एपिसोड 52— हवेली का बंद कमरा
रात के करीब ग्यारह बज चुके थे।
लखनऊ की सड़कों पर धीरे-धीरे सन्नाटा उतर रहा था। लेकिन अर्जुन की बाइक लगातार शहर के उस पुराने हिस्से की तरफ बढ़ रही थी, जहां वशिष्ठ परिवार की पुरानी हवेली मौजूद थी।
पीछे आयत बैठी थी।
उसने दोनों हाथों से सीट को पकड़ रखा था।
कुछ देर से दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी।
आखिर आयत ने चुप्पी तोड़ी।
“अर्जुन...”
“हम्म?”
“तुम्हें लगता है वहां सच में कुछ मिलेगा?”
अर्जुन ने बाइक की रफ्तार थोड़ी कम की।
“पता नहीं।”
“और अगर वहां खतरा हुआ तो?”
“तो मैं संभाल लूंगा।”
“और अगर तुम्हें कुछ हो गया तो?”
अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।
“तुम इतनी चिंता क्यों करती हो?”
आयत कुछ सेकंड चुप रही।
“क्योंकि...”
वह आगे कुछ नहीं बोल पाई।
अर्जुन ने शीशे में उसकी तरफ देखा।
आयत ने तुरंत नजरें दूसरी तरफ कर लीं।
अर्जुन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
“डरो मत। मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा।”
आयत ने धीमे से कहा,
“तुम्हें हर बार यही लगता है कि तुम मुझे बचा लोगे।”
“क्योंकि मैं कोशिश करता रहूंगा।”
इस बार आयत कुछ नहीं बोली।
लेकिन उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान जरूर आ गई।
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कुछ देर बाद दोनों पुरानी हवेली के पीछे बने मंदिर के पास पहुंचे।
वह जगह बाकी हवेली से बिल्कुल अलग थी।
पुरानी दीवारों पर बेलें चढ़ी हुई थीं।
मंदिर का दरवाजा आधा टूटा हुआ था।
अर्जुन ने बाइक बंद की।
दोनों नीचे उतरे।
आयत ने चारों तरफ देखा।
“यहां तो कोई नहीं है।”
अर्जुन ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई।
“किसी ने हमें यहां बुलाया है। कोई न कोई सुराग जरूर होगा।”
दोनों मंदिर के अंदर गए।
अंदर एक पुरानी मूर्ति थी।
उसके सामने पत्थर की चौकी।
अर्जुन ने चौकी को ध्यान से देखा।
वहीं उसे एक छोटा-सा निशान दिखाई दिया।
V
उसने हाथ से धूल साफ की।
नीचे कुछ शब्द खुदे हुए थे।
“जिसे तुम बंद समझते हो, वही रास्ता है।”
आयत ने पढ़ते ही पूछा,
“इसका मतलब?”
अर्जुन ने आसपास देखा।
“शायद कोई secret passage है।”
दोनों ने दीवारों को टटोलना शुरू किया।
कुछ देर बाद आयत का हाथ एक पत्थर पर रुका।
“अर्जुन!”
उसने पत्थर दबाया।
अचानक दीवार के अंदर से हल्की आवाज आई।
क्लिक!
मंदिर की एक दीवार धीरे-धीरे पीछे खिसकने लगी।
आयत की आंखें फैल गईं।
“ये तो सच में खुल गया!”
अर्जुन ने मोबाइल की रोशनी अंदर डाली।
सामने एक संकरा रास्ता था।
“तुम यहीं रुको।”
आयत ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
“नहीं।”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
“ये खतरनाक हो सकता है।”
“और तुम्हें अकेले जाने दूं?”
अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर हल्का-सा सिर हिलाया।
“ठीक है। साथ चलो।”
दोनों उस अंधेरे रास्ते में आगे बढ़ने लगे।
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करीब पचास कदम चलने के बाद रास्ता एक बड़े कमरे में जाकर खत्म हुआ।
कमरे में पुरानी अलमारियां थीं।
कुछ फाइलें।
पुराने दस्तावेज।
और बीच में लकड़ी की एक मेज।
आयत ने धीरे से कहा,
“ये जगह कितनी पुरानी है।”
अर्जुन ने एक फाइल उठाई।
उस पर लिखा था—
वशिष्ठ मेडिकल ट्रस्ट — Confidential Records
अर्जुन ने फाइल खोली।
अंदर उसके दादाजी के हस्ताक्षर थे।
उसके बाद कई मेडिकल रिकॉर्ड।
फिर अचानक एक नाम सामने आया—
नासिर खान।
आयत की सांस अटक गई।
“मेरे पापा...”
