Namumkin Ishq in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 55

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 55

एपिसोड 55— मैं मरा नहीं हूं
कमरे में कुछ सेकंड तक बिल्कुल सन्नाटा रहा।
पुराने मोबाइल की स्क्रीन पर सिर्फ एक ही शब्द चमक रहा था—
RUDRA
और फिर वही आवाज दोबारा सुनाई दी।
“मैं मरा नहीं हूं।”
आयत के चेहरे का रंग उड़ गया।
रोहन ने तुरंत एक कदम पीछे हटते हुए अपने पिता की तरफ देखा।
“पापा... ये क्या हो रहा है?”
लेकिन राघव मेहरा के चेहरे पर ऐसा डर था, जैसा रोहन ने अपने पिता की आंखों में पहले कभी नहीं देखा था।
अर्जुन ने मोबाइल उठा लिया।
“तुम कौन हो?”
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।
फिर आवाज आई—
“अर्जुन वशिष्ठ... तुम्हें अपने दादाजी की डायरी मिल गई है।”
अर्जुन की आंखें सिकुड़ गईं।
“तुम्हें कैसे पता?”
“क्योंकि वो डायरी मैंने ही उन्हें दी थी।”
अर्जुन का दिल जोर से धड़कने लगा।
“तुम रुद्रा हो?”
दूसरी तरफ से हल्की हंसी सुनाई दी।
“नाम से क्या फर्क पड़ता है?”
“मुझे फर्क पड़ता है।”
“तो फिर आगरा के पुराने किले के पीछे बने शिव मंदिर में आओ। वहां तुम्हें पहला जवाब मिलेगा।”
अर्जुन ने तुरंत पूछा—
“और अगर मैं नहीं आया?”
आवाज कुछ पल शांत रही।
फिर बोली—
“तो आयत के पिता की आखिरी सच्चाई हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।”
आयत का दिल बैठ गया।
“मेरे पापा...”
लेकिन इससे पहले कि वह कुछ और पूछती, फोन कट गया।
स्क्रीन फिर काली हो गई।
---
अर्जुन ने तुरंत राघव मेहरा की तरफ देखा।
“अब आप बताएंगे कि ये सब क्या है?”
राघव ने कोई जवाब नहीं दिया।
“आपने कहा था रुद्रा मर चुका है।”
“हां।”
“तो फिर अभी किसने फोन किया?”
राघव चुप रहे।
अर्जुन उनके पास पहुंच गया।
“आप जानते हैं वो कौन है।”
राघव ने नजरें झुका लीं।
“मैं इतना जानता हूं कि उसके पीछे जाना तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा।”
“मेरे लिए?”
अर्जुन की आवाज में गुस्सा था।
“मेरे परिवार का नाम इस मामले में है। आयत के पिता इस मामले में थे। आपके पिता इस मामले में थे। और अब मेरे भाई को धमकी दी जा रही है। आप चाहते हैं कि मैं चुप बैठ जाऊं?”
राघव ने धीरे से कहा,
“अर्जुन, कुछ सच ऐसे होते हैं जिन्हें जानने के बाद इंसान पहले जैसा नहीं रह पाता।”
“मैं पहले जैसा रहना भी नहीं चाहता।”
राघव ने उसकी आंखों में देखा।
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर राघव ने कहा—
“तुम्हें नहीं पता कि तुम किसके पीछे जा रहे हो।”
अर्जुन ने जवाब दिया,
“और आपको पता है?”
राघव चुप रहे।
यही खामोशी अर्जुन के लिए काफी थी।
---
रोहन अपने पिता के पास गया।
“पापा, आपने मुझसे भी सब छिपाया?”
राघव ने उसकी तरफ देखा।
“रोहन...”
“नहीं।”
रोहन की आवाज भर्रा गई।
“आज मुझे सब जानना है।”
“यह मामला तुम्हारे लिए नहीं है।”
“मैं आपका बेटा हूं।”
रोहन की आंखें नम हो गईं।
“अगर मेरे परिवार से जुड़ा कोई आदमी इतने सालों से इस सब में शामिल है, तो मुझे जानने का हक है।”
राघव ने कोई जवाब नहीं दिया।
रोहन ने पहली बार अपने पिता के सामने गुस्से में कहा—
“अगर आपने मुझे सच नहीं बताया, तो मैं खुद पता करूंगा।”
वह मुड़ा और कमरे से बाहर निकल गया।
---
बाहर आयत अकेली खड़ी थी।
उसकी आंखों में आंसू थे।
अर्जुन उसके पास आया।
“आयत...”
उसने उसकी तरफ देखा।
“मेरे पापा इस सब में क्यों थे?”
