एपिसोड 47 — शक की पहली दरार
सुबह के करीब आठ बजे City Hospital की इमारत हमेशा की तरह मरीजों और डॉक्टरों की भीड़ से भरी हुई थी।
कॉरिडोर में नर्सें तेजी से एक वार्ड से दूसरे वार्ड जा रही थीं। कहीं मरीज के परिजन परेशान खड़े थे, तो कहीं डॉक्टर अपनी टीम को निर्देश दे रहे थे।
लेकिन इन सबके बीच अर्जुन वशिष्ठ का चेहरा आज कुछ अलग था।
वह हमेशा की तरह शांत था, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब-सी बेचैनी थी।
कल रात रohan की कही हुई एक बात बार-बार उसके दिमाग में घूम रही थी।
“नासिर खान की मौत से पहले रघुवीर उनसे मिला था।”
अर्जुन ने पूरी रात उस बात को सच और झूठ के बीच तौलते हुए बिताई थी।
रघुवीर चाचा उसके परिवार के साथ पिछले पच्चीस सालों से थे। बचपन से उसने उन्हें अपने घर का हिस्सा ही समझा था।
लेकिन अब A-27 की फाइल, उसके दादाजी की डायरी, नासिर खान और राघव मेहरा की तस्वीर...
हर चीज एक ही दिशा की तरफ इशारा कर रही थी।
और सबसे बड़ी बात—
आयत के बचपन की वह तस्वीर।
जिसमें वह रघुवीर के साथ थी।
“अर्जुन?”
आयत की आवाज सुनकर उसकी सोच टूटी।
वह उसके सामने खड़ी थी।
हाथ में मरीज की फाइल थी और चेहरे पर वही मासूमियत, जिसे देखकर अर्जुन का गुस्सा भी अक्सर शांत हो जाता था।
“तुम यहां कब से खड़ी हो?”
आयत ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
“अभी।”
“मैं तुम्हें कब से बुला रही हूं।”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
कुछ सेकंड तक दोनों की आंखें मिलीं।
फिर अर्जुन ने नजरें हटा लीं।
“चलो। वार्ड राउंड का टाइम हो गया है।”
आयत ने उसकी चाल के साथ कदम मिलाए।
लेकिन आज अर्जुन उससे कुछ दूरी बनाकर चल रहा था।
आयत ने महसूस कर लिया था।
“सब ठीक है?”
“हां।”
“पक्का?”
“आयत, मैंने कहा ना... सब ठीक है।”
उसकी आवाज थोड़ी सख्त थी।
आयत चुप हो गई।
वह समझ नहीं पा रही थी कि अचानक अर्जुन के व्यवहार में यह बदलाव क्यों आ गया।
कुछ ही देर बाद दोनों मरीजों की जांच करने लगे।
एक बुजुर्ग मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई।
“बीपी गिर रहा है!” आयत ने घबराकर कहा।
अर्जुन तुरंत मरीज के पास पहुंचा।
“ऑक्सीजन लगाओ। नर्स को बुलाओ।”
आयत ने तुरंत निर्देशों का पालन किया।
कुछ मिनटों की कोशिश के बाद मरीज की हालत स्थिर होने लगी।
अर्जुन ने राहत की सांस ली।
उसने आयत की तरफ देखा।
“Good work.”
आयत के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
“Thanks.”
कुछ पल के लिए दोनों के बीच की दूरी कम हुई।
लेकिन तभी अर्जुन की नजर आयत के गले में पड़े उस लॉकेट पर चली गई।
वही लॉकेट...
जिसका संबंध A-27 से था।
उसकी आंखों में फिर सवाल उभर आया।
क्या आयत को सच में कुछ नहीं पता?
या फिर वह उससे कुछ छिपा रही थी?
उधर अस्पताल की दूसरी मंजिल पर रघुवीर का एक आदमी खड़ा था।
उसने जेब से फोन निकाला।
“काम हो गया?”
दूसरी तरफ से आवाज आई।
“लगभग।”
“सबूत ऐसा होना चाहिए कि अर्जुन को किसी और पर शक करने का मौका ही न मिले।”
“और अगर आयत ने सफाई दे दी तो?”
