प्रोफेसर अय्यर की मौत के बाद तहखाने की ठंडी दीवारों पर पसरा सन्नाटा और गहरा गया था। इंस्पेक्टर समीर ने अपनी पिस्तौल का रुख तुरंत कमरे में मौजूद बाकी बचे लोगों की तरफ किया—अद्वैत, डॉक्टर मीरा, तारा, शर्मा जी, अंधा वीरेंद्र सिंह और रसोइया आर्यन।
"प्रोफेसर की मौत उस जहर से नहीं हुई जो उनके हाथ में था," समीर ने प्रोफेसर अय्यर की आंखें बंद करते हुए कहा। "उनके सीने पर लगा वह 'काली रानी' का खूनी छाप... यह किसी इंसान का सीधे छूना नहीं, बल्कि एक बेहद खतरनाक रासायनिक जहर का रिएक्शन है, जो हवा के संपर्क में आते ही इंसान की त्वचा से फेफड़ों तक फैल जाता है। और यह जहर किसी ऐसे शख्स के पास था जिसने रात में ही इसे तैयार किया था!"
सब एक-दूसरे को देखने लगे।
समीर ने अचानक अपनी पिस्तौल डॉक्टर मीरा पर तान दी। "डॉक्टर मीरा... जब आप १५ मिनट पहले दीवान साहब को दवा देने गई थीं, तब आपने सिर्फ दिल की दवा नहीं दी थी। आपने उनके कमरे में इस जहरीले केमिकल की पहली खुराक छिड़की थी!"
डॉक्टर मीरा का चेहरा पीला पड़ गया, लेकिन वे चिल्लाईं, "यह झूठ है! आप मुझ पर बेबुनियाद इल्जाम लगा रहे हैं!"
"बेबुनियाद नहीं है, डॉक्टर," समीर ने कदम आगे बढ़ाए। "जब रात को लाइट गई थी, तब आपके हाथ से एक मीठी खुशबू आ रही थी—'एक्रोनिटिन' जहर की खुशबू! और जब फर्श पर चाय गिरी थी, तो आपने तुरंत कहा था कि प्रोफेसर अय्यर 'सफेद वजीर' हैं। आपको कैसे पता चला कि अगला निशाना प्रोफेसर ही थे? क्योंकि आप और प्रोफेसर अय्यर मिलकर इस संपत्ति और तिजोरी के राज़ को हासिल करना चाहते थे!"
अद्वैत गुस्से से चीख पड़ा, "तो मीरा... तुमने मेरे दादाजी को मारा?"
"मैंने अकेले नहीं मारा, अद्वैत!" डॉक्टर मीरा का सब्र टूट गया और वे पागलों की तरह हंसने लगीं। "दीवान रघुवीर सिंह कोई साधू नहीं थे! उन्होंने २५ साल पहले वीरेंद्र सिंह को दफनाया, आर्यन के बाप की ज़मीन हड़पी, और मुझे और प्रोफेसर को इस्तेमाल करके इस तिजोरी के खजाने पर कब्जा करना चाहा। पर दीवान हमें धोखा देने वाला था! इसलिए हमने उसे रास्ते से हटा दिया।"
"और वह अदृश्य साया? वह सफेद रानी का संदेश?" तारा ने घबराकर पूछा।
"वह आत्मा नहीं थी," समीर ने अपनी जेब से एक छोटी सी प्रोजेक्टर डिवाइस और शीशे का टुकड़ा निकाला जो उन्हें दराज से मिला था। "लाइट जाने के दौरान यह भ्रम पैदा किया गया था ताकि सब डर जाएं और कोई मेज तक न पहुंचे। लेकिन डॉक्टर मीरा... आपने एक गलती कर दी। आपने प्रोफेसर को मारने के लिए वही जहर इस्तेमाल किया जो आपने दीवान साहब पर इस्तेमाल किया था। पर आपको यह नहीं पता था कि प्रोफेसर के पास 'काली रानी' का असली मोहरा नहीं था!"
तभी तहखाने के सबसे अंधेरे कोने से दीवान वीरेंद्र सिंह आगे आए। उनकी सफेद आंखों में एक खौफनाक शांति थी।
"खेल खत्म हुआ, डॉक्टर," वीरेंद्र सिंह ने कहा। "मेरी काली रानी ने अपना काम कर दिया है। तुमने और तुम्हारे साथी ने २५ साल पहले जो पाप बोया था, आज उसकी फसल कट चुकी है।"
समीर ने हथकड़ी निकालते हुए डॉक्टर मीरा की तरफ कदम बढ़ाए, लेकिन तभी आर्यन (रसोइया) ने गुप्त रास्ते का दरवाजा लोहे की भारी सलाख से बंद कर दिया!
बहार से पूरे पुस्तकालय के ढहने की खौफनाक आवाजें आने लगीं। लैंडस्लाइड का दूसरा हिस्सा सीधे पुस्तकालय के ऊपर गिर रहा था।
समीर चिल्लाए, "रास्ता बंद हो रहा है! सबको तुरंत बाहर निकलना होगा!"