अर्जुन चुप रहा।
“मुझे लगता था मेरे पापा सिर्फ एक डॉक्टर थे।”
उसकी आवाज टूट गई।
“लेकिन अब पता चल रहा है कि उनके पास कोई secret था। वो तुम्हारे परिवार को जानते थे। रुद्रा उन्हें जानता था। और अब उनकी मौत भी मुझे suspicious लगने लगी है।”
अर्जुन ने धीरे से कहा,
“हम सच पता लगाएंगे।”
आयत ने उसकी तरफ देखा।
“अगर सच हमारे खिलाफ हुआ तो?”
“तब भी।”
“अगर तुम्हारे परिवार के खिलाफ हुआ?”
“तब भी।”
“और अगर मेरे पापा दोषी निकले?”
अर्जुन ने कुछ पल उसकी आंखों में देखा।
“तब भी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा।”
आयत की आंखों से आंसू निकल पड़े।
वह कुछ बोलती, उससे पहले अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“हमारे परिवारों की गलतियों की सजा हमें नहीं मिलेगी।”
आयत ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
---
उधर रोहन कमरे से बाहर निकलकर पार्किंग में आया।
वह बहुत गुस्से में था।
उसने अपने पिता को हमेशा अपना आदर्श माना था।
लेकिन आज पहली बार उसे लगा था कि उसके पिता उससे बहुत कुछ छिपा रहे हैं।
उसने फोन निकाला।
एक अनजान नंबर पर मैसेज किया—
“मुझे रुद्रा के बारे में सब जानना है।”
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
“तो अर्जुन के साथ मत रहो।”
रोहन ने तुरंत पूछा—
“क्यों?”
जवाब आया—
“क्योंकि अर्जुन वशिष्ठ रुद्रा का सबसे बड़ा दुश्मन है।”
रोहन कुछ पल तक स्क्रीन देखता रहा।
फिर दूसरा मैसेज आया—
“और अगर तुम अर्जुन का साथ दोगे, तो तुम्हारे पिता की जान खतरे में पड़ सकती है।”
रोहन के हाथ कांप गए।
वह तुरंत पीछे मुड़ा।
दूर खड़े उसके पिता राघव को देखा।
राघव फोन पर किसी से बात कर रहे थे।
रोहन के मन में पहली बार एक भयानक सवाल आया—
क्या उसके पिता भी खतरे में थे?
---
अगले दिन सुबह अस्पताल में ट्रेनिंग शुरू हो गई।
अर्जुन ने पिछली रात की घटना किसी को नहीं बताई।
लेकिन उसके दिमाग में रुद्रा की आवाज घूम रही थी।
उधर आयत भी चुप थी।
Sanaya ने दोनों को देखा तो पूछ लिया,
“क्या हुआ है तुम दोनों को?”
आयत ने कहा,
“कुछ नहीं।”
Sanaya ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम दोनों जब भी कहते हो ‘कुछ नहीं’, तब समझो जरूर कुछ हुआ है।”
आयत हल्का-सा मुस्कुरा दी।
तभी अचानक Emergency Ward में एक मरीज लाया गया।
उसकी हालत गंभीर थी।
अर्जुन तुरंत मरीज के पास गया।
“BP?”
नर्स ने बताया,
“बहुत कम।”
“ऑक्सीजन लगाइए।”
आयत ने तुरंत दूसरी तरफ से मरीज को संभाला।
कुछ देर की कोशिश के बाद मरीज की हालत स्थिर हुई।
अर्जुन ने उसकी फाइल उठाई।
फाइल पर नाम देखकर उसका हाथ रुक गया।
विक्रम राणा।
उसके नीचे लिखा था—
Previous Medical History: A-27
अर्जुन के चेहरे पर हैरानी छा गई।
“ये मरीज A-27 से जुड़ा हुआ है।”
आयत भी उसके पास आ गई।
“क्या?”
अर्जुन ने फाइल दिखाई।
दोनों मरीज के पास गए।
विक्रम राणा अभी भी बेहोश था।
लेकिन तभी उसकी उंगलियां हिलीं।
आयत झुककर उसके पास गई।
“सर... क्या आप सुन पा रहे हैं?”
मरीज ने आंखें खोलने की कोशिश की।
उसने अर्जुन को देखा।
फिर आयत को।
उसके होंठों से बहुत धीमी आवाज निकली—
“नासिर...”
आयत की सांस अटक गई।
“आप मेरे पापा को जानते थे?”
विक्रम ने मुश्किल से सिर हिलाया।
“वो... दोषी नहीं था।”
आयत की आंखों में आंसू आ गए।
“तो फिर मेरे पापा के साथ क्या हुआ था?”
विक्रम कुछ कहने ही वाला था कि उसकी नजर दरवाजे पर चली गई।
उसका चेहरा अचानक डर से भर गया।
“वो... आ गया।”
अर्जुन तुरंत पलटा।
दरवाजे के बाहर कोई नहीं था।
“कौन?”