अर्जुन ने फाइल आगे बढ़ाई।
उसमें लिखा था कि नासिर खान कई साल पहले वशिष्ठ परिवार के मेडिकल प्रोजेक्ट से जुड़े थे।
आयत ने हैरानी से कहा,
“पापा ने मुझे कभी नहीं बताया कि उनका आपके परिवार से इतना पुराना रिश्ता था।”
अर्जुन ने अगला पन्ना पलटा।
उस पर एक फोटो चिपकी थी।
फोटो में तीन लोग थे—
अर्जुन के दादाजी...
राघव मेहरा...
और नासिर खान।
तीनों किसी मीटिंग में बैठे थे।
लेकिन फोटो के पीछे किसी ने लाल स्याही से लिखा था—
“इन तीनों में से सिर्फ एक ने विश्वासघात किया।”
अर्जुन का चेहरा गंभीर हो गया।
“एक ने?”
आयत ने पूछा,
“तो बाकी दो?”
अर्जुन ने जवाब नहीं दिया।
उसने फाइल आगे पढ़ी।
अगले पन्ने पर सिर्फ एक लाइन थी—
“A-27 को बचाने की कीमत बहुत बड़ी होगी।”
आयत ने पूछा,
“A-27 आखिर है क्या?”
अर्जुन भी यही जानना चाहता था।
तभी कमरे के कोने से हल्की आवाज आई।
दोनों तुरंत पलटे।
वहां एक पुराना रिकॉर्डर पड़ा था।
अर्जुन ने उसे उठाया।
उसमें अभी भी बैटरी थी।
उसने प्ले बटन दबाया।
कुछ सेकंड सिर्फ आवाजों की खरखराहट आई।
फिर एक आदमी की आवाज सुनाई दी।
अर्जुन तुरंत पहचान गया।
“ये दादाजी की आवाज है।”
रिकॉर्डिंग में आवाज आई—
“अगर ये रिकॉर्डिंग कभी किसी गलत इंसान के हाथ लगी, तो समझ लेना कि सब कुछ खत्म हो चुका है।”
आयत सांस रोककर सुनने लगी।
“नासिर को बचाना जरूरी है। उसे रुद्रा के बारे में पता चल चुका है।”
अर्जुन की आंखें फैल गईं।
फिर दूसरी आवाज आई।
वह राघव मेहरा की थी।
“लेकिन अगर नासिर ने सबको बता दिया तो?”
दादाजी की आवाज आई—
“तो हमारे परिवार खत्म हो जाएंगे।”
कुछ सेकंड खामोशी।
फिर तीसरी आवाज सुनाई दी।
अर्जुन का चेहरा सफेद पड़ गया।
वह आवाज...
रघुवीर की थी।
“मैं संभाल लूंगा।”
आयत ने अर्जुन की तरफ देखा।
“रघुवीर चाचा...”
रिकॉर्डिंग अचानक बंद हो गई।
अर्जुन ने रिकॉर्डर कसकर पकड़ लिया।
अब उसके पास पहली बार रघुवीर के खिलाफ ठोस सबूत था।
लेकिन तभी कमरे का दरवाजा जोर से बंद हो गया।
धड़ाम!
आयत घबरा गई।
“अर्जुन!”
अर्जुन ने दरवाजा खोलने की कोशिश की।
दरवाजा बाहर से बंद था।
“पीछे हटो।”
उसने जोर लगाया।
लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
आयत ने चारों तरफ देखा।
“यहां कोई दूसरा रास्ता होगा।”
अर्जुन ने तुरंत कमरे की दीवारें देखनी शुरू कीं।
तभी कमरे में हल्का धुआं भरने लगा।
आयत खांसने लगी।
“अर्जुन... मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।”
अर्जुन ने अपनी शर्ट का कपड़ा उसके मुंह पर रखा।
“घबराओ मत।”
“हम यहां फंस गए हैं।”
“नहीं। हम निकलेंगे।”
लेकिन धुआं लगातार बढ़ रहा था।
अर्जुन ने दीवार पर जोर से हाथ मारा।
एक जगह से खोखली आवाज आई।
उसने तुरंत उस हिस्से को दबाया।
दीवार का एक छोटा हिस्सा खुल गया।
अंदर से हवा आने लगी।
“इधर!”
