Mafia Saiya - 1 in Hindi Love Stories by Shilpi Mishra books and stories PDF | Mafia Saiya - 1

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Mafia Saiya - 1



अध्याय 1 : पहली टक्कर

रायपुर की सबसे महंगी सड़क पर आज अजीब सा सन्नाटा था।

इस सन्नाटे की वजह थी एक काली जी-वैगन। उसकी स्पीड 150 के पार थी और उसके आगे-पीछे पाँच काली स्कॉर्पियो चल रही थीं, जिनमें हथियारबंद लोग बैठे थे।

जी-वैगन के अंदर बैठा था वो आदमी, जिसका नाम सुनते ही बड़े-बड़े मंत्रियों के पसीने छूट जाते हैं। जिसका नाम सुनते ही पुलिस अपनी वर्दी टाइट कर लेती है।

रुद्र सिंह राजावत।

उम्र 27 साल। पूरे छत्तीसगढ़ के अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह। चेहरे पर कभी कोई भाव नहीं, आँखों में हमेशा एक अजीब सा ठंडापन। लोगों का कहना था कि रुद्र ने आज तक कभी किसी को माफ़ नहीं किया। और उसकी आँखों में कभी किसी के लिए रहम नहीं देखा गया।

रुद्र अपने फोन पर किसी को हड़काते हुए कह रहा था, "अगर कल सुबह तक वो जमीन मेरे नाम नहीं हुई, तो उसकी लाश भी नहीं मिलेगी।"

तभी...

धड़ाम !!!

एक जोरदार आवाज हुई। ड्राइवर ने एकदम से ब्रेक मारा। जी-वैगन के टायरों की चीख निकल गई।

एक पुरानी गुलाबी स्कूटी सीधा जी-वैगन के सामने आकर गिरी थी। स्कूटी पर एक लड़की थी। सफ़ेद डॉक्टर कोट, गले में स्टेथोस्कोप, और चेहरे पर दुनिया भर का गुस्सा।

रुद्र का माथा तन गया।

एक सेकंड के अंदर रुद्र के दस गार्ड गाड़ियों से उतर गए। सबके हाथ में बंदूकें थीं और सबने उस लड़की पर तान दी।

एक गार्ड दहाड़ा, "ऐ लड़की! अंधी है क्या? मरना है तुझे? जानती है किसकी गाड़ी है ये?"

उस लड़की को... कोई फर्क ही नहीं पड़ा।

वो अपनी गिरी हुई स्कूटी को वहीं छोड़कर सीधा जी-वैगन के पास आई। और जी-वैगन के शीशे को जोर-जोर से खटखटाने लगी।

"बाहर निकल! ऐ, बाहर निकल! अंधा है क्या तू? आँखें हैं या बटन? पैसा आ गया तो क्या सड़क तेरे बाप की हो गई?"

पूरे काफिले में मौत जैसा सन्नाटा छा गया।

गार्ड्स के हाथ काँपने लगे। क्योंकि आज तक, पिछले सात सालों में, किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई थी कि वो रुद्र सिंह राजावत की गाड़ी के सामने खड़ा होकर उसे ललकार दे।

जी-वैगन का दरवाजा खुला।

रुद्र बाहर आया।

काला कुर्ता, बढ़ी हुई दाढ़ी, 6 फुट 2 इंच की कद-काठी। उसकी आँखें गुस्से से लाल हो रही थीं। उसके माथे की नस फड़क रही थी।

वो उस लड़की के बिल्कुल सामने आकर खड़ा हो गया। इतना करीब कि उसकी साँसें उस लड़की को महसूस हो रही थीं।

लड़की ने एक पल भी नहीं सोचा। उसने सीधा रुद्र का कॉलर पकड़ लिया।

"तुझे दिखता नहीं है क्या? मैं कब से हॉर्न बजा रही हूँ! मेरी ड्यूटी का टाइम हो रहा है! अगर मेरे किसी मरीज को कुछ हो गया ना, तो..."

वो आगे कुछ बोलती, उससे पहले ही रुद्र ने उसका हाथ देखा। जो हाथ उसका कॉलर पकड़े हुए था। छोटा सा, गोरा सा हाथ, पर हिम्मत शेरनी जैसी।

फिर रुद्र ने उसकी आँखें देखीं। बड़ी-बड़ी, गुस्से से भरी हुई, बिना किसी डर के।

और तभी...

रुद्र के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।

एकदम हल्की सी मुस्कान। होंठों के कोने पर टिकी हुई, पर इतनी सनकी और इतनी खतरनाक कि उसे देखकर उसके अपने गार्ड भी दो कदम पीछे हट गए।

ये वो मुस्कान थी, जिसे देखकर लोग समझ जाते थे कि अब कुछ बहुत बुरा होने वाला है।

रुद्र ने बहुत धीरे से, इतना धीरे कि सिर्फ वही लड़की सुन पाए, उसके कान के पास झुककर कहा -

*"कॉलर तो तूने पकड़ लिया है, जंगली बिल्ली... अब अगर मैंने पकड़ा, तो छोड़ूँगा नहीं। कभी नहीं।"*😾

उसकी आवाज में एक अजीब सा जुनून था। एक पागलपन था।

उस लड़की का नाम था *डॉ. नित्या शर्मा।* और उसे नहीं पता था कि उसने आज सुबह-सुबह, अनजाने में, अपनी मौत के कॉलर को नहीं, बल्कि अपनी किस्मत के कॉलर को पकड़ लिया है।

रुद्र ने अपने गार्ड की तरफ देखा और कहा, "इस खटारा स्कूटी को आग लगा दो।"

"क्या? तुम मेरी स्कूटी को..." नित्या चिल्लाई।

रुद्र ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "आज से तू मेरी गाड़ी में जाएगी। मेरी जंगली बिल्ली खटारा पर नहीं चलेगी।"



अगले अध्याय में क्या होगा?

क्या नित्या रुद्र की गाड़ी में बैठेगी? रुद्र उसे कहाँ ले जाएगा? क्या वो उसे अपनी हवेली में कैद कर देगा? और जब नित्या को पता चलेगा कि रुद्र ही वो सनकी मरीज है जो रात में उसके हॉस्पिटल आता है, तो क्या होगा?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 2 : हवेली में कैद जंगली बिल्ली