Pinku's Angel - 4 in Hindi Fiction Stories by Deepak Kumar Tiwari books and stories PDF | पिंकू की परी - 4

Featured Books
Categories
Share

पिंकू की परी - 4





वह गुप्त केबिन नीली और सुनहरी लाइटों की चकाचौंध से जगमगा रहा था। स्पेसशिप के भीतर हवा में तैरते हुए डेटा पार्टिकल्स और होलोग्राफिक स्क्रीन किसी साइंस-फिक्शन फिल्म का सेट लग रहे थे, लेकिन वहाँ जो ड्रामा चल रहा था, वह हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों के बस का नहीं था।

सामने खड़ी सिल्वर स्पेस सूट वाली अंतरिक्ष की अप्सरा ने अपनी जादुई, गूंजती हुई और मशीनी रूप से सुरीली आवाज़ में जब पूछा—माइ कोड नेम P444... एंड यू?

तो हमारे अपने प्यारे पिंकू पांडे की बत्ती एकदम गुल हो गई। मुँह का पान (जो बनारसी मग्ही पान था और जिसके बिना पिंकू का ब्रह्मांड भी अधूरा रहता है) तो वे पहले ही पास के वेस्ट डिस्पोजल में थूक चुके थे, लेकिन इस समय उनकी आँखों के सामने बनारस के अस्सी घाट से लेकर दशाश्वमेध घाट तक के सारे घाट गोल-गोल घूम रहे थे। उन्हें लगा कि कहीं वे सचमुच मणिकर्णिका घाट की किसी चिता के धुएँ के बीच तो नहीं आ गए हैं।

लेकिन पिंकू पांडे ठहरे बनारस के पक्के कबीरचौरा मोहल्ले वाले। डरना उनके खून में था ही नहीं। उन्होंने अपनी छाती पर हाथ रखा, कंधे का वह मशहूर लाल गमछा थोड़ा और करीने से सीधा किया, कॉलर झाड़ी, और चेहरे पर सात पुश्तों का आत्मविश्वास समेट कर अपनी ठेठ बनारसी शैली में गरज उठे—

पिंकू पांडे: अरे हटाओ साला पी-चार सौ चवालीस ई कोई नाम है भला? ऐसे बोला जाता है जैसे रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी का नंबर बोल रहे हों! नाम तो ऐसा होना चाहिए जिसे सुनते ही सामने वाले के मुँह से लार टपक जाए, दिल बाग-बाग हो जाए। तुम तो सीधे आसमान से उतरी हो... एकदम दूध जैसी सफेद और चांद जैसी चमकती हुई! हम तुमका आज से परी बुलाएंगे। और हमारा नाम... हमारा नाम है श्रीमान पिंकू पांडे... पूरे बनारस के इकलौते हाई स्कूल फेल

P444 (यानी हमारी परी) ने अपना सिर थोड़ा तिरछा किया। उसकी नीली आँखों में गहरी उलझन तैरने लगी। उसने अपनी कलाई पर बंधी चमकती हुई इंटर-गैलेक्टिक स्मार्ट स्क्रीन पर कुछ तेजी से बटन दबाए, जैसे वह पिंकू के इन अजीबोगरीब शब्दों और बनारसी लहजे को अपनी भाषा के यूनिवर्सल ट्रांसलेटर में फीड करके अर्थ निकालने की कोशिश कर रही हो।

कुछ ही सेकंड में कंप्यूटर ने रोबोटिक आवाज़ में अनुवाद किया। परी ने चौंककर पूछा—

परी (P444): प-री? हाई... स्कूल... फेल? क्या यह पृथ्वी ग्रह का कोई बहुत ही खतरनाक, विनाशकारी और अल्टीमेट पावरफुल वेपन (हथियार) है? क्या इससे स्पेसशिप तबाह हो सकते हैं?

पिंकू ने तड़प कर अपने माथे पर हाथ मार लिया और जोर से ठहाका लगाते हुए बोले—

पिंकू पांडे: अरे वेपन नहीं है डार्लिंग! ई हाई स्कूल फेल तो एक ऐसी उपाधि है जो बड़े-बड़े धुरंधरों को बड़े भाग्य से मिलती है। इसके आगे बड़े-बड़े सूरमा फेल हो जाते हैं! और रही बात हथियार की... तो ई कोई हथियार नहीं, सीधे दिल पे लगने वाला तीर है! तुमका देख के साली खोपड़िया एकदम कन्फुसिया गई है रे बाबा!