दोनों उस छोटे रास्ते से निकलने लगे।
कुछ ही सेकंड बाद वे मंदिर के पीछे खुले हिस्से में पहुंच गए।
आयत जमीन पर बैठ गई और तेज-तेज सांस लेने लगी।
अर्जुन उसके पास बैठ गया।
“तुम ठीक हो?”
आयत ने सिर हिलाया।
“हां।”
अर्जुन ने उसके माथे से बाल हटाए।
“तुम्हें कुछ हो जाता तो...”
वह आगे कुछ नहीं बोल पाया।
आयत ने उसकी तरफ देखा।
दोनों की आंखें मिलीं।
कुछ पल के लिए जैसे पूरी दुनिया रुक गई।
आयत ने धीरे से पूछा—
“तुम मुझे खोने से डरते हो?”
अर्जुन ने बिना नजर हटाए कहा—
“बहुत।”
आयत की आंखें नम हो गईं।
“तो फिर मुझ पर शक मत किया करो।”
अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अब नहीं करूंगा।”
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लेकिन दोनों को नहीं पता था कि मंदिर से थोड़ी दूर एक काली कार खड़ी थी।
कार के अंदर रघुवीर बैठा था।
उसने दूर से अर्जुन और आयत को देखा।
उसके हाथ में फोन था।
दूसरी तरफ से आवाज आई—
“वो रिकॉर्डिंग उनके हाथ लग गई?”
रघुवीर शांत रहा।
“हां।”
“फिर तो सब खत्म।”
रघुवीर हल्का-सा मुस्कुराया।
“नहीं।”
“लेकिन अगर अर्जुन ने रिकॉर्डिंग सुन ली तो?”
“उसने सिर्फ आवाज सुनी है। सबूत नहीं है कि आवाज मेरी है।”
दूसरी तरफ से पूछा गया—
“अब क्या?”
रघुवीर ने सामने देखते हुए कहा—
“अब असली चाल।”
उसने फोन पर एक फोटो भेजी।
फोटो में अर्जुन और आयत मंदिर के बाहर साथ खड़े थे।
रघुवीर बोला—
“कल सुबह ये फोटो पूरे कॉलेज में पहुंचेगी।”
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अगली सुबह।
कॉलेज में पहुंचते ही छात्रों के बीच अचानक फुसफुसाहट शुरू हो गई।
“ये देखो...”
“क्या हुआ?”
“ये फोटो किसने भेजी?”
“अर्जुन और आयत?”
रोहन ने जैसे ही फोटो देखी, उसका चेहरा बदल गया।
फोटो में अर्जुन और आयत बेहद करीब खड़े थे।
नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“क्या कॉलेज की ट्रेनिंग सिर्फ मरीजों के लिए है... या कुछ रिश्ते भी बन रहे हैं?”
रोहन के चेहरे पर गुस्सा और बेचैनी दोनों आ गए।
उसने तुरंत आयत को फोन किया।
फोन नहीं उठा।
फिर अर्जुन को कॉल किया।
अर्जुन ने फोन उठाया।
“क्या हुआ?”
रोहन ने कहा—
“कॉलेज में तुम्हारी और आयत की फोटो वायरल हो रही है।”
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
“क्या?”
“तुम दोनों कल रात मंदिर में क्या कर रहे थे?”
अर्जुन ने तुरंत आयत की तरफ देखा।
“सच ढूंढ रहे थे।”
रोहन ने धीमे से कहा—
“तो अब समझो... किसी को पता है कि तुम दोनों सच के करीब पहुंच चुके हो।”
अर्जुन की आंखों में गुस्सा उतर आया।
“रघुवीर।”
रोहन बोला—
“शायद।”
लेकिन उसी समय अर्जुन के फोन पर एक नया मैसेज आया।
“अगर तुमने A-27 की सच्चाई जानने की कोशिश बंद नहीं की, तो अगली तस्वीर आयत की नहीं होगी...”
मैसेज के नीचे एक फोटो थी।
अर्जुन ने फोटो खोली।
और उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
फोटो में था—
उसका छोटा भाई।
और उसके पीछे खड़ा था...
रघुवीर।
अर्जुन की मुट्ठी कस गई।
अब मामला सिर्फ आयत तक सीमित नहीं था।
रघुवीर ने उसके परिवार को निशाना बना लिया था।
जारी रहेगा...