Mr. & Ms. Fake
Episode 43 – The Ring That Changed Everything
“ये अंगूठी…”
राजवीर की नजर नैना के हाथ में मौजूद काली अंगूठी पर टिकी थी।
“तुम्हारी माँ की नहीं थी।”
नैना ने हैरानी से पूछा—
“तो किसकी थी?”
राजवीर ने जवाब देने से पहले रुद्र की तरफ देखा।
रुद्र समझ गया कि अब वह राज छुपाना मुश्किल होगा।
“ये उस आदमी की थी…”
राजवीर की आवाज भारी हो गई।
“जिसने तुम्हारी माँ को मारा।”
तीनों बहनों के चेहरों पर एक साथ डर उतर आया।
सान्वी ने नैना की तरफ देखा।
“तुम्हारे पास ये अंगूठी इतने सालों से थी?”
नैना ने धीरे से सिर हिलाया।
“हाँ।”
“किसने दी थी?”
“मुझे नहीं पता।”
“तुम्हें कुछ याद नहीं?”
नैना ने अपनी आँखें बंद कीं।
“बस इतना याद है कि जब मैं बहुत छोटी थी, एक आदमी ने मुझे ये अंगूठी पहनाई थी।”
“उसने कहा था…”
नैना रुक गई।
“क्या?”
“उसने कहा था—‘जब तुम्हारी बहन तुम्हें ढूँढे, तो ये उसे दे देना।’”
सान्वी की धड़कन तेज हो गई।
“बहन?”
“उसने मेरा नाम नहीं लिया था।”
नैना ने सान्वी की तरफ देखा।
“लेकिन शायद वो तुम्हारे बारे में बात कर रहा था।”
आरोही ने पूछा—
“तुम्हें वो आदमी याद है?”
नैना ने सिर हिलाया।
“चेहरा नहीं।”
“लेकिन उसकी आवाज?”
“हाँ।”
सान्वी ने तुरंत पूछा—
“कैसी थी?”
नैना ने कुछ पल सोचकर कहा—
“बहुत शांत।”
“इतनी शांत कि डर और बढ़ जाता था।”
Aryveer ने पूछा—
“उसने और क्या कहा था?”
नैना ने कहा—
“बस एक बात।”
“क्या?”
“उसने कहा था…”
नैना ने सान्वी की तरफ देखते हुए कहा—
“तीनों को कभी एक मत होने देना।”
सन्नाटा।
सान्वी के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
Aryveer ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अब वो तीनों एक साथ हैं।”
नैना ने उसकी तरफ देखा।
“इसीलिए तो वो आदमी हमें ढूँढ रहा है।”
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पुरानी डायरी का अगला पन्ना
सान्वी ने अपनी माँ की डायरी निकाली।
“शायद इसमें कुछ और लिखा हो।”
उसने तेजी से पन्ने पलटे।
कुछ पन्ने खाली थे।
फिर एक जगह उसे हल्की-सी स्याही दिखाई दी।
उसने पन्ना रोशनी के सामने किया।
धीरे-धीरे अक्षर उभरने लगे।
“अगर तीनों बेटियाँ कभी एक साथ हों…”
सान्वी पढ़ते-पढ़ते रुक गई।
आगे लिखा था—
“तो उन्हें मेरे कमरे की दीवार के पीछे छुपा हुआ संदूक खोलना होगा।”
आरोही ने पूछा—
“कौन-सा कमरा?”
राजवीर ने कहा—
“तुम्हारी माँ का पुराना कमरा।”
“वो हवेली में है?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
Aryveer ने तुरंत कहा—
“तो फिर चलिए।”
सान्वी ने उसे देखा।
“तुम हर चीज़ का solution ‘चलो’ से निकालते हो?”
Aryveer ने कहा—
“क्योंकि अगर मैं सोचने बैठ गया…”
“तो तुम फिर बोलोगी कि मैं डर गया।”
सान्वी मुस्कुरा दी।
“तुम डरते हो?”
Aryveer ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“तुम्हें खोने से।”
सान्वी का चेहरा अचानक शांत हो गया।
उसने धीरे से पूछा—
“इतना?”
“हाँ।”
आरोही ने पीछे से खाँसने की आवाज की।
“हम लोग अभी भी यहाँ हैं।”
नैना हँस पड़ी।
सान्वी झेंप गई।
“तुम दोनों को कोई काम नहीं है?”
Aryveer ने कहा—
“है।”
“क्या?”