विक्रम ने कांपते हुए कहा—
“रुद्रा।”
अगले ही पल उसकी हालत बिगड़ गई।
मॉनिटर तेजी से बीप करने लगा।
नर्स दौड़कर आई।
“Doctor!”
अर्जुन ने तुरंत मरीज को संभाला।
“सब पीछे हटो!”
कुछ मिनटों तक पूरी टीम मरीज को बचाने में लगी रही।
आखिरकार उसकी सांस स्थिर हुई।
अर्जुन ने राहत की सांस ली।
लेकिन अब एक नया सवाल सामने था—
विक्रम राणा ने रुद्रा को देखा कैसे?
---
शाम होते ही अर्जुन ने रोहन को अपने पास बुलाया।
“मुझे तुमसे बात करनी है।”
रोहन उसके सामने आकर खड़ा हुआ।
“क्या हुआ?”
“तुम्हारे पिता कुछ जानते हैं।”
रोहन कुछ पल चुप रहा।
“हां।”
अर्जुन चौंका।
“तुम्हें पता है?”
“उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया।”
“फिर?”
रोहन ने अपना फोन अर्जुन को दिखाया।
उसमें वही मैसेज थे।
अर्जुन ने सब पढ़ा।
“ये किसने भेजे?”
“पता नहीं।”
अर्जुन ने पूछा,
“तुमने जवाब क्यों दिया?”
रोहन ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“क्योंकि मुझे अपने पिता को बचाना है।”
अर्जुन ने गंभीर स्वर में कहा,
“अगर कोई तुम्हें मेरे खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है तो?”
रोहन कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
“मैं नहीं जानता।”
“रोहन...”
“लेकिन एक बात जानता हूं।”
रोहन अर्जुन के करीब आया।
“मैं तुमसे मुकाबला कर सकता हूं। आयत के लिए तुमसे लड़ सकता हूं। तुम्हारे खिलाफ गुस्सा कर सकता हूं।”
वह रुका।
“लेकिन अपने दोस्त को किसी के हाथों मरने नहीं दूंगा।”
अर्जुन ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।
“तो फिर साथ रहो।”
रोहन ने हाथ आगे बढ़ाया।
अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
लेकिन दोनों को नहीं पता था कि उनकी यह बातचीत किसी तीसरे व्यक्ति ने देख ली थी।
---
रात में अर्जुन के फोन पर एक आखिरी मैसेज आया।
“कल सुबह 6 बजे। आगरा का पुराना शिव मंदिर।”
नीचे लिखा था—
“अकेले आना।”
अर्जुन ने स्क्रीन बंद कर दी।
आयत ने पूछा,
“क्या हुआ?”
अर्जुन ने कुछ पल उसे देखा।
फिर कहा—
“कुछ नहीं।”
आयत मुस्कुराई।
“तुम भी अब मुझसे झूठ बोलने लगे?”
अर्जुन चुप हो गया।
आयत उसके पास आई।
“अगर खतरा है तो मुझे बताओ।”
अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“इस बार तुम मेरे साथ नहीं आओगी।”
आयत ने तुरंत कहा,
“क्यों?”
“क्योंकि मैसेज में अकेले आने को कहा है।”
“और तुम अकेले चले जाओगे?”
“हां।”
“बिल्कुल नहीं।”
आयत की आंखों में जिद थी।
“जहां तुम्हारा खतरा है, वहां मैं भी रहूंगी।”
अर्जुन ने उसे समझाने की कोशिश की।
लेकिन आयत ने साफ कह दिया—
“अगर तुम अकेले गए, तो मैं तुम्हारा पीछा करूंगी।”
अर्जुन उसे देखता रहा।
फिर हल्का-सा मुस्कुराया।
“तुम कभी मेरी बात मानोगी भी?”
आयत ने मुस्कुराकर कहा—
“जब तुम सही बात करना सीखोगे।”
दोनों हंस पड़े।
लेकिन अगले ही पल अर्जुन के फोन पर एक और मैसेज आया।
इस बार सिर्फ एक तस्वीर थी।
तस्वीर में आयत का घर था।
और उसके बाहर खड़ा एक आदमी।
चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।
आयत ने तस्वीर देखते ही चीख दबा ली।
“ये...”
अर्जुन ने फोन कसकर पकड़ लिया।
वह आदमी था—
नासिर खान।
लेकिन नासिर की मौत को पांच साल हो चुके थे।
आयत कांपती आवाज में बोली—
“अर्जुन... अगर ये फोटो अभी की है...”
अर्जुन ने उसकी बात पूरी की—
“तो तुम्हारे पापा जिंदा हैं।”
दोनों की आंखें एक-दूसरे से मिलीं।
और उसी वक्त फोन पर आखिरी मैसेज आया—
“अब समझे, रुद्रा क्यों कहता है कि वो मरा नहीं है?”
जारी रहेगा...