Mr. Ms. Fake in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 52

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 52

एपिसोड 52: बेसमेंट 21 का दरवाज़ा

रात काफी गहरी हो चुकी थी।

शहर की सड़कें लगभग खाली थीं।

एक काली कार तेज रफ्तार से Malhotra Estate की तरफ बढ़ रही थी।

कार के अंदर किसी की आवाज नहीं थी।

साँवी खिड़की से बाहर देख रही थी।

आर्यवीर उसके बगल में बैठा था।

उसके हाथ में वही पुरानी फोटो थी जिसमें दोनों बच्चे साथ खड़े थे।

काफी देर तक चुप रहने के बाद साँवी ने धीरे से पूछा—

“तुम अब भी वही सोच रहे हो?”

आर्यवीर ने फोटो से नजरें नहीं हटाईं।

“हम्म।”

“क्या?”

“ये कि अगर हम सच में बचपन में मिले थे…”

उसने फोटो की तरफ देखा।

“…तो मुझे तुम्हें भूलना कैसे आया?”

साँवी कुछ पल चुप रही।

“शायद हमें भुलाया गया।”

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

“और अगर मुझे तुम्हारी याद नहीं थी…”

“तो?”

साँवी मुस्कुराई।

“फिर भी तुमने मुझे दोबारा पहचान लिया।”

आर्यवीर के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।

“शायद दिल ने पहचान लिया।”

साँवी ने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“इतना romantic होने की जरूरत नहीं है।”

“तुम्हें अच्छा नहीं लगा?”

“किसने कहा?”

“तुम्हारा चेहरा।”

“मेरा चेहरा क्या कह रहा है?”

आर्यवीर थोड़ा करीब आया।

“कि तुम्हें अच्छा लगा।”

साँवी झेंपकर खिड़की की तरफ देखने लगी।

“चुप रहो।”

आर्यवीर हँस पड़ा।

लेकिन उसकी हँसी ज्यादा देर नहीं रही।

क्योंकि सामने दूर…

Malhotra Estate दिखाई देने लगा था।

विशाल हवेली अंधेरे में खड़ी थी।

उसकी ऊँची दीवारें और बंद खिड़कियाँ किसी पुराने राज की तरह लग रही थीं।

कार रुक गई।

सब नीचे उतरे।

राघव ने हवेली की तरफ देखते हुए कहा—

“मैं आखिरी बार यहाँ 21 साल पहले आया था।”

राजवीर ने धीमे से कहा—

“और मैं उम्मीद कर रहा था कि दोबारा कभी नहीं आना पड़ेगा।”

कबीर ने हवेली को देखा।

“मुझे तो बाहर से ही डर लग रहा है।”

चिंटू ने कहा—

“आपको हर जगह डर लगता है।”

“भाई, यहाँ भूत नहीं है?”

“अगर हुआ तो?”

कबीर तुरंत उसके पीछे छिप गया।

“तुम आगे चलो।”

साँवी हँस पड़ी।

तनाव के बीच थोड़ी राहत आई।

आर्यवीर ने उसे मुस्कुराते देखा।

वह उसके करीब आया।

“तुम्हें हँसते हुए देखकर अच्छा लगता है।”

साँवी ने उसे देखा।

“क्यों?”

“क्योंकि अभी जो कुछ हम जान रहे हैं…”

वह थोड़ा रुका।

“…उसके बीच तुम्हारी हँसी मुझे याद दिलाती है कि हम सिर्फ इस रहस्य का हिस्सा नहीं हैं।”

साँवी की मुस्कान धीमी हो गई।

“तो क्या हैं?”

आर्यवीर ने उसकी आँखों में देखा।

“हम अपनी जिंदगी भी हैं।”

साँवी कुछ कहती उससे पहले—

हवेली का मुख्य दरवाजा अपने आप खुल गया।

क्रीईईक…

सबकी नजरें दरवाजे पर टिक गईं।

राघव ने कहा—

“कोई अंदर है।”

आर्यवीर आगे बढ़ा।

“तो मिल लेते हैं।”

साँवी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“अकेले नहीं।”

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

“तुम मेरे साथ चलोगी?”

“हमेशा।”

दोनों एक साथ अंदर चले गए।

---

हवेली के अंदर धूल जमी हुई थी।

दीवारों पर पुरानी तस्वीरें लगी थीं।

राजवीर चलते-चलते अचानक रुक गया।

सामने एक तस्वीर थी।

मीरा।

उसके साथ एक आदमी।

और उनके बीच दो बच्चे।

एक आर्यवीर।

दूसरी साँवी।

साँवी तस्वीर के पास गई।

“ये यहाँ क्यों है?”

राजवीर ने जवाब नहीं दिया।

आर्यवीर ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

“ये फोटो कब की है?”

राघव ने कहा—

“तुम दोनों के लगभग छह साल की उम्र की।”

“तो हमें यहाँ लाया जाता था?”