“तुम्हें सुरक्षित रखना।”
सान्वी ने कुछ नहीं कहा।
बस उसकी उंगलियाँ Aryveer की उंगलियों में और कस गईं।
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माँ का कमरा
कुछ देर बाद सभी पुराने कमरे के सामने खड़े थे।
दरवाजा वर्षों से बंद था।
राजवीर ने उसे खोलने की कोशिश की।
दरवाजा नहीं खुला।
“चाबी?”
रुद्र ने कहा—
“नहीं है।”
सान्वी ने अपनी जेब से वही पुरानी चाबी निकाली जो उसे पहले मिली थी।
“शायद ये?”
उसने चाबी ताले में लगाई।
क्लिक।
दरवाजा खुल गया।
कमरे में धूल थी।
लेकिन अजीब बात यह थी कि सबकुछ वैसे ही रखा था।
बिस्तर।
पुरानी अलमारी।
टेबल।
और दीवार पर सान्वी की माँ की तस्वीर।
सान्वी तस्वीर के सामने जाकर खड़ी हो गई।
उसकी आँखें भर आईं।
“माँ…”
आर्यवीर उसके पास आकर खड़ा हो गया।
“वो तुम्हें देख रही होंगी।”
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें कैसे पता?”
“क्योंकि माँएँ अपने बच्चों को कहीं से भी देख लेती हैं।”
सान्वी ने हल्की मुस्कान दी।
“तुम्हें ये बातें कहाँ से आती हैं?”
Aryveer ने कहा—
“जब तुम रोती हो, मेरा दिमाग खुद काम करना शुरू कर देता है।”
सान्वी कुछ बोलती, उससे पहले आरोही चिल्लाई—
“मिल गया!”
सभी उसकी तरफ दौड़े।
आरोही दीवार के एक हिस्से के सामने खड़ी थी।
वहाँ बाकी दीवार से अलग रंग का एक छोटा निशान था।
नैना ने हाथ लगाया।
दीवार हल्की-सी हिली।
टक।
एक गुप्त दरवाजा खुल गया।
अंदर एक छोटा कमरा था।
बीच में लोहे का संदूक।
सान्वी आगे बढ़ी।
“यही होगा।”
राजवीर ने कहा—
“रुको।”
“क्यों?”
“हो सकता है इसमें कोई trap हो।”
Aryveer आगे आया।
“पहले मैं देखता हूँ।”
उसने संदूक खोलने की कोशिश की।
कुछ नहीं हुआ।
नैना ने कहा—
“शायद तीनों बहनों को साथ खोलना होगा।”
तीनों ने एक साथ संदूक पर हाथ रखा।
जैसे ही उनके हाथ एक साथ पड़े…
संदूक खुल गया।
अंदर एक पुराना वीडियो रिकॉर्डर था।
और उसके साथ एक चिट्ठी।
सान्वी ने चिट्ठी उठाई।
ऊपर लिखा था—
“मेरी बेटियों के लिए।”
उसकी आँखें नम हो गईं।
उसने चिट्ठी खोली।
“मेरी सान्वी, मेरी आरोही और मेरी नैना…”
तीनों बहनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
“अगर तुम ये पढ़ रही हो, तो इसका मतलब है कि तुम तीनों आखिरकार एक साथ हो।”
“मैं चाहती थी कि तुम तीनों सामान्य जिंदगी जियो।”
“लेकिन कुछ लोग तुम्हें सामान्य जिंदगी जीने नहीं देंगे।”
अगली लाइन पढ़ते ही सान्वी की साँस रुक गई।
“तुम तीनों के जन्म के पीछे सिर्फ मेरी और राजवीर की कहानी नहीं है।”
“तुम्हारे जन्म से पहले एक और औरत इस राज का हिस्सा थी।”
आरोही ने पूछा—
“कौन?”
सान्वी ने अगली लाइन पढ़ी।
“उसका नाम था—मीरा।”
नैना ने तुरंत पूछा—
“मीरा कौन?”