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद जवाब आया—
“अर्जुन को आयत पर इतना शक करा दो कि वह उसकी सफाई सुनना ही न चाहे।”
फोन कट गया।
उस आदमी ने जेब से एक छोटी-सी पेन ड्राइव निकाली।
उस पर लिखा था—
A-27
दोपहर में सभी छात्रों को अस्पताल के सेमिनार हॉल में बुलाया गया।
Principal Sharma के साथ अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर भी मौजूद थे।
“इस एक महीने की ट्रेनिंग में सिर्फ पढ़ाई नहीं होगी,” डॉक्टर ने कहा, “आप सभी का मूल्यांकन मरीजों के प्रति आपका व्यवहार, आपकी clinical understanding और आपकी teamwork देखकर किया जाएगा।”
सभी छात्र ध्यान से सुन रहे थे।
लेकिन रohan की नजर बार-बार अर्जुन पर जा रही थी।
उसे महसूस हो रहा था कि अर्जुन आज सामान्य नहीं था।
सेमिनार खत्म होने के बाद रohan उसके पास आया।
“अर्जुन।”
अर्जुन रुका।
“क्या?”
“कल मैंने जो बताया था... उसके बारे में कुछ पता चला?”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
“नहीं।”
“तुमने रघुवीर से पूछा?”
अर्जुन की आंखें थोड़ी सिकुड़ गईं।
“अभी नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि अगर वह सच में कुछ छिपा रहा है, तो सीधे सवाल करने से वह सावधान हो जाएगा।”
Rohan कुछ पल उसे देखता रहा।
“तो तुम उस पर शक कर रहे हो?”
अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।
तभी पीछे से आयत की आवाज आई—
“अर्जुन!”
दोनों ने पीछे देखा।
आयत वहां खड़ी थी।
“मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।”
Rohan ने अर्जुन की तरफ देखा और चुपचाप वहां से चला गया।
आयत उसके पास आई।
“तुम मुझसे नाराज हो?”
अर्जुन चुप।
“अगर मैंने कुछ किया है तो बता दो।”
“तुमने कुछ नहीं किया।”
“फिर तुम ऐसे behave क्यों कर रहे हो?”
अर्जुन ने उसकी आंखों में देखा।
उसकी आंखों में सचमुच उलझन थी।
“कुछ बातें हैं जिनके जवाब मुझे खुद नहीं पता।”
“तो मुझसे पूछ लो।”
अर्जुन कुछ कहने ही वाला था कि तभी एक नर्स वहां दौड़ती हुई आई।
“अर्जुन सर! आपको अभी Records Room में बुलाया है।”
“क्यों?”
“आपके नाम से एक urgent file मिली है।”
अर्जुन तुरंत वहां चला गया।
आयत भी उसके पीछे जाने लगी, लेकिन नर्स ने उसे रोक दिया।
“सर ने सिर्फ अर्जुन सर को बुलाया है।”
आयत वहीं रुक गई।
Records Room में अर्जुन के सामने अस्पताल का रिकॉर्ड अधिकारी खड़ा था।
“ये फाइल हमें restricted section में मिली है।”
अर्जुन ने फाइल उठाई।
उसके ऊपर लिखा था—
A-27 — Confidential
अर्जुन का दिल तेज धड़कने लगा।
“ये यहां कैसे आई?”
“हमें नहीं पता।”
“किसने access किया?”
अधिकारी ने कंप्यूटर स्क्रीन उसकी तरफ घुमाई।
“आज सुबह 6:42 पर।”
अर्जुन की नजर स्क्रीन पर गई।
User ID देखकर उसका चेहरा बदल गया।
वह नाम था—
AYAT KHAN
कुछ सेकंड तक अर्जुन स्क्रीन को देखता रहा।
“Impossible…”
अधिकारी ने कहा, “हमने भी सोचा था कि शायद system error है। इसलिए हमने access log निकाला।”
उसने दूसरी स्क्रीन खोली।
उसमें CCTV फुटेज थी।
समय—6:41 AM.
एक लड़की Records Room के पास से गुजर रही थी।
चेहरा साफ नहीं दिख रहा था।
लेकिन कपड़े...
दुपट्टा...
सब कुछ आयत जैसा लग रहा था।
अर्जुन का चेहरा कठोर हो गया।
“क्या आप पक्का कह रहे हैं कि ये उसकी ID है?”
“हां।”
“और फाइल?”
