Punishment.....without fault - 13 in Hindi Short Stories by Soni shakya books and stories PDF | सजा.....बिना कसूर की - 13

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सजा.....बिना कसूर की - 13

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??

और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??

सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं बहन जी पर आकाश तो नदान है ‌ उसे कहां समझ आएगा यह सब उसे समझाना तो हम बड़ों का ही काम है। 

आकाश की मम्मी बोली --सुनिए बहन जी आकाश नादां जरूर है पर इतना भी नहीं और उसकी जीवन संगिनी चुनने का अधिकार उसका स्वयं का है क्योंकि पूरा जीवन उन्हें ही एक दूसरे के साथ निभाना है।

हमारा क्या हम आज हैं कल नहीं रहेंगे ??

भूमि को और वहां खड़े सभी लोगों को समझ आ रहा था कि आकाश की मम्मी क्या कहना चाहती है फिर भी भूमि के पापा हाथ जोड़कर उन लोगों की ओर बढ़ते हैं तभी..

भूमि उनका हाथ पकड़ कर रोक लेती है एक बार आकाश की ओर देखती है वह अभी भी गुस्से की मुद्रा में खड़ा था ।

पीछे खड़े कुछ लोग फुसफुसा रहे थे-घोर कलयुग आ गया है !

कोई कहता पहले बता देना चाहिए था यू धोका देना गलत बात है।

कोई कहता अरे अपना खोटा सिक्का मढ़ रही थी बहन जी के मत्थे।

कोई कहता बताओ दिखने में तो कितनी सुशील और संस्कारी लगती है।

लेकिन इतनी नेगेटिव बातों के बीच में कोई एक आवाज ऐसी भी थी जो कह रही थी कि इसमें इसका क्या दोष !!

भूमि सब देख और सुन रही थी फिर कहती है... रुकिए पापाजी !!

अब बहुत तमाशा बन गया है',

चलिए पापा जी मम्मीजी अपने घर अब इस रिश्ते को बचाने के लिए और कुछ नहीं बचा है  !!

भूमि के पापा  कहते हैं --बेटा एक बार और हम बात करते हैं  ।

भूमि बोली --पापा जी क्या आपको लगता है कि अब भी कुछ कहने और सुनने के लिए बाकी है ??

सब कुछ तो आईने की तरह साफ-साफ नज़र आ रहा है ।

चलिए पापा जी, मम्मीजी जी  !!

यह कहते हुए भुमि अपने मम्मी-पापा का हाथ पकड़ कर कमरे के बाहर निकल जाती है..

सब लोग देखते हैं पर कोई रोकता नहीं उन्हें ।

सरला अब भी उम्मीद भरी नजरों से पलट कर देखती है पर.. कोई फायदा नहीं  !!

भूमि के कानों में आकाश के अंतिम शब्द ठहर गए थे--धोखा दिया है तुमने मुझे,

""उतरन हो तुम किसी की ""

भूमि के लिए इतना काफी था ।

बड़े अरमानों के साथ जिस दहलीज को पार कर भूमि ने अंदर प्रवेश किया था उसी दहलीज़ को दृढ़निश्चय के साथ अपने आत्म सम्मान को बनाए रखने के लिए छोड़ दिया।

उसे शंका,तरस , बेचारी और विवशता वाली जिंदगी स्विकार नहीं थी।

और ना ही कोई "सजा.. बिना कसूर की*

छह महीने बाद....

आज भूमि के घर में थोड़ी चहल पहल थी कुछ रिश्तेदार और कुछ दोस्त भूमि के प्रमोशन का उत्सव मनाने आए थे। 

सब लोग भूमि को खुशी-खुशी बधाई देते और कुछ गिफ्ट भी।

चारों और खुशियों का माहौल था।

आज भूमि और उसके मम्मी पापा बहुत खुश थे। 

सब खुशियां मना रहे थे कि अचानक से दरवाजे पर दस्तक होती है ।

दरवाजे की ओर देखते ही भूमि और उसके मम्मी पापा चौंक जाते हैं !!

दरवाजे पर आकाश खड़ा था !!

सब आश्चर्य से देखते हैं और सबके मन में एक ही प्रश्न था आकाश !!!

लेकिन क्यों ???

भूमि के मम्मी पापा दरवाजे की ओर बढ़ते हैं और आकाश से कहते हैं --अब क्या बाकी रह‌‌ गया है बेटा जो सुनाने आए हो  !!

आकाश थोड़ी देर चुपचाप खड़ा रहा फिर बोला __मैं कुछ सुनाने नहीं आया हूं अंकल जी ।

मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं इसलिए आप सभी से माफी मांगने आया हूं। और साथ में मेरे मम्मी-पापा भी आए हैं।

सरला भावुक हो जाती है और तुरंत ही आकाश और उसके मम्मी पापा को घर में आने के लिए कहती है। 

वो एक मां है और कोई मां ये नहीं चाहती कि उसकी बेटी की दुनिया वीरान रहे।

हर मां यह चाहती है कि उसकी बेटी का घर-संसार बसा रहे, बेटी हमेशा सुखी और समृद्ध रहे।

भूमि के लिए सरला पुरानी सारी कड़वी बातें भुलाने को तैयार हो गई।

बेटी की खुशी के लिए मां अपनी खुशी भी त्याग  देती है।

और आकाश के शब्द सुनकर तो.. सरला के मन मे खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ गई थी ‌‌।

सरला आकाश और उसके मम्मी पापा को आदर के साथ बैठाती है।

घर में मेहमान तो भरे ही थे ।

आकाश अपनी जगह से उठता है और भूमि के सामने हाथ जोड़कर कहता है --मुझे माफ कर दो भूमि !!

मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हुई है !!

मैंने बिना सोचे समझे तुम पर कितने बेवजह के इल्जाम लगा दिए।

भूमि ,,मैं उस वक्त उस व्यक्ति की बात को सुनकर अपने आप को संभाल नहीं सका ।

मुझे लगा मेरे विश्वास को मेरे प्यार को किसी ने चोट पहुंचा दी हो ।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं बस मन में एक ही ख्याल घर कर गया कि तुमने  मुझे धोखा दिया है।

और कमजोर मर्दों की तरह मैंने भी तुमसे बात किये बिना शराब का सहारा ले लिया और ..

तुम्हें जाने क्या क्या कह दिया।

माफ कर दो भूमि ‌!!

भूमि चुपचाप खड़ी बस सुन रही थी।

आकाश दोबारा हाथ जोड़कर भूमि से विनती करता है और कहता है --भूमि माफ कर दो यार और प्लीज अपने घर चलो।

सरला का मन खुशी से झूम उठता है आखिर उसकी प्रार्थना रंग लाई भगवान ने उसकी  बेटी की जिंदगी में फिर से खुशियां लौटा दी है।

सरला आकाश से कहती है क्यों नही बेटा,,भूमि जरूर तुम्हारे साथ जाएगी ।

तब फिर भूमि कहती है-- एक मिनट रुको मां !!

फिर आकाश से कहती है मैं आपसे सिर्फ एक ही प्रश्न करूंगी कि... आप मेरी जगह होते तो क्या करते  ???

आकाश मौन था।

भूमि फिर बोली--मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है इसलिए आप माफी मत मांगिए गलती हमारी भी थी हमें आपको बता देना चाहिए था पर...

जहां प्रेम में विश्वास नहीं उस रिश्ते का कोई महत्व नहीं होता !!

विश्वास में संदेह घर कर सकता है पर जहां संदेह रहता है वहां विश्वास कभी नहीं टिक सकता।

और हमारे रिश्ते में तो आपने शुरू होने से पहले ही संदेह कर लिया  है तो अब इस रिश्ते में पूर्णतया विश्वास होना संभव नहीं है।

और मैं ऐसे किसी रिश्ते में नहीं रहना चाहती जहां संदेह रहता हो !!

मैंने कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय से आज समाज में अपना स्थान बनाया है ‌ और अब मैं किसी कीमत पर भी अपने आत्म सम्मान के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हुं।

फिर भूमि हाथ जोड़कर कहती है --अब आप मुझे माफ करिए मैं आपके साथ शादी के बंधन में नहीं रह सकती मैं अकेली ही अपने आत्म सम्मान के साथ जीना चाहती हूं ‌।

अब मैं वो भूमि नहीं --जिसने बिना कसूर के ही सजा सहन की  थी‌ !!

तभी आकाश की मम्मी खड़ी होकर सरला से कहती है बहन जी आप कुछ समझाइए ना भुमि को ।

भूमि के दृढ़ निश्चय के आगे सरला नतमस्तक हो जाती है । उसे भुमि पर बहुत गर्व महसूस होता है।

और फिर सरला को ख्याल आता है कि ऐसा ही एक माहौल था 6 माह पहले जब वह अपनी बेटी की खुशी के लिए विनती कर रही थी और आकाश की मम्मी ने कहा था कि उसमें वह कुछ नहीं कर सकती यह निर्णय तो सिर्फ आकाश का है।

तब सरल को समझ आया लोग सही कहते हैं इतिहास दोहराता है ।

फिर सरला भी वही सब बोली --बहन जी जीवन तो भूमि का हैं इसलिए आकाश को स्वीकार करने का फैसला भी भूमि का ही रहेगा।

"हमारा क्या हम आज हैं कल नहीं"

आकाश की मम्मी को सब समझ आ गया था। 

उनका अब भूमि के घर रुकना व्यर्थ था। उन्होंने आकाश का हाथ पकड़ा और कहां चलो बेटा  तुम्हारे लिए अब यहां कुछ नहीं बचा है।

हर इंसान को अपने कर्मों की सजा भोगनी पड़ती है।

अब तुम्हारी बारी है --अब तुम्हें समझ आएगा कि बिना कसूर किसी को सजा देने से क्या होता है और अब तुम्हें अपनी गलती के लिए सारी उम्र पछताना होगा और हमें भी क्योंकि हमने भी तुम्हारे गलत निर्णय में तुम्हारा साथ दिया था।

तीनों कमरे से बाहर निकलते हैं अब पलटने की बारी आकाश की थी बड़ी हसरतों से वह भूमि की ओर देखता है पर.. कोई फायदा नहीं ।

भूमि अपने फैसले पर अटल थी ।

भूमि  ने यह साबित किया था कि अगर  औरत कोई निर्णय मन में ठान लेती है तो इसका निर्णय सिर्फ एक ही इंसान बदल सकता है और वो इंसान ...

                       ***वो खुद होती है***


""प्रिय पाठकों मेरी कहानी पढ़ने और उसे पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार 🙏 🙏 जल्दी ही मिलुगीं एक नई कहानी के साथ"" 😊😊 

                                   सोनी शाक्य...✍️