अध्याय 2 : हवेली में कैद जंगली बिल्ली
"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी स्कूटी को हाथ लगाने की!"
नित्या चीख रही थी, पर उसकी आवाज जी-वैगन के अंदर गूँज कर रह गई थी।
रुद्र ने उसे लगभग उठाकर अपनी जी-वैगन में पटक दिया था। बाहर उसकी गुलाबी स्कूटी धू-धू कर जल रही थी।
"मेरी स्कूटी! तुम पागल हो क्या? वो मेरे पापा ने मुझे दी थी!" नित्या की आँखों में आँसू आ गए।🥺
रुद्र एकटक उसे देख रहा था। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था, एक अजीब सा जुनून था।
उसने जेब से रुमाल निकाला और नित्या के गाल पर जो कालिख लगी थी, उसे पोंछने लगा।
"श... बिल्ली रोती हुई अच्छी नहीं लगती।" रुद्र की आवाज बिल्कुल शांत थी, पर उतनी ही खतरनाक।
"स्कूटी गई तो क्या हुआ? मैं तुझे पूरी की पूरी शोरूम खरीद दूंगा।"
नित्या ने उसका हाथ झटक दिया, "मुझे कुछ नहीं चाहिए तुमसे! गाड़ी रोको! मुझे हॉस्पिटल जाना है!"
रुद्र हँसा। एक सनकी हँसी।
"हॉस्पिटल? अब तू कहीं नहीं जाएगी।"
उसने अपने ड्राइवर से कहा, "हवेली चलो।"
"हवेली? कौन सी हवेली? देखो मुझे किडनैप करने की कोशिश मत करो, मैं पुलिस को फोन कर दूंगी!" नित्या ने अपना फोन निकाला।📱
रुद्र ने एक झटके में फोन उसके हाथ से छीन लिया और खिड़की से बाहर फेंक दिया।
"पुलिस? जान, इस शहर की पुलिस मेरे घर पर पानी भरती है।"
20 मिनट बाद गाड़ी एक बहुत बड़ी हवेली के सामने रुकी। राजावत हवेली। इतनी बड़ी कि नित्या का मुँह खुला रह गया।
रुद्र उसे कंधे पर उठाकर अंदर ले गया। जैसे वो कोई गुड़िया हो।
"उतारो मुझे! उतारो नीचे! तुम गुंडे हो! बदमाश हो!"
हवेली के सारे नौकर सिर झुकाकर खड़े हो गए। उन्होंने आज तक रुद्र को किसी लड़की को इस तरह उठाते हुए नहीं देखा था।
रुद्र उसे सीधा अपने कमरे में ले गया और दरवाजा बंद कर दिया।
कमरा नहीं, महल था। बीच में एक बड़ी सी बेड।
रुद्र ने नित्या को बेड पर बिठाया और खुद उसके सामने घुटनों पर बैठ गया।
पूरा अंडरवर्ल्ड जिसके सामने घुटने टेकता है, वो आज एक 22 साल की लड़की के सामने घुटनों पर था।
"तुझे पता है, आज तक किसी ने मेरा कॉलर नहीं पकड़ा।" रुद्र ने उसके दोनों हाथ पकड़े। "तू पहली है। और तू ही आखिरी रहेगी।"
"तुम पागल हो! पूरी तरह से पागल!" नित्या काँप रही थी।
"हाँ हूँ।" रुद्र ने बिना किसी शर्म के कहा। "तेरे लिए। सिर्फ तेरे लिए पागल हूँ। बचपन से लेकर आज तक मैंने जो भी चाहा, उसे पाया है। और अब मुझे तू चाहिए।"
उसने नित्या के माथे पर लगी चोट देखी, जो स्कूटी गिरने से लगी थी।
रुद्र का चेहरा एकदम से सख्त हो गया।
"ये चोट कैसे लगी? किसने लगाया तुझे?" उसकी आँखें खून की तरह लाल हो गईं।
"ये... ये अभी स्कूटी से गिरी तब..."
"तेरी हिम्मत कैसे हुई खुद को चोट पहुँचाने की?" रुद्र चिल्लाया। उसने टेबल पर रखा कांच का गिलास उठाकर दीवार पर दे मारा। गिलास चकनाचूर हो गया।
नित्या डर से सिमट गई।
रुद्र ने तुरंत खुद को संभाला और फर्स्ट-एड बॉक्स लाया। बहुत प्यार से, जैसे कोई बच्चे को मरहम लगाता है, वैसे उसने नित्या के माथे पर दवाई लगाई।
"देख, डर गई ना? मैंने कहा था ना, मुझे गुस्सा मत दिला। जब तुझे कुछ होता है तो मेरा दिमाग काम करना बंद कर देता है।"
उसने नित्या के चेहरे को अपने हाथों में लिया और बोला,
*"सुन जंगली बिल्ली, तू अब इस हवेली से बाहर नहीं जाएगी। तेरी ड्यूटी अब हॉस्पिटल में नहीं, यहाँ... मेरे पास लगेगी। तू मेरी पर्सनल डॉक्टर। सिर्फ मेरी।"*
नित्या की आँखें फटी रह गईं, "मैं तुम्हारी कैदी हूँ?"
रुद्र उसके और करीब आया, उसके होंठ लगभग उसके कानों को छू रहे थे।
"कैदी नहीं... तू तो इस कैदी की मालकिन है। इस हवेली की मालकिन, मेरे दिल की मालकिन। और याद रखना, अगर तूने भागने की कोशिश की..."
उसने एक जहरीली मुस्कान के साथ कहा, *"तो मैं तेरे उन पैरों को ही तोड़ दूंगा, जिनसे तू भागेगी। फिर तू हमेशा मेरे पास ही रहेगी।"*
*अगले अध्याय में क्या होगा?*
क्या नित्या इस सनकी रुद्र की हवेली से भाग पाएगी? जब पूरी रात रुद्र उसे अपने कमरे में बंद रखेगा तो क्या होगा? और सबसे बड़ा राज - रुद्र को क्यों लगता है कि नित्या को वो पहले से जानता है?
*जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 3 : वो पागल रात*