Devil ki Daastaan in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | Devil की दास्तान - 59

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Devil की दास्तान - 59

(खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही है। कमरे में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब-सी शांति फैली है। सिमरन बिस्तर के पास कुर्सी पर बैठी है, रातभर सोई नहीं। उसकी आँखें थकी हुई हैं, पर चेहरे पर अब भी उम्मीद की झलक है।)

(धीरे-धीरे करन की उँगलियाँ हिलती हैं। उसका चेहरा हल्का-सा करवट लेता है। सिमरन तुरंत चौकन्नी हो जाती है।)

सिमरन (धीरे से) बोली - 
“करन जी?... करन जी सुन सकते हो मुझे?”

(करन की पलके हिलती हैं, फिर वो धीरे से आँखें खोलता है।
उसकी आँखें अब भी लाल हैं, पर उनमें डर या गुस्सा नहीं — बस मासूमियत है। जैसे कोई बच्चा पहली बार किसी अनजान दुनिया को देख रहा हो।)

करन (धीरे से, मीठी आवाज़ में) बोला - 
“आप... कौन हो?”

(सिमरन के दिल पर जैसे किसी ने वार किया हो। उसकी आँखों में आँसू भर आते हैं, लेकिन वो मुस्कुरा देती है । एक बनावटी, पर बेहद कोमल मुस्कान।)

सिमरन (संभलकर) बोली - 
“मैं... आपकी बेस्ट फ्रेंड हूँ।”

करन (भौंहें चढ़ाकर) बोला - 
“बेस्ट फ्रेंड? सच में?”

सिमरन (सिर हिलाते हुए) बोली - 
“हाँ... हम बचपन से दोस्त हैं। आपको थोड़ी नींद ज़्यादा आ गई थी बस।”

(करन धीरे-धीरे उठकर बैठता है। उसकी हर हरकत में बच्चे जैसी मासूमियत है। वो सिमरन की ओर देखता है, फिर मुस्कुरा देता है।)

करन (भोलेपन से) बोला - 
“आप बहुत अच्छी हो... जैसे परी।”

(सिमरन की आँखें फिर भर आती हैं। वो हँसने की कोशिश करती है, लेकिन उसके गले से आवाज़ नहीं निकलती। वो सिर्फ सिर हिलाती है।)

सिमरन बोला - 
“हाँ... मैं आपकी परी हूँ।”

(करन उसकी बात सुनकर बच्चों की तरह खुश हो जाता है।
वो अपने हाथों से हवा में उँगलियाँ घुमाता है और हँसता है।)

करन (हँसते हुए) बोला - 
“मेरी परी... जो मुझे हमेशा बचाएगी ना?”

(सिमरन उसके पास जाती है, उसके माथे पर हाथ रखती है।)

सिमरन (धीरे से) बोली - 
“हाँ, हमेशा... जब तक साँसें हैं, आपको कोई छू भी नहीं सकेगा।”

(करन हल्के से सिर हिलाता है और उसके गोद में सिर रख देता है।
सिमरन उसके बालों में उँगलियाँ फेरती है। उसके आँसू उसके बालों में गिरते हैं, पर वो उन्हें छिपा लेती है।)

करन (आँखें बंद करते हुए) बोला - 
“परी... मुझे कहानी सुनाओ ना... जिसमें बुरा साया हार जाता है…”

(सिमरन हल्की मुस्कान देती है, उसे धीरे-धीरे थपकी देती है।)

सिमरन (धीरे, टूटी आवाज़ में) बोली - 
“ठीक है... एक बार की बात है, एक छोटा राजकुमार था…
जिसे एक साया पकड़ना चाहता था… लेकिन उसकी परी हमेशा उसके साथ थी…”

(सिमरन के आँसू उसके चेहरे पर बहते हैं, जबकि करन मासूम मुस्कान के साथ उसकी गोद में सो जाता है।
पीछे से वही काली परछाई दरवाज़े के कोने से झांकती है — विक्रांत जिसकी आँखों में अब नई योजना की चमक है।)

