Crash and Survival in Hindi Thriller by Shaziya Khan books and stories PDF | क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 18

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क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 18

एपिसोड 13 (दो किनारे, दो कयामत)



टूटे हुए पुल ने अमेज़न की उस खूंखार नदी को दो हिस्सों में बांट दिया था, और उसी के साथ बट चुकी थी इन ६ बचे हुए लोगों की तकदीर। एक तरफ लारा का ज्ञान और सूझबूझ थी, तो दूसरी तरफ ऐशली और रोज़ी का अकेलापन और खौफ। दोपहर ढल रही थी और जंगल के दोनों तरफ कयामत दस्तक देने वाली थी।


लारा और सोफिया आगे-आगे चल रहे थे, जबकि पॉल ने मैट को सहारा दिया हुआ था। बिल की मौत के बाद पॉल का रोज़ी के लिए सारा अट्रैक्शन खत्म हो चुका था, उसके दिमाग में सिर्फ अपनी जान बचाना और लारा पर भरोसा करना बाकी था। धूप इतनी तेज़ थी कि उमस से उनके बदन से पानी खत्म हो रहा था। तभी मैट ने कराहते हुए कहा,

"लारा... मुझसे अब और नहीं चला जा रहा। मेरा पैर पूरी तरह सुन्न हो चुका है।


लारा रुकी और उसने आस-पास देखा। उसे पेड़ों के ऊपर कुछ अजीब से फल लटके दिखाई दिए, जो दिखने में छोटे तरबूज जैसे थे। लारा ने तुरंत पहचान लिया,

वो 'बबासू' (Babassu) के फल हैं। इनके अंदर का गूदा और तेल भूख भी मिटाता है और ताकत भी देता है।" पॉल ने तुरंत एक सूखी लकड़ी से मारकर तीन-चार फल नीचे गिराए।


लारा ने अपने चाकू से उन सख्त फलों को काटा। उनके अंदर का सफ़ेद गूदा खाते ही चारों को मानो नई जिंदगी मिल गई। सोफिया ने पानी का बांस आगे बढ़ाया। खाते-खाते पॉल ने नदी की तरफ देखा और बुदबुदाया,

"लारा... क्या वो दोनों उस पार ज़िंदा बच पाएंगी?

लारा ने ठंडे लहजे में कहा,

अमेज़न में जिंदा रहने के लिए दिमाग चाहिए, ब्रैंडेड कपड़े या घमंड नहीं। अगर वे अपनी बेवकूफी से बाज़ नहीं आईं, तो शाम का सूरज उनका आखिरी सूरज होगा।"


नदी के ठीक दूसरी तरफ, घने कीचड़ में बैठी ऐशली और रोज़ी का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके पास न पानी था, न खाना और न ही जंगल का कोई रास्ता पता था। रोज़ी का हाथ मेंढक के ज़हर की वजह से अभी भी दर्द कर रहा था। उसने रोते हुए कहा,

"ऐशली! यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है। तुमने उस पुल पर कूदने की बेवकूफी क्यों की? देखो, पॉल और मैट भी हमें छोड़कर चले गए!


ऐशली ने गुस्से में अपना ब्रैंडेड बैग कीचड़ में फेंक दिया,

"चुप रहो रोज़ी! मुझे क्या पता था कि वो घटिया पुल टूट जाएगा। और उन लड़कों को देखो... उस भिखारी लारा के पीछे ऐसे भाग रहे हैं जैसे वो कोई रानी हो। मुझे इस जंगल से नफ़रत है! मुझे घर जाना है!

ऐशली चिल्लाई, लेकिन उसकी आवाज़ घने पेड़ों से टकराकर वापस आ गई।


तभी, रोज़ी को अपने पीछे की झाड़ियों में एक अजीब सी सरसराहट सुनाई दी। धूप धीरे-धीरे कम हो रही थी और पेड़ों के नीचे अंधेरा गहराने लगा था। रोज़ी ने डरते हुए ऐशली का कंधा हिलाया,

"ऐशली... देखो... वहाँ झाड़ियों के पीछे कुछ है!


ऐशली ने मुड़कर देखा। झाड़ियों के बीच से दो छोटी, भूरी और बेहद शातिर आँखें उन दोनों को घूर रही थीं। वह कोई बड़ा तेंदुआ नहीं था, बल्कि अमेज़न का एक और अजीब जीव था—एक 'बुशमास्टर' (Bushmaster Snake), जो दुनिया के सबसे ज़हरीले और आक्रामक पिट वाइपर सांपों में से एक होता है। वह करीब 8 फीट लंबा था और बहुत तेज़ी से उनकी तरफ रेंग रहा था।


"सांप!! ऐशली भागो!


रोज़ी चीखी और बिना पीछे देखे नदी के किनारे-किनारे घनी घास की तरफ भागी। ऐशली भी खौफ के मारे चीखती हुई उसके पीछे दौड़ी। लेकिन वे भूल गई थीं कि नदी का यह किनारा दलदली था। भागते-भागते ऐशली का पैर कीचड़ में धंस गया और वह मुंह के बल गिर पड़ी। सांप उसकी तरफ बढ़ रहा था।
ऐशली ने रोते हुए रोज़ी को आवाज़ दी, "

रोज़ी! मेरा हाथ पकड़ो, मुझे खींचो!


लेकिन रोज़ी इतनी स्वार्थी और डरी हुई थी कि उसने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। वह ऐशली को अकेला छोड़कर घने जंगल के अंदर भाग गई। ऐशली चिल्लाती रह गई,


रोज़ी! तुम मुझे अकेले नहीं छोड़ सकती!

ऐशली ने अपनी पूरी ताकत लगाकर पैर बाहर खींचा और सांप के डसने से ठीक एक सेकंड पहले एक ऊंचे पत्थर पर चढ़ गई। सांप पत्थर के नीचे फुफकार रहा था। ऐशली अकेली, बेबस और खौफ से कांप रही थी। उसे समझ आ गया था कि जिस रोज़ी के लिए वह लारा से लड़ती थी, उसी रोज़ी ने उसे मौत के मुंह में छोड़ दिया था।


रात के 7 बज चुके थे। जंगल में फिर से अंधेरा छा गया था। नदी के इस पार, लारा और उसका ग्रुप आग जलाकर एक सुरक्षित पेड़ के नीचे बैठे बबासू के फल खा रहे थे और आगे की प्लानिंग कर रहे थे। वहीं नदी के उस पार, ऐशली एक पत्थर पर अकेली बैठी रो रही थी और रोज़ी अंधेरे जंगल में रास्ता भटक चुकी थी, जहाँ दूर से किसी भूखे शिकारी की गुर्राहट गूँज रही थी। दोनों किनारों पर किस्मत अपना खेल दिखा चुकी थी... (जारी है)