Her Silent Secret in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Her Silent Secret - 42

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Her Silent Secret - 42

कुछ हफ्ते बीत चुके थे। पहाड़ियों की ठंडी हवा और डॉ. आर्यन की नियमित थेरेपी ने संयोगिता के चेहरे से वह कठोरता धो दी थी जो सालों से जमी हुई थी। अब वह कमरे में खिड़की के पास बैठकर किताबें पढ़ती, या विराट के साथ चाय पीते हुए बातें करती। उसकी आँखों में वह खालीपन नहीं, बल्कि एक शांत गहराई थी।

लेकिन बाहर की दुनिया शांत नहीं थी। एक दोपहर, जब विराट डॉ. आर्यन के साथ संयोगिता की प्रगति पर चर्चा कर रहा था, तभी विराट का फोन बजा। स्क्रीन पर 'इंस्पेक्टर रणवीर' का नाम चमक रहा था। विराट का चेहरा सख्त हो गया। उसने फोन उठाया।

विराट बोला - 
हाँ, इंस्पेक्टर?

इंस्पेक्टर रणवीर (फोन पर, भारी आवाज में) बोले - 
विराट , हमें उस गोदाम वाली जगह से कुछ नए सुराग मिले हैं। और एक बात... उस शिकारी के परिवार वालों ने मीडिया को लीक कर दिया है कि उनकी बेटी महक की हत्या हुई है, और हमें संदेह है कि यह काम किसी 'प्रोफेशनल किलर' का है। पुलिस पूरे शहर में छापेमारी कर रही है। अगर संयोगिता मैडम कहीं छिपी हैं, तो बेहतर होगा कि वे खुद सामने आ जाएं, वरना...

विराट ने गुस्से में दांत भींचे हुए बोला - 
वरना क्या? वह मानसिक रूप से अस्थिर हैं और इलाज करा रही हैं।

इंस्पेक्टर बोला - 
कानून को बहानों से फर्क नहीं पड़ता, विराट जी । हत्या हत्या होती है। मेरे पास 48 घंटे का समय है उसके बाद वारंट जारी हो जाएगा। सोचिएगा।

फोन कट गया। विराट ने फोन जेब में रखा और गहरी सांस ली। डॉ. आर्यन ने उसे देखा।

डॉ. आर्यन बोले - 
मुसीबत?

विराट बोला - 
पुलिस। उन्हें संयोगिता की तलाश है। उन्होंने मीडिया में बात फैला दी है। अगर संयोगिता को इसका पता चला, तो उसका डर वापस आ जाएगा। वह फिर से उस 'शिकारी' मोड में चली जाएगी।

डॉ. आर्यन ने गंभीरता से सिर हिलाया। "यह उसके लिए एक टेस्ट केस है, विराट। अगर वह भागी, तो वह हमेशा के लिए अपराधी बनकर रह जाएगी। अगर वह रुकी और सच का सामना किया, तो ही वह इंसान बन पाएगी। लेकिन इसके लिए उसे बहुत ताकत चाहिए।

विराट कमरे में वापस आया। संयोगिता बालकनी में खड़ी पहाड़ियों को देख रही थी। विराट ने उसे पीछे से गले लगा लिया, लेकिन इस बार उसकी पकड़ में एक अजीब सी घबराहट थी। संयोगिता ने महसूस किया। वह मुड़ी।

संयोगिता बोली - 
क्या हुआ विराट? आपका चेहरा उतरा हुआ क्यों है?

विराट हिचकिचाया। उसे सच बताना था, लेकिन वह संयोगिता को डराना नहीं चाहता था।

विराट बोला - 
संयोगिता... पुलिस को उस गोदाम वाले मामले का पता चल गया है। वे तुम्हें ढूंढ रहे हैं।

संयोगिता का चेहरा पील पड़ गया। उसकी आँखों में वही पुराना डर लौट आया। उसने पीछे हटकर विराट से दूरी बना ली।

संयोगिता (कांपती आवाज में) बोली - 
वे मुझे पकड़ लेंगे, विराट। वे मुझे जेल में डाल देंगे। मैं वहां नहीं जी पाऊंगी। मुझे भागना होगा। फिर से।

विराट ने उसके हाथ पकड़े।

विराट बोला - 
नहीं संयोगिता! भागना बंद करो। अगर तुम भागी, तो तुम हमेशा के लिए एक अपराधी रहोगी। विवान की माँ नहीं, बल्कि एक फरार मुजरिम। क्या तुम यही चाहती हो? कि विवान बड़ा होकर यह जाने कि उसकी माँ एक कायर थी जो अपने कर्मों का सामना नहीं कर सकी?