परी ने जब कन्फुसिया और रे बाबा जैसे शब्द सुने, तो उसके प्रोसेसर की बत्तियां और तेज जलने लगीं। वह समझ नहीं पा रही थी कि यह प्राणी अंतरिक्ष के सबसे खतरनाक जोन में आया है या किसी नुक्कड़ नाटक में। लेकिन इससे पहले कि वह पिंकू से कुछ और पूछती या कोई और रिसर्च करती, पूरे केबिन की दीवारें अचानक धड़-धड़-धड़ करके भयानक तरीके से कांप उठीं। अंतरिक्ष का तापमान एकदम से गिर गया और लाल सायरन बजने लगे।

खूंखार विलेन पाजी की एंट्री होती है।
कमरे की मुख्य बड़ी स्क्रीन, जो अब तक नीली रोशनी दे रही थी, वह अचानक खून जैसी लाल रोशनी के साथ चालू हो गई। स्क्रीन पर एक बेहद विशाल, डरावना और गहरे कत्थई रंग का एलियन दिखाई दिया।

उसके सिर पर भैंसे जैसे दो बड़े-बड़े काले, नुकीले सींग थे जो चमक रहे थे। उसकी आँखें सुलगते हुए अंगारे जैसी लाल थीं और उसने अंतरिक्ष के सबसे खतरनाक धातुओं से बना लोहे का भारी-भरकम कवच पहन रखा था। उसकी चौड़ी छाती और डरावनी बनावट को देखकर कोई भी थरथरा उठे। वह और कोई नहीं, इस पूरी दुष्ट एलियन सेना का क्रूर, निर्दयी और खूंखार कमांडर था, जिसे देखते ही पिंकू पांडे के दिमाग में उसका एक सटीक नाम आ गया—पाजी

पाजी ने स्क्रीन के पार से ऐसी कान फाड़ देने वाली भयानक आवाज़ में गरजा कि स्पेसशिप के स्पीकर्स फटने की कगार पर आ गए—

विलेन पाजी: P444! तेरी इतनी हिम्मत! तूने मेरे मुख्य यान का मेन सिस्टम हैक करके मेरे सारे पहरेदार सैनिकों को पीछे भगा दिया? तू भूल गई कि इस पूरी गैलेक्सी का सुप्रीम बॉस मैं हूँ! और वो जो पृथ्वी से आया हुआ दो पैरों वाला अजीब मानव सैंपल (पिंकू) तेरे बगल में खड़ा है, उसे मैं जिंदा या मुर्दा वापस लेकर रहूँगा। मुझे उसके शरीर की चीर-फाड़ करनी है, ताकि मैं इंसानी दिमाग के इस अजीबोगरीब और illogical कम्पार्टमेंट की कमज़ोरी समझ सकूँ और अपनी यह अजेय सेना लेकर सीधे पृथ्वी पर हमला कर सकूं!

पाजी की यह धमकी सुनकर पिंकू पांडे का कंधा और उनका लाल गमछा गुस्से में फड़कने लगा। उनकी आँखों में अंगारे तैरने लगे। बनारस के घाटों पर अखाड़े में कुश्ती लड़ने वाले का खून खौल उठा।

पिंकू पांडे: अरे ओए सींग वाले पाजी! बहुत खों-खों कर रहे हो बे! हमारा चीर-फाड़ करोगे? हमारी धरती माता को और बनारस की गलियों को गुलाम बनाओगे? एक घूंसा मारेंगे ना... तो छितरा के अंतरिक्ष में बिखर जइहौ! तुम्हारे पुरखे और तुम्हारे बप्पा भी तुमका बटोर नहीं पाएंगे!


पाजी ने पिंकू की इस चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपनी शैतानी, गूंजती हुई हंसी हंसने लगा। उसने स्क्रीन पर थोड़ा पीछे की ओर कदम बढ़ाया।

जैसे ही कैमरा पीछे की तरफ घूमा, स्क्रीन पर एक दिल दहला देने वाला दृश्य उभरा। लोहे के एक मजबूत, पारदर्शी और नीले रंग की ऊर्जा से चमकते हुए कांच के चैंबर में एक छोटी, बेहद मासूम एलियन बच्ची (जो परी की छोटी बहन थी) कैद थी। वह डर के मारे थर-थर कांप रही थी और उसकी आँखों से लगातार मोती जैसे आंसू गिर रहे थे। उसके छोटे-छोटे पारदर्शी पंख बुरी तरह मुड़े हुए थे।

विलेन पाजी: P444! अगर तूने इस बकवास मानव को मेरे हवाले नहीं किया, और खुद घुटनों के बल बैठकर सरेंडर नहीं किया... तो तेरी इस छोटी बहन का एक-एक परमाणु इस गैलेक्सी से मिटा दूंगा! इसका नामोनिशान हमेशा के लिए खत्म कर दूंगा! तुम्हारे पास मेरे इस खूंखार अड्डे पर आने और आत्मसमर्पण करने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक घंटा है! टिक... टोक... टिक... टोक...