“शायद।”

तभी साँवी ने तस्वीर के फ्रेम के पीछे कुछ देखा।

“रुको।”

उसने फ्रेम हटाया।

पीछे एक छोटी-सी चाबी चिपकी हुई थी।

उसने चाबी निकाल ली।

उस पर सिर्फ लिखा था—

B-21

आर्यवीर ने उसे देखा।

“Basement 21।”

सब नीचे जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़े।

सीढ़ियों के सामने लोहे का एक बड़ा दरवाजा था।

उस पर तीन गोल निशान बने थे।

तीनों बहनों के निशान।

और उनके बीच एक चौथा निशान।

Anchor.

राघव ने कहा—

“यही है।”

साँवी आगे बढ़ी।

उसने अपनी हथेली पहले निशान पर रखी।

क्लिक।

आरोही ने दूसरा निशान छुआ।

क्लिक।

नैना ने तीसरा।

क्लिक।

लेकिन दरवाजा नहीं खुला।

आर्यवीर ने चौथे निशान को देखा।

“अब मेरी बारी।”

उसने अपनी हथेली वहाँ रखी।

कुछ नहीं हुआ।

साँवी ने उसकी तरफ देखा।

“क्यों नहीं खुल रहा?”

आर्यवीर ने हाथ हटाया।

“शायद मैं Anchor नहीं हूँ।”

राघव ने कहा—

“या फिर…”

वह रुक गया।

“क्या?”

“दरवाजा अकेले Anchor से नहीं खुलेगा।”

साँवी समझ गई।

“तो?”

राघव ने दोनों को देखा।

“Key और Anchor को साथ होना होगा।”

साँवी ने आर्यवीर की तरफ देखा।

दोनों ने एक-दूसरे की हथेली पकड़ ली।

फिर साथ में दरवाजे पर हाथ रखा।

धड़ाम!

पूरा दरवाजा रोशनी से भर गया।

और इस बार…

दरवाजा खुल गया।

---

Basement 21 बिल्कुल वैसा नहीं था जैसा किसी पुराने basement की कल्पना होती है।

वहाँ धूल या पुराना सामान नहीं था।

वहाँ आधुनिक computers थे।

सैकड़ों screens।

दीवारों पर Project S-21 के diagrams।

और सबसे बीच में…

तीन बड़े glass chambers।

आरोही ने घबराकर पूछा—

“ये क्या है?”

राघव ने धीरे से कहा—

“Observation chambers।”

नैना ने एक chamber पर हाथ रखा।

“यहाँ कोई था?”

“हाँ।”

राघव ने नीचे लिखा record पढ़ा।

SUBJECT 01 — S-21

SUBJECT 02 — S-21

SUBJECT 03 — S-21

साँवी की सांस रुक गई।

“ये हम हैं?”

राघव ने सिर हिलाया।

लेकिन फिर उसकी नजर चौथे chamber पर गई।

वो chamber बाकी तीन से बड़ा था।

और उसके ऊपर लिखा था—

SUBJECT 04 — ANCHOR

आर्यवीर कुछ कदम पीछे हट गया।

“नहीं…”

साँवी तुरंत उसके पास गई।

“आर्यवीर।”

“मैं…”

उसने chamber को देखा।

“मैं यहाँ था।”

उसकी आवाज धीमी थी।

“मुझे याद आ रहा है।”

उसकी आँखें बंद हुईं।

एक memory सामने आई।

छोटा आर्यवीर उसी chamber में था।

वह रो रहा था।

दूसरी तरफ तीन छोटी बच्चियाँ glass chambers में थीं।

एक आदमी बाहर खड़ा था।

उसने कहा—

“अगर Anchor जाग गया तो तीनों Key activate होंगी।”

दूसरी आवाज आई—

“और अगर वो लड़का fail हो गया?”

पहला आदमी बोला—

“तो उसे बदल देंगे।”

छोटा आर्यवीर अचानक रोते हुए चिल्लाया—

“मैं उन्हें चोट नहीं पहुँचाऊँगा!”

आदमी ने कहा—

“तुम्हें करना होगा।”

छोटे आर्यवीर ने सिर हिलाया।

“नहीं!”

तभी एक महिला कमरे में दौड़ती हुई आई।

मीरा।

उसने आर्यवीर को अपनी बाहों में ले लिया।

“बस!”

वह आदमी बोला—

“तुम Project के खिलाफ जा रही हो।”

मीरा ने कहा—

“ये बच्चा कोई मशीन नहीं है।”

आदमी ने धमकी दी—

“अगर तुमने इसे यहाँ से निकाला तो तीनों लड़कियाँ मर जाएँगी।”

मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे।

उसने छोटे आर्यवीर के कान में कहा—

“बेटा, मुझे माफ करना।”

और फिर…

उसने उसे वहाँ से निकाल लिया।

Memory टूट गई।

आर्यवीर ने आँखें खोल दीं।

साँवी ने उसे गले लगा लिया।

“तुम्हारी गलती नहीं थी।”

आर्यवीर ने उसे कसकर पकड़ लिया।

“मुझे डर लग रहा है।”

साँवी ने उसके सीने पर हाथ रखा।

“मुझे भी।”

“फिर भी तुम मेरे साथ हो?”