विक्रांत (धीरे से, फुसफुसाते हुए) बोला - 
“तो अब परी बनी है... चलो देखते हैं, कब तक बचा पाती है अपने राजकुमार को…”

(हल्की हवा चल रही है। खिड़की से आती चाँदनी कमरे के फर्श पर गिर रही है। सिमरन धीरे से परदे खींचती है ताकि रोशनी करन की नींद न तोड़े। कमरे में सिर्फ एक छोटी-सी लैंप की मद्धम रोशनी है।)

(करन बिस्तर पर बैठा है, चुपचाप दीवार को देख रहा है।
उसकी आँखें अब भी लाल हैं, लेकिन उनमें अब डर नहीं — एक अजीब-सी गहराई और मासूमियत है।)

सिमरन (धीरे से, उसके पास जाकर) बोली - 
“करन जी... आपको कुछ चाहिए?”

(करन सिर हिलाता है — ‘नहीं’। वो चुपचाप उसकी तरफ देखता है। उसकी आँखों में सवाल हैं, पर शब्द नहीं।)

सिमरन (थोड़ी मुस्कुराकर) बोली - 
“बाकी बच्चे तो इतने शोर मचाते हैं...आप तो एकदम शांत रहते हो।”

(करन की नज़र अब भी उसी पर टिकी है। वो हल्के से मुस्कुराने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी मुस्कान में भी एक रहस्य है।)

करन (धीरे से, मासूम आवाज़ में) बोला - 
“मुझे शोर पसंद नहीं... परी को भी नहीं होगा, है ना?”

(सिमरन का दिल पिघल जाता है। वो उसके पास बैठ जाती है, उसके बालों में उँगलियाँ फेरती है।)

सिमरन (मुस्कराकर) बोली - 
“हाँ... परी को भी नहीं पसंद।”

(करन हल्का-सा सिर झुकाता है और सिमरन की गोद में सिर रख देता है। सिमरन के चेहरे पर एक साथ शांति और दर्द दोनों हैं।
वो जानती है, उसके सामने बैठा ये बच्चा वही करन है —
जो कभी उसकी ढाल बना था, उसकी जान बचाई थी।)

(करन अपनी लाल आँखों से ऊपर देखता है, सिमरन की आँखों में झाँकता है।)

करन (धीरे से) बोला - 
“परी... जब मैं छोटा था, तब भी तुम मुझे ऐसे ही देखती थीं?”

(सिमरन का गला भर आता है। वो काँपते होंठों से मुस्कुराती है।)

सिमरन बोली - 
“हाँ... तब भी आप इतने ही प्यारे थे।”

(करन हल्के से मुस्कुराता है, फिर एकदम बच्चे की तरह उसके सीने से लग जाता है। सिमरन उसकी पीठ पर हाथ फेरती है। उसकी आँखों से आँसू गिरकर करन के बालों में समा जाते हैं।
करन कुछ पल में ही नींद में चला जाता है — गहरी, मासूम नींद में।)

(सिमरन उसके माथे को देख रही है। उसके होंठों पर बस एक ही बात आती है...)

सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली - 
“कितना दर्द झेला है आपने... और अब ये सजा...”

(वो उसकी गोद में सिर टिकाकर बैठी रहती है। बाहर से हवा की हल्की सरसराहट सुनाई देती है। कहीं दूर मंदिर की घंटी बजती है, और सन्नाटा गहरा हो जाता है।)

पृष्ठभूमि में धीमी आवाज़ –
“कभी-कभी, आत्मा अपने सारे घाव छिपा लेती है,
पर आँखें... वो सब कह देती हैं।”

.(रात का सन्नाटा, दीवारों पर हल्की नीली रोशनी टिमटिमा रही है।
खिड़की के बाहर बारिश रुक चुकी है लेकिन हवा में ठंडक बाकी है।
बिस्तर पर करन गहरी नींद में है, और पास ही सिमरन (परी) बैठी है।
उसकी गोद में लैपटॉप खुला है, स्क्रीन की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही है। वो किसी रिपोर्ट पर ध्यान लगाए टाइप कर रही है।)

(उसकी पलकों के नीचे हलचल है, वो बेचैन होकर पलट रहा है।
अचानक उसका चेहरा डर से विकृत हो जाता है।)

करन (नींद में, बुरे सपने में) बोला - 
“नहीं... नहीं परी को मत ले जाना... वो मेरी है... मेरी परी...”

