Veydran - ek Ishq ek shrap - 1 in Hindi Horror Stories by Sandhu Sandhu books and stories PDF | वेद्रान - एक इश्क़, एक श्राप - 1

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वेद्रान - एक इश्क़, एक श्राप - 1

Disclaimer:
यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसमें दिखाए गए सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान और परिस्थितियाँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान, घटना या धार्मिक मान्यता से समानता मात्र संयोग है।

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अध्याय 1

फूलों से सजा और जगमगाती रोशनी में नहाया मल्होत्रा विला।

ढोल-बाजे की आवाज़ के शोर के बीच हर कोई खुशी से नाच रहा था। मौका था करोड़पति कपड़ा व्यापारी बिशम्बर मल्होत्रा की 23 वर्षीय इकलौती बेटी मीरा मल्होत्रा की शादी का।

विला को बहुत शानदार ढंग से सजाया गया था। मेहमान खाने-पीने में मग्न थे। बिशम्बर मल्होत्रा खुद बारात का स्वागत करने में व्यस्त थे।

अंदर अपने कमरे में मीरा सुर्ख लाल लहंगे में गहनों से सज-धजकर तैयार बैठी थी। उसकी सहेली दिया उसके पास थी।

दिया: बारात आ गई। मीरा! बिशम्बर अंकल ने कहा है कि अभी थोड़ी देर में तुम्हें बाहर बुलाएँगे।

मीरा: मुझे बहुत घबराहट हो रही है, दिया!

दिया: अरे, अभिषेक जीजू बहुत अच्छे हैं। तुम्हें इतना खुश रखेंगे कि…

मीरा: कि… क्या?

दिया: तुम हम सबको भूल ही जाओगी।

कहते हुए वह मीरा के गाल खींचने लगी।

मीरा: अरे, छोड़ न! बदमाश कहीं की।

तभी दरवाजे पर बुजुर्ग नौकरानी गीता आई।

गीता: दिया! मैडम! मीरा बेबी को लेकर नीचे आइए। साहब बुला रहे हैं।

दिया: चलो, मीरा! टाइम हो गया।

दोनों नीचे गईं।

मीरा देखने में बेहद खूबसूरत थी। उसके लंबे बाल और गहरी काली, तिरछी और बड़ी-बड़ी आँखें थीं, जो इस वक्त काजल से सजी हुई थीं। वह दिया के साथ धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ जा रही थी। गहरे हरे रंग के लहंगे में दिया भी खूबसूरत लग रही थी।

नीचे मंडप में अपने माता-पिता के साथ सुनहरी शेरवानी में सजा-धजा 27 वर्षीय अभिषेक खन्ना बैठा था। वह भी सेहरे और लाल पगड़ी में शानदार लग रहा था। उसकी निगाहें नीचे आ रही मीरा पर ही टिक गई थीं।

मीरा को मंडप में लाया गया। मीरा भी बैठ गई।

पंडित जी पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह की रस्में पूरी करवा रहे थे।

पंडित जी ने दोनों का गठबंधन करने को कहा।

बिशम्बर मल्होत्रा ने आगे आकर गठबंधन कर दिया। सबकी आँखें खुशी की चमक से भरी थीं।

लेकिन जैसे ही दोनों फेरों के लिए खड़े हुए, दुपट्टे की गाँठ अपने आप खुल गई।

सब चौंक गए।

पंडित: ये क्या? दोबारा से कीजिए।

बिशम्बर मल्होत्रा ने दोबारा गाँठ मार दी। लेकिन इस बार भी वही हुआ।

सभी मेहमान एक-दूसरे का मुँह ताक रहे थे।

पंडित: ये तो अपशगुन है, जजमान!

विशम्बर: ये हो क्या रहा है? कुछ समझ नहीं आ रहा, पंडित जी!

दिया: अंकल! मैं करती हूँ।

कहते हुए इस बार उसने गठबंधन किया। पर फेरे शुरू होने से पहले ही गाँठ फिर खुल गई।

ये देखकर सब लोगों में हाय-तौबा मच गई।

चौथी बार गाँठ मारी गई। फेरे शुरू हो गए। गाँठ नहीं खुली।

सब मुस्कुराए।

अभी एक फेरा खत्म भी नहीं हुआ था कि दुपट्टे में आग लग गई।

दोनों फिर से अलग हो गए।

इस बार सब लोग आपस में कानाफूसी करने लगे। अभिषेक की माँ ललिता अपने पति से बोली।

ललिता: मिस्टर खन्ना! जरूर कुछ गड़बड़ है। कहीं भगवान हमें कोई इशारा तो नहीं दे रहे? ये शादी…

बात काटते हुए मिस्टर खन्ना ने कहा।

हरीश खन्ना: ऐसा कुछ नहीं है। शांत रहो। विशम्बर! तुम फिर से करो। दूसरा दुपट्टा मंगवाओ।

ऐसा ही हुआ।

बिशम्बर मल्होत्रा के चेहरे पर परेशानी की लकीरें खिंच गई थीं। वह मन में विचारों की उधेड़बुन लिए दूसरा दुपट्टा मंगवाकर फिर से गठबंधन करने लगा।

नौकरानी गीता खामोश खड़ी थी। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें थीं। वह घबराई हुई थी।

गीता (फुसफुसाते हुए): मालिक! ये आने वाले तूफान की आहट है। मीरा बेबी…

उसकी बात पूरी होने से पहले ही विशम्बर ने नाराजगी से उसे डाँट दिया।

विशम्बर: बच्चों जैसी बात मत करो, गीता बहन! ऐसा कुछ नहीं है।

वह चुप हो गई।