“हाँ।”

“क्यों?”

साँवी ने उसकी आँखों में देखा।

“क्योंकि अब अगर कोई हमारे बीच आएगा…”

उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

“…तो उसे हम दोनों से गुजरना होगा।”

आर्यवीर हल्का-सा मुस्कुराया।

“ये dialogue मैंने तुम्हें सिखाया?”

“नहीं।”

“तो?”

“तुम्हारे साथ रहते-रहते सीख गई।”

दोनों के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

लेकिन तभी—

एक स्क्रीन अपने आप जल उठी।

उस पर लिखा था—

SUBJECT 04 EMOTIONAL BOND DETECTED.

फिर—

KEY + ANCHOR CONNECTION: 97%

साँवी का चेहरा बदल गया।

“97%?”

आर्यवीर ने स्क्रीन की तरफ देखा।

अचानक प्रतिशत बदलने लगा।

98%

99%

राघव चिल्लाया—

“पीछे हटो!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

स्क्रीन पर आया—

100%

और पूरे Basement 21 में alarm बजने लगा।

लाल रोशनी घूमने लगी।

एक आवाज गूंजी—

“PHASE THREE ACTIVATED.”

साँवी और आर्यवीर के हाथ अपने आप एक-दूसरे से जुड़ गए।

उनकी हथेलियों से सुनहरी रोशनी निकली।

लेकिन उसी रोशनी के बीच…

एक और चीज दिखाई दी।

एक पुराना दरवाजा।

जिस पर लिखा था—

FOUNDER'S ROOM

आर्यवीर ने कहा—

“तो Founder यहीं है।”

राघव ने सिर हिलाया।

“शायद।”

साँवी ने दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाया।

लेकिन आर्यवीर ने उसका हाथ रोक लिया।

“एक मिनट।”

“क्या हुआ?”

उसने उसकी आँखों में देखा।

“अगर अंदर जो भी है…”

वह थोड़ा रुका।

“…वो हमें अलग करने की कोशिश करे?”

साँवी मुस्कुराई।

“तो?”

“तुम मेरा हाथ छोड़ोगी?”

साँवी ने उसकी उंगलियाँ और कसकर पकड़ लीं।

“कभी नहीं।”

आर्यवीर की आँखों में हल्की मुस्कान आई।

“फिर चलो।”

दोनों दरवाजे के सामने पहुँचे।

साँवी ने हाथ आगे बढ़ाया।

आर्यवीर ने उसके ऊपर अपना हाथ रख दिया।

दोनों ने एक साथ दरवाजे को छुआ।

क्लिक।

दरवाजा खुलने लगा।

अंदर पूरा अंधेरा था।

लेकिन अंधेरे के बीच एक कुर्सी दिखाई दे रही थी।

और उस कुर्सी पर…

एक औरत बैठी थी।

उसके बाल खुले थे।

चेहरा नीचे झुका था।

साँवी ने धीमे से कहा—

“कौन है?”

औरत ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया।

साँवी की सांस रुक गई।

आर्यवीर भी जम गया।

क्योंकि सामने…

मीरा बैठी थी।

जिंदा।

लेकिन उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

सिर्फ एक अजीब-सी शांति थी।

उसने आर्यवीर को देखा।

फिर साँवी को।

और धीमी आवाज में कहा—

“तुम दोनों को यहाँ नहीं आना चाहिए था।”

आर्यवीर आगे बढ़ा।

“माँ?”

मीरा की आँखों में हल्की नमी आई।

लेकिन उसने सिर हिलाया।

“नहीं, आर्यन।”

आर्यवीर रुक गया।

मीरा ने कहा—

“मैं तुम्हारी माँ हूँ… लेकिन तुम्हारी कहानी में मैं वो नहीं हूँ जो तुम्हें बताया गया।”

और उसी पल उसके पीछे की स्क्रीन जल उठी।

उस पर लिखा था—

FOUNDER — CURRENT STATUS: ACTIVE

साँवी ने डरते हुए पूछा—

“तो Founder कौन है?”

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

और बहुत धीमे से बोली—

“तुम्हारे सामने बैठा हुआ इंसान नहीं…”

वह रुकी।

फिर उसने पीछे की स्क्रीन की तरफ देखा।

“…तुम्हारे अंदर छुपा हुआ सच है।”

कमरे की सारी लाइटें बंद हो गईं।

और अंधेरे में सिर्फ मीरा की आवाज गूंजी—

“अब तुम्हें अपने प्यार से ही इस Project को खत्म करना होगा।”

जारी रहेगा…