टी... टी... टी...और भयानक हंसी के साथ वह बड़ी स्क्रीन अचानक काली हो गई।

केबिन में एक भयानक सन्नाटा पसर गया। उस चैंबर में अपनी छोटी बहन की कैद और उसकी तड़प को देखकर परी (P444) के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया। उसका सारा अंतरिक्षीय अहंकार और तकनीकी ज्ञान एक पल में बिखर गया। वह सुदबुद खोकर घुटनों के बल फर्श पर गिर पड़ी और उसकी नीली, सुंदर आँखों से चमकीले, नीले रंग के जादुई आँसू टपक-टपक कर फर्श पर बिखरने लगे।

वह अपनी अंतरिक्षीय भाषा में सिसक-सिसक कर रोते हुए बड़बड़ाने लगी कि अब उसकी बहन भी चली गई और उसकी पूरी दुनिया हमेशा के लिए खत्म हो गई है। अंतरिक्ष की इतनी बड़ी फाइटर आज पूरी तरह बेबस हो चुकी थी।

पिंकू पांडे का देसी जज्बा और नया गठबंधन
पिंकू पांडे से जिंदगी में कभी किसी महिला या लड़की के आँसू बर्दाश्त नहीं हुए थे, और यहाँ तो बात उनकी अपनी प्यारी परी की थी! उनके सीने में एक अजीब सा तूफान उठ खड़ा हुआ।

पिंकू ने बिना एक पल गंवाए, फुर्ती के साथ आगे बढ़कर फर्श पर गिरा अपना वही पुराना, धूल और पसीने से सना लाल गमछा उठाया। उन्होंने उसे अपनी हथेलियों के बीच रगड़ा और फिर पूरी ताकत से अपने माथे और सिर पर कसकर बांध लिया—बिल्कुल वैसे ही जैसे बनारस के पहलवान दंगल में उतरने से पहले अपना लंगोट और साफा कसते हैं। उनके भीतर का बनारसी भौकाल अपने चरम पर था।

पिंकू ने आगे बढ़कर परी का कांपता हुआ कंधा पकड़ा और अपनी पूरी कड़क, भारी और मर्दानी आवाज़ में बोले—

पिंकू पांडे: अरे चुप करो परी डार्लिंग! ऐसे रोने से रोने वाले नहीं रोते, दुश्मन और मजबूत हो जाता है! जो हमारी महान पृथ्वी को गुलाम बनाने की घटिया सोच रहा है, और जिसने तुम्हारी इस मासूम सी छोटी सी गुड़िया जैसी बहन को हाथ लगाया है... उस सींग वाले पाजी की खटिया खड़ी करना और उसकी हड्डी-पसली एक करना अब इस पिंकू पांडे का इकलौता फर्ज है!

पिंकू ने परी को दोनों कंधों से पकड़कर ऊपर उठाया और आँखों में आँखें डालकर बोले—

पिंकू पांडे: उठो! अपनी इस उड़ने वाली गाड़ी (स्पेसशिप) का स्टेयरिंग संभालो, रडार सेट करो! आज उस पाजी के उस लोहे के घर में घुसकर उसके दोनों सींग उखाड़कर उसी के हाथ में न थमा दिए... तो हमारा नाम भी पिंकू पांडे नहीं!

परी ने रोते हुए अपनी नीली आँखें उठाईं और पिंकू के चेहरे पर उस अनोखे, बिना किसी हाई-टेक हथियार के दिखाई देने वाले देसी जांबाजी और अटूट आत्मविश्वास को देखा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह बिना किसी लेजर गन या एनर्जी शील्ड वाला साधारण सा दिखने वाला मानव इतनी बड़ी और खौफनाक बात इतने स्टाइल से कैसे कह रहा है!

लेकिन पिंकू की आँखों के उस असीम भरोसे और उनकी जुबान के जादू ने परी के दिल में एक अजीब सा, गहरा और कभी न मिटने वाला अट्रैक्शन (आकर्षण) पैदा कर दिया। उसे लगा कि शायद साइंस और टेक्नोलॉजी जहाँ फेल हो जाती है, वहाँ &बनारसी जुगाड़ और जिगरा काम आता है।

परी ने अपने आँसू पोछे, उसकी नीली आँखों में एक नई चमक और जिद लौट आई। उसने स्पेसशिप के मेन कंसोल पर हाथ रखा और सिस्टम एक्टिवेट कर दिया।

आगे क्या होगा?