राजवीर ने सिर उठाया।
उसके चेहरे पर अजीब-सा डर था।
“मीरा…”
रुद्र ने धीमे से कहा—
“विक्रम की पत्नी।”
सभी चौंक गए।
सान्वी ने कहा—
“तो वो हमारी…”
राजवीर ने कहा—
“नहीं।”
“वो तुम्हारी माँ नहीं थी।”
“लेकिन Project S-21 शुरू होने से पहले…”
वह रुका।
“मीरा ही इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विरोधी थी।”
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वीडियो रिकॉर्डिंग
सान्वी ने रिकॉर्डर चालू किया।
स्क्रीन पर उसकी माँ दिखाई दी।
थकी हुई।
लेकिन आँखों में दृढ़ता थी।
“अगर तुम तीनों ये वीडियो देख रही हो…”
“तो शायद मैं तुम्हारे पास नहीं हूँ।”
सान्वी की आँखों से आँसू बहने लगे।
“मुझे माफ करना।”
“मैंने तुम्हें अलग किया।”
“लेकिन मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।”
वीडियो में उसकी माँ ने एक फाइल उठाई।
“तुम तीनों को दुनिया से बचाने के लिए मैंने Project S-21 की असली फाइल चुरा ली थी।”
“उस फाइल में लिखा है कि तुम्हारे जन्म के बाद…”
वह कुछ सेकंड चुप रही।
“तुम तीनों के बीच एक ऐसा connection बना था…”
सान्वी आगे झुक गई।
“जिसे वैज्ञानिक समझ नहीं पाए।”
“लेकिन कुछ लोगों ने उसे हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की।”
वीडियो अचानक रुक गया।
स्क्रीन काली हो गई।
“क्या हुआ?”
आरोही ने रिकॉर्डर हिलाया।
“शायद खराब हो गया।”
अचानक स्क्रीन फिर चालू हुई।
लेकिन इस बार उसकी माँ नहीं थी।
स्क्रीन पर एक आदमी था।
चेहरा धुंधला।
सिर्फ आवाज साफ थी।
“अगर तुम ये देख रहे हो, तो मैं जानता हूँ कि तीनों मिल चुकी हैं।”
सान्वी का दिल तेजी से धड़कने लगा।
आवाज जारी रही—
“लेकिन तुम एक बात नहीं जानतीं।”
“तीसरी बेटी…”
नैना की आँखें फैल गईं।
“क्या?”
आवाज आई—
“नैना को हमने कभी Project S-21 का हिस्सा नहीं माना था।”
नैना पीछे हट गई।
“क्या?”
“वो गलती से पैदा हुई थी।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
सान्वी ने नैना की तरफ देखा।
नैना की आँखों में आँसू थे।
“मैं…”
उसकी आवाज टूट गई।
“मैं गलती थी?”
सान्वी तुरंत उसके पास गई।
“नहीं!”
“तुम मेरी बहन हो।”
“बस।”
नैना रोते हुए बोली—
“लेकिन उन्होंने कहा…”
सान्वी ने उसे गले लगा लिया।
“किसी फाइल में जो लिखा है, उससे हमारा रिश्ता तय नहीं होगा।”
Aryveer ने भी कहा—
“बिल्कुल।”
नैना ने आँसू पोंछे।
लेकिन तभी वीडियो में वही आवाज फिर सुनाई दी—
“लेकिन एक गलती ऐसी थी जिसे हमने बाद में समझा।”
“नैना ही सबसे महत्वपूर्ण थी।”
तीनों बहनों के चेहरे बदल गए।
“क्योंकि…”
आवाज कुछ सेकंड रुकी।
फिर बोली—
“उसके शरीर में वो चीज़ थी, जिसकी हमें बाकी दोनों में तलाश थी।”
वीडियो अचानक बंद हो गया।
Saanvi ने नैना को देखा।
“तुम्हारे अंदर क्या है?”
नैना खुद भी घबरा गई थी।
“मुझे नहीं पता।”
तभी उसके हाथ की नागमुद्रा वाली अंगूठी चमक उठी।
कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं।
अंधेरे में एक आवाज गूँजी—
“अब तुम्हें पता चलेगा।”
Aryveer ने तुरंत Saanvi को अपनी तरफ खींच लिया।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
फिर नैना के पीछे एक परछाईं दिखाई दी।
सान्वी चीख पड़ी—
“नैना!”
नैना पलटी।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
सिर्फ दीवार पर एक नया संदेश लिखा था—
“THREE SISTERS. ONE KEY. ONE CHOICE.”
और उसके नीचे…
एक नाम।
RAGHAV.
राजवीर के चेहरे से सारी रंगत गायब हो गई।
सान्वी ने पूछा—
“राघव कौन है?”
राजवीर ने काँपते हुए कहा—
“मेरा भाई।”
“और…”
उसने दीवार पर लिखे नाम को देखा।
“वही आदमी…”
“जिसे तुम्हारी माँ ने आखिरी बार अपनी डायरी में ‘R’ लिखकर चिन्हित किया था।”
Aryveer ने सान्वी का हाथ पकड़ लिया।
अब कहानी सिर्फ तीन बहनों के अतीत की नहीं रही थी।
क्योंकि उनके परिवार का एक ऐसा सदस्य सामने आने वाला था, जिसने पच्चीस साल से खुद को दुनिया से छुपा रखा था।
क्रमशः…