(वो झटके से उठ बैठता है। उसकी सांसें तेज़ हैं, चेहरा पसीने से भीगा हुआ।)

सिमरन (घबराकर, लैपटॉप बंद करती हुई) बोली - 
“करन! क्या हुआ? आप ठीक तो हो?”

(करन कुछ नहीं बोलता। वो काँपते हुए हाथों से सिमरन को पकड़ लेता है और उसे अपने सीने से कसकर लगा लेता है।
सिमरन हैरान है, लेकिन कुछ पल बाद उसका दिल करन के दर्द को महसूस करने लगता है।)

करन (टूटी आवाज़ में, रोते हुए) बोला - 
“परी... प्लीज़... मुझसे दूर मत जाना... मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगा...वो लोग कह रहे थे... कि तुम... तुम अब मेरी नहीं रहोगी...”

(उसकी आवाज़ में इतनी मासूमियत और डर है कि सिमरन के आँसू खुद-ब-खुद आँखों से बहने लगते हैं।)

सिमरन (धीरे से, उसे शांत करते हुए) बोली - 
“श्श्श... कुछ नहीं होगा, करन। देखो, मैं यहीं हूँ... आपके पास।”

(वो उसके सिर पर हाथ फेरती है। करन का सिर अब भी उसके कंधे पर टिका है। वो धीरे-धीरे रोना बंद कर देता है लेकिन अब भी काँप रहा है।)

सिमरन (धीमे स्वर में) बोली - 
“किसी ने कुछ नहीं कहा... वो बस सपना था, करन। सपने झूठे होते हैं।”

करन (कमज़ोर आवाज़ में, आँखें बंद करते हुए) बोला - 
“पर वो सपना सच्चा लगता था... वहाँ अंधेरा था, सब आग में जल रहा था...वो बोल रहे थे — ‘तेरी परी अब हमारी है।’
मैंने चिल्लाया... पर तुम... तुम चली गईं...”

(सिमरन का दिल जोर से धड़कता है। वो करन का चेहरा अपने हाथों में लेकर उसे देखती है। उसकी लाल आँखों में एक अजीब चमक है — जैसे किसी ने अंदर झाँका हो।)

सिमरन (धीरे से) बोली - 
“करन... अब बस। अब कुछ नहीं होगा। मैं यहीं हूँ।”

(वो धीरे से उसके माथे पर हाथ फेरती है। फिर हल्की मुस्कान के साथ कहती है —)

सिमरन बोली - 
“अब आँखें बंद करो, और बस मेरे दिल की धड़कन सुनो।”

(करन उसकी गोद में सिर रख देता है। सिमरन धीरे-धीरे उसके बालों को सहलाती है। कुछ ही देर में उसकी साँसें सामान्य हो जाती हैं, और वो नींद में चला जाता है। सिमरन उसकी तरफ झुकती है, उसके माथे पर किस करती है।)

(सिमरन करन के पास लेटी है, उसका सिर करन के सीने पर टिक गया है। बाहर चाँदनी और भीतर उनके बीच एक शांति सी पसरी है।
पर हवा में अब भी एक अनकहा डर घुला है।)

पृष्ठभूमि में वॉयसओवर -
“कभी-कभी सपने सिर्फ़ दिमाग़ का भ्रम नहीं होते...
वो किसी आने वाली सच्चाई की दस्तक होते हैं।”