संयोगिता रो पड़ी बोली - 
लेकिन मैं क्या करूँ, विराट? मैंने एक इंसान को मारा है। मैने एक इंसान को क्या कई लोगों को मारा है।

विराट बोला - 
तुमने ऐसे लोगों को मारा जिन्होंने तुम्हारे जैसे कई लोगों की जिंदगी नर्क बना दी थी। कानून की नजर में यह हत्या है, लेकिन न्याय की नजर में यह बदला था। हम इसे लड़ेंगे। मैं एक अच्छा वकील लाऊंगा। हम साबित करेंगे कि तुम उस वक्त मानसिक रूप से अस्थिर थीं, कि तुम एक सर्वाइवर थीं जिसने सेल्फ-डिफेंस में कदम उठाया था, भले ही वह देर से उठाया हो।

संयोगिता ने सिर हिलाया। 

बोली - 
वे मुझे नहीं छोड़ेंगे।

विराट बोला - 
शायद नहीं। लेकिन अगर तुम सामने आओगी, तो तुम्हें कम से कम सजा होगी। और जेल में रहते हुए भी, तुम विवान की माँ रहोगी। तुम मेरी पत्नी रहोगी। लेकिन अगर तुम भागी, तो तुम सब कुछ खो दोगी।

संयोगिता चुप रही। उसकी सांसें तेज थीं। वह विवान के चेहरे के बारे में सोच रही थी। क्या वह अपने बेटे को यह मुंह दिखा सकती है कि उसकी माँ एक भगोड़ी है? 

तभी, विराट का फोन फिर बजा। इस बार गंगा जी थीं। विराट ने स्पीकर ऑन किया।

गंगा जी (घबराई हुई आवाज में) बोलीं - 
विराट! टीवी पर खबर आ रही है। वे संयोगिता का फोटो दिखा रहे हैं। 'मोस्ट वांटेड' लिखा है। पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया है। लोग कह रहे हैं कि हमारे घर में एक किलर रहती थी। विवान रो रहा है, वह समझ नहीं पा रहा कि लोग उसकी मम्मा के बारे में ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं।

संयोगिता ने फोन की आवाज सुनी। विवान के रोने की आवाज। उसका दिल टूट गया। लेकिन इस बार, टूटने के बाद वह बिखरी नहीं। उसमें एक अजीब सी ठंडक आ गई। वह ठंडक डर की नहीं, बल्कि संकल्प की थी।उसने विराट की आँखों में देखा।

संयोगिता बोली - 
विवान रो रहा है?

विराट बोला - 
हाँ।

संयोगिता बोली - 
और लोग... वे मुझे राक्षस कह रहे हैं?

विराट बोला - 
हाँ।

संयोगिता ने गहरी सांस ली। उसने अपने बालों को पीछे किया और सीधे खड़ी हो गई।

संयोगिता बोली - 
ठीक है। मैं भागूंगी नहीं।

विराट हैरान रह गया।

बोला - 
क्या?

संयोगिता बोली -
मैं भागूंगी नहीं, विराट। मैं वापस जाऊंगी। शहर में। पुलिस स्टेशन में। मैं अपना सरेंडर करूंगी।

डॉ. आर्यन, जो दरवाजे पर खड़े सब सुन रहे थे, अंदर आए।

डॉ. आर्यन बोले - 
यह एक बहुत बड़ा कदम है, संयोगिता। क्या तुम तैयार हो?

संयोगिता बोली - 
नहीं। मैं डरी हुई हूँ। लेकिन विवान के लिए... और उस लड़की के लिए जो कॉलेज में टूट गई थी और जिसकी बिल्ली मारी गई थी... मैं लड़ूंगी। मैं छिपूंगी नहीं। मैं सामना करूंगी।

विराट ने संयोगिता को गले लगा लिया। इस बार, संयोगिता ने भी उसे कसकर पकड़ा।

विराट बोला - 
मैं तुम्हारे साथ हूँ। हर कदम पर। कोर्ट में, जेल में, कहीं भी। हम साथ हैं।

संयोगिता ने मुस्कुराते हुए कहा -
तो चलिए। विवान का इंतजार कर रहा होगा।

अगली सुबह, विराट और संयोगिता शहर की ओर रवाना हुए। यह वापसी आसान नहीं होने वाली थी। मीडिया का शोर, पुलिस की पूछताछ, और समाज की नजरें—सब कुछ उनका इंतजार कर रहा था।

लेकिन संयोगिता अब वह डरी हुई शिकारी नहीं थी। वह एक माँ थी। एक पत्नी थी। और सबसे बढ़कर, एक इंसान थी जो अपनी गलतियों का बोझ उठाने के लिए तैयार थी। कार शहर की सीमा में दाखिल हुई। अंधेरा छंट रहा था, और सुबह की पहली किरण निकल रही थी।

यह अंत नहीं था। यह एक नई लड़ाई की शुरुआत थी।
न्याय की लड़ाई। और इंसानियत की लड़ाई।