This is one-sided love - Part 11 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 11

Featured Books
Categories
Share

एकतरफा प्यार है ये - भाग 11

सुबह की हल्की धूप कमरे की खिडकी से अंदर आ रही थी. पर्दों के बीच से आती रोशनी राहुल के चेहरे पर पड रही थी. उसने धीरे- धीरे आँखें खोलीं और कुछ देर तक चुपचाप छत को देखता रहा.

कुछ ही दिन पहले तक उसकी जिंदगी में कुछ भी तय नहीं था.

न कोई घर था, न कोई अपना ठिकाना और न ही भविष्य को लेकर कोई उम्मीद.

लेकिन आज उसके पास रहने के लिए एक कमरा था. खाने के लिए खाना था और सबसे बडी बात—अंजलि उसके साथ खडी थी.

राहुल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन अगले ही पल वह मुस्कान गायब हो गई.

उसे एक बात परेशान कर रही थी.

वह कब तक अंजलि पर निर्भर रहेगा?

उसने बिस्तर से उठकर कपडे बदले और कमरे से बाहर आ गया.

डाइनिंग टेबल पर अंजलि पहले से बैठी हुई थी. उसके हाथ में चाय का कप था और सामने कुछ कागज रखे थे.

राहुल को देखते ही अंजलि ने कहा—

उठ गए?

जी मैम।

नाश्ता कर लो।

राहुल कुर्सी पर बैठ गया, लेकिन उसकी नजर बार- बार सामने रखे कागजों पर जा रही थी.

अंजलि ने उसकी नजर देख ली.

क्या देख रहे हो?

कुछ नहीं मैम।

कुछ तो है।

राहुल कुछ पल चुप रहा.

फिर उसने धीमी आवाज में कहा—

मैम. मुझे आपसे एक बात कहनी थी।

अंजलि ने चाय का कप टेबल पर रखा.

बोलो।

राहुल ने गहरी सांस ली.

मैं नौकरी करना चाहता हूँ।

अंजलि कुछ सेकंड तक उसे देखती रही.

फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.

मैं भी यही चाहती थी।

राहुल थोडा हैरान हुआ.

आप भी?

हाँ।

लेकिन आपने मुझसे कभी कहा नहीं।

क्योंकि पहले तुम्हें थोडा संभलने की जरूरत थी. जिंदगी में अचानक इतना कुछ हो जाए तो इंसान को खुद को समझने का समय चाहिए।

राहुल चुपचाप उसकी बात सुनता रहा.

अंजलि ने आगे कहा—

लेकिन अब वक्त है कि तुम अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करो।

राहुल की नजर नीचे झुक गई.

मैं भी यही चाहता हूँ मैम. मैं हमेशा किसी के भरोसे नहीं रहना चाहता।

अंजलि ने गंभीर होकर कहा—

यही बात तुम्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

लेकिन मुझे नौकरी मिलेगी कहाँ?

अंजलि ने सामने रखे कागजों में से एक फाइल उठाई.

काम की चिंता तुम मत करो।

राहुल ने हैरानी से पूछा—

क्यों?

मैंने तुम्हारे लिए एक जगह बात की है।

राहुल की आँखें बडी हो गईं.

मेरे लिए?

हाँ।

लेकिन आपने कब?

कल।

राहुल कुछ पल तक कुछ बोल ही नहीं पाया.

अंजलि ने कहा—

मेरी जान- पहचान की एक कंपनी है. वहाँ अभी कुछ स्टाफ की जरूरत है. मैंने तुम्हारे बारे में बात की है. इंटरव्यू आज है।

आज?

हाँ।

राहुल घबरा गया.

लेकिन मैम, मुझे तो ठीक से पता भी नहीं कि वहाँ क्या काम है।

काम तुम्हें समझा दिया जाएगा. पहले खुद पर भरोसा रखना सीखो।

अगर मैं इंटरव्यू में फेल हो गया तो?

अंजलि मुस्कुराई.

तो क्या हो जाएगा?

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

नौकरी नहीं मिलेगी।

तो दूसरी जगह कोशिश करेंगे।

और वहाँ भी नहीं मिली तो?

फिर तीसरी जगह।

राहुल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.

अंजलि ने कहा—

हार तब होती है जब इंसान कोशिश करना छोड देता है।

राहुल ने सिर हिलाया.

जी।

और एक बात।

जी मैम?

आज अपने बारे में झूठ मत बोलना।

मैं नहीं बोलूँगा।

अपनी परेशानी को कमजोरी बनाकर मत दिखाना. तुमने बहुत कुछ देखा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तुम कमजोर हो।

राहुल ने पहली बार महसूस किया कि अंजलि सिर्फ उसे नौकरी नहीं दिला रही थी.

वह उसके अंदर आत्मविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही थी.

कुछ देर बाद दोनों कंपनी के लिए निकल गए.

शहर की सडकों पर भीड थी. गाडियाँ लगातार गुजर रही थीं. राहुल खिडकी से बाहर देख रहा था.

अंजलि ने उसकी तरफ देखा.

इतना चुप क्यों हो?

सोच रहा हूँ।

क्या?

पता नहीं. मेरी जिंदगी में पहली बार लग रहा है कि शायद सब ठीक हो सकता है।

अंजलि ने सडक की तरफ देखते हुए कहा—

सब ठीक होगा।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

आपको इतना भरोसा कैसे है?

क्योंकि तुम खुद ठीक करना चाहते हो।

कुछ देर बाद गाडी एक बडी- सी इमारत के सामने जाकर रुकी.

राहुल ने ऊपर देखा.

कंपनी की इमारत उसके लिए किसी दूसरी दुनिया जैसी लग रही थी.

उसके कदम अचानक रुक गए.

अंजलि ने गाडी से उतरते हुए पूछा—

क्या हुआ?

कुछ नहीं।

डर लग रहा है?

राहुल ने सच बोल दिया.

हाँ।

अंजलि उसके पास आई.

डर लगना गलत नहीं है।

लेकिन अगर मैं असफल हो गया?

तो सीखोगे।

और अगर सबके सामने बेइज्जती हो गई?

अंजलि ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

राहुल, लोगों की बातें सुनकर अगर जिंदगी चलती तो कोई आगे नहीं बढता।

राहुल ने गहरी सांस ली.

ठीक है।

चलो।

दोनों अंदर चले गए.

रिसेप्शन पर अंजलि ने राहुल का नाम बताया. कुछ औपचारिकताओं के बाद उसे इंटरव्यू Room में भेज दिया गया.

अंजलि बाहर बैठकर इंतजार करने लगी.

अंदर राहुल सामने बैठे अधिकारी के सामने था.

नाम?

राहुल।

शिक्षा?

राहुल ने अपनी पढाई के बारे में बताया.

पहले कहाँ काम किया है?

राहुल कुछ पल रुका.

उसके जीवन में ऐसा कोई लंबा अनुभव नहीं था जिसे वह गर्व से बता सके.

उसने सच कहा—

मेरे पास ज्यादा अनुभव नहीं है।

अधिकारी ने पूछा—

फिर हम आपको नौकरी क्यों दें?

राहुल कुछ सेकंड चुप रहा.

उसने सामने रखी टेबल की तरफ देखा और फिर अधिकारी की आँखों में देखकर बोला—

क्योंकि मुझे इस नौकरी की जरूरत है. लेकिन सिर्फ जरूरत होने की वजह से नहीं. मैं काम सीखना चाहता हूँ. मेहनत करने से पीछे नहीं हटूँगा. अगर मुझे मौका मिला तो मैं खुद को साबित करने की पूरी कोशिश करूँगा।

अधिकारी शांत रहे.

उन्होंने अगला सवाल किया—

अगर आपको यहाँ कोई आपसे कम उम्र का व्यक्ति काम समझाए तो?

मैं उससे सीखूँगा।

अगर आपका बॉस आपको डाँट दे?

गलती होगी तो सुधारूँगा।

अगर काम मुश्किल हुआ?

तो सीखने में ज्यादा समय लगेगा, लेकिन छोडूँगा नहीं।

अधिकारी की नजर कुछ देर तक राहुल के चेहरे पर रही.

फिर उन्होंने फाइल बंद कर दी.

आप कल से काम शुरू कर सकते हैं।

राहुल को लगा जैसे उसने ठीक से सुना ही नहीं.

जी?

आपकी नौकरी लग गई है।

राहुल की आँखों में अचानक चमक आ गई.

सच में?

हाँ।

धन्यवाद सर।

समय पर आना. मेहनत करना. बाकी सब सीख जाओगे।

राहुल बाहर आया.

अंजलि तुरंत उठ खडी हुई.

क्या हुआ?

राहुल कुछ नहीं बोला.

बस मुस्कुराता रहा.

अंजलि समझ गई.

नौकरी मिल गई?

राहुल ने सिर हिलाया.

जी मैम।

अंजलि के चेहरे पर खुशी आ गई.

बधाई हो।

राहुल ने हाथ जोड दिए.

थैंक You मैम।

मुझे नहीं, खुद को धन्यवाद दो।

लेकिन अगर आप मेरे लिए बात नहीं करतीं तो.

मैंने सिर्फ दरवाजा खोला है राहुल. अंदर जाना तुम्हारा काम था।

राहुल की आँखें थोडी नम हो गईं