“वही A-27।”
अर्जुन ने फाइल खोल दी।
अंदर कुछ पुराने दस्तावेज थे।
नासिर खान का नाम।
राघव मेहरा का नाम।
और—
Vashisht Family
अर्जुन की उंगलियां ठंडी पड़ गईं।
तभी फाइल के अंदर से एक तस्वीर नीचे गिर गई।
उसने तस्वीर उठाई।
तस्वीर में आयत थी।
लेकिन वह अकेली नहीं थी।
उसके साथ एक ऐसा आदमी खड़ा था जिसे अर्जुन पहचानता था।
रघुवीर।
अर्जुन की आंखें फैल गईं।
“ये तस्वीर यहां क्यों है?”
उसी समय उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
“जिस पर भरोसा कर रहे हो, असली राज उसी के पास है।”
अर्जुन ने तुरंत नंबर पर कॉल किया।
फोन बंद था।
उसने दोबारा तस्वीर देखी।
फिर फाइल।
फिर स्क्रीन पर आयत की ID।
उसके दिमाग में एक साथ कई सवाल घूमने लगे।
क्या आयत सच में A-27 के बारे में पहले से जानती थी?
क्या वह उससे कुछ छिपा रही थी?
और अगर नहीं... तो उसकी ID का इस्तेमाल किसने किया?
दूसरी तरफ आयत कॉरिडोर में अर्जुन का इंतजार कर रही थी।
करीब बीस मिनट बीत गए।
अर्जुन बाहर आया।
आयत तुरंत उसके पास पहुंची।
“क्या हुआ?”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
आज उसकी आंखों में पहली बार अपनापन नहीं था।
सिर्फ सवाल था।
“तुम आज सुबह छह बजकर बयालीस मिनट पर कहां थीं?”
आयत चौंक गई।
“मैं?”
“हां।”
“मैं हॉस्टल में थी।”
“पक्का?”
आयत की आंखों में चोट उतर आई।
“तुम मुझसे ये क्यों पूछ रहे हो?”
अर्जुन ने कुछ नहीं कहा।
आयत ने धीरे से पूछा—
“क्या तुम मुझ पर शक कर रहे हो?”
अर्जुन के होंठ खुले, लेकिन आवाज नहीं निकली।
आयत ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“अर्जुन... अगर तुम भी मुझ पर भरोसा नहीं करोगे, तो मैं किस पर भरोसा करूं?”
अर्जुन का दिल भीतर से हिल गया।
वह जवाब देना चाहता था।
कहना चाहता था कि उसे उस पर शक नहीं है।
लेकिन उसके हाथ में पकड़ी A-27 की फाइल और सामने खड़ी आयत के बीच उसकी समझ उलझ चुकी थी।
वह सिर्फ इतना बोल पाया—
“मुझे कुछ जवाब चाहिए, आयत।”
आयत की आंखों में आंसू आ गए।
“और अगर मेरे पास उन सवालों के जवाब ही नहीं हैं?”
अर्जुन चुप रहा।
आयत धीरे-धीरे वहां से चली गई।
कुछ दूर जाकर उसने पलटकर अर्जुन को देखा।
लेकिन अर्जुन वहीं खड़ा था।
उसके हाथ में A-27 की फाइल थी।
और उसके भीतर पहली बार—
आयत के लिए प्यार और उसके खिलाफ उठता शक आमने-सामने खड़े थे।
उधर अस्पताल की पार्किंग में एक काली कार खड़ी थी।
कार के अंदर रघुवीर बैठा था।
उसके हाथ में वही तस्वीर थी।
उसने मुस्कुराकर तस्वीर को देखा और फोन पर कहा—
“पहली दरार पड़ चुकी है।”
दूसरी तरफ से सवाल आया—
“और अगला कदम?”
रघुवीर की मुस्कान और गहरी हो गई।
“अब अर्जुन को ये यकीन दिलाना है कि आयत सिर्फ A-27 के बारे में जानती ही नहीं थी…”
वह कुछ पल रुका।
फिर धीमी आवाज में बोला—
“बल्कि उसके पिता की मौत के पीछे छिपे सच का एक हिस्सा आयत खुद भी जानती है।”
कार का दरवाजा बंद हुआ।
और उसी पल—
अर्जुन के फोन पर एक और मैसेज आया।
“अगर सच जानना है, तो आज रात पुराने मंदिर में अकेले आना।”
नीचे सिर्फ एक नाम लिखा था—
RUDRA
जारी रहेगा...