक जाती है
और अपनी हस्बैंड को देखते हुए
अचानक इमोशनल हो कर आजिव सी मुंह बनाने लगती है
और तभी अचानक डॉ हेड
अपनी अपने वाइप की अजीत इमोशनल चेहरा देखते हुए
उसक मुस्कुराता हुआ चेहरा उतरते हुए हल्का हो जाता है
और वो अपनी वाइप की हाथों को हल्की डिला छोड़ते हुए
उनसे कहने की कोशिश करता है
क्या हुआ
और तभी अचानक ज्योति इमोशनल होकर
मुंह बनाते हुए
अपने पति को देखते ही
अचानक पलट कर आगन की देख के हुए
अपनी चेहरे और होठों को सिकोड़ कर
अजिब रियाक्ड करते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहती है
होय मेरा बेटा
और आप तभी अचानक डॉक्टर हेड
अपनी वाइफ के मुंह से या सुनते हुए
और उन्हें आगे आंगन की तरह देखते हुए
अचानक वो भी अपनी वाइफ से नज़रे हटाकर
आंगन कि तरफ देखने लगता है
और वही ज्योति
यह कहते हुए अचानक से
अपने हाथ अपने पति के हाथों से छुरा के हुए
हल्के आगे ला कर
और आगे की तरफ देखते हुए
इमोशनल होकर चेहरे और होठों को सिकोड़ते हुए
रोने जेसे चेहरा बनाकर
रियाकट करते हुए इमोशनल ऊंठी अरबाज में कहती है
कितना दुबला पतला हो गया है
टाइम से खाना भी नहीं खाता
या कहते अचानक हल्की मुड़ कर
दोनो हाथ साइड करते हुए
एक हाथ साइड रख कर
दाई हाथ धीरे-धीरे बड़ाकर अपने हस्बैंड की सीने पर रखते हुए
और इमोशनल हो जाती है
और उनके शोल्डर के पास अपना सर रख देती है
और वही डॉक्टर हैड अचानक से
अपने वाई हाथ उठाकर
अपने वाइफ के सर पर रखते हुए
और उने बाहों में लेते हुए
और उने देखकर
हल्की नजर उस के नजरों के साथ आगे आंगन की तरफ दोहराते हैं
और उन्हें दिलासा देने की कोशिश करते हुए
हल्की मुस्कुराकर रियाकट करते हो
मुंह खोलते हुए
हल्की हामी भरते हुए
ठेहराऊ भरी हल्की ऊंची आवाज में कहता है
ओ
कोई बात नहीं
कहते हैं लोगों की जान बचाने से पुण्य मिलते हैं
और तुम्हारा बेटा तो
अभी अभी पुणय की रास्ते पर जा ही रहा है
और यह सुनते ही
अचानक ज्योति अपने सर अपने पति के सीने के पास से हटाते हुए
सर घूमकर
नजरे उठाते हुए
अपने पति की तरफ गहरी काड़ी आंखों से देखने लगती है
इमोशनल होना छोर सख्त चेहरे लिऐ
और
तभी अचानक से डॉ हेड
अपने वाइफ के अपने सिने के पास से
सर से हट देख
अचानक आगे से नजरे घुमा कर निचे करते हुए
अपने वाइफ को सख्त चेहरे और कड़ी आंखों को देख
अचानक उसके मुस्कुराती से चेहरा
उतरते हुए गंभीर हो जाता
और उसके हाथ अपने आप अपने वाइफ के सर से हटते हुए
निचे हो जाता
और वो
अपनी वाइफ की सखत चेहरा और कड़ी आंखों देख कर
समझ आता है
कि उसने अपनी वाइफ को दिलासा नहीं दिया है
बल्कि अपने लिए मुसीबत तय किया है
और
वही ज्योति अपने पति को सखत और गभिर चेहरे लिए
कड़ी आंखों से वैसे ही देखती जा रही
और वही डॉक्टर हेड
अपनी वाइफ से डरते हुए
घबराहट में होंठों को सिकोड़ते हुए
अपनी वाइफ की वेसे ही नजरे झुकाते हुए तरफ देख रहा है
अगर ऐ कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में
मैं आपकी प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