✨ “Who Left That Note?” in Hindi Love Stories by Khwaab books and stories PDF | तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 7

The Author
Featured Books
Categories
Share

तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 7

Aashi काफी देर तक उस कागज़ को अपने हाथों में पकड़े बैठी रही।

कमरे में पूरी तरह शांति थी, लेकिन उसके अंदर जैसे कई सवाल एक साथ शोर कर रहे थे।

उसने कागज़ को दोबारा पढ़ा—

“अगर कभी Vihaan वापस आए, तो उसे यह मत बताना कि तुमने मुझे पहचान लिया है।”

“लेकिन ये किसने लिखा था?”

Aashi ने खुद से पूछा।

उसकी नज़र डायरी पर गई।

उसे अचानक याद आया कि इस डायरी के बारे में उसके अलावा बहुत कम लोग जानते थे।

फिर यह कागज़ यहाँ आया कैसे?

उसने फोन उठाया और Vihaan का chat खोला।

कुछ देर तक वह message box को देखती रही।

फिर उसने लिखा—

“Vihaan…”

कुछ सेकंड बाद उसने message delete कर दिया।

फिर दोबारा लिखा—

“क्या तुमने मेरी डायरी कभी देखी थी?”

इस बार message भेजने से पहले उसका हाथ रुक गया।

वह नहीं चाहती थी कि Vihaan को उस कागज़ के बारे में पता चले।

आखिर उस कागज़ पर साफ लिखा था—

उसे मत बताना।

Aashi ने फोन एक तरफ रख दिया।

तभी कमरे के बाहर हल्की-सी आहट हुई।

वह तुरंत पलटी।

दरवाज़े के पास Aarav खड़ा था।

“दीदी?”

Aashi ने जल्दी से डायरी बंद कर दी।

“हाँ?”

Aarav अंदर आया और उसकी तरफ देखने लगा।

“आप इतनी रात को फिर डायरी पढ़ रही हो?”

“बस ऐसे ही।”

Aarav कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

“एक बात पूछूँ?”

Aashi ने सिर हिलाया।

“उस दिन जो लड़का आया था… क्या उसका नाम Vihaan था?”

Aashi का चेहरा अचानक बदल गया।

“तुम्हें उसका नाम कैसे पता?”

Aarav ने कंधे उचकाए।

“पता नहीं। अभी याद आया।”

“और क्या याद आया?”

Aarav ने सोचने की कोशिश की।

“वो आपके साथ ज्यादा देर नहीं था। पापा ने उसे बाहर बुलाया था।”

Aashi की आँखें फैल गईं।

“पापा ने?”

“हाँ।”

“फिर?”

Aarav ने माथे पर हाथ रखा।

“फिर… शायद पापा उससे गुस्से में बात कर रहे थे।”

Aashi कुछ बोल नहीं पाई।

“क्या बात कर रहे थे?”

“वो याद नहीं।”

Aarav दरवाज़े की तरफ जाने लगा।

फिर अचानक रुककर बोला—

“लेकिन एक बात याद है।”

“क्या?”

“उस लड़के ने जाते समय पीछे मुड़कर आपको देखा था।”

Aashi धीरे से बोली—

“फिर?”

Aarav ने कहा—

“उसने शायद कुछ कहा भी था।”

“क्या?”

Aarav ने आँखें बंद करके याद करने की कोशिश की।

“शायद… ‘लिखना मत छोड़ना।’”

Aashi के हाथ से डायरी लगभग छूट गई।

वही शब्द।

वही बात।

जिसे Vihaan पिछले कई दिनों से बार-बार कह रहा था।

“मैंने तुम्हें लिखना बंद करने के लिए कभी नहीं कहा था।”

Aashi कुछ देर तक अपने कमरे में बिल्कुल चुप बैठी रही।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतने सालों से उसकी यादों में छिपी हुई छोटी-छोटी बातें आज अचानक इतनी महत्वपूर्ण क्यों लगने लगी थीं।

उसे हमेशा लगता था कि 22 August बस एक पुरानी तारीख है, लेकिन अब वही तारीख उसकी जिंदगी के कई सवालों का जवाब अपने अंदर छिपाए बैठी थी।

उसने डायरी को फिर से खोला और उस पन्ने को ध्यान से देखा, जहाँ कभी उसने अपने मन की बातें लिखी थीं।

पन्ने खाली थे, लेकिन उन खाली पन्नों में भी उसे अपनी पुरानी आवाज़ सुनाई दे रही थी।

शायद कुछ यादें सच में मिटती नहीं हैं, बस सही समय आने का इंतज़ार करती हैं।

Aashi ने तुरंत फोन उठाया।

इस बार उसने बिना सोचे Vihaan को message किया—

“उस दिन मेरे पापा ने तुमसे क्या कहा था?”

कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया।

फिर स्क्रीन पर typing दिखाई दी।

Aashi की धड़कन तेज़ हो गई।

एक message आया—

“तुम्हें सच में जानना है?”

Aashi ने तुरंत लिखा—

“हाँ।”

Vihaan का जवाब आया—

“तो कल उसी जगह आना, जहाँ हमने पहली बार बात की थी।”

Aashi कुछ पल तक स्क्रीन देखती रही।

फिर उसने पूछा—

“क्यों?”

इस बार Vihaan का जवाब छोटा था—

“क्योंकि कुछ बातें message पर नहीं कही जा सकतीं।”

Aashi ने फोन नीचे रख दिया।

उसके सामने अब दो रास्ते थे—

एक तरफ उसका परिवार था…

और दूसरी तरफ वह इंसान, जिसे उसकी यादों ने इतने साल बाद फिर उसके सामने ला खड़ा किया था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही था—

क्या वह सच जानने के लिए तैयार थी?

🌙 क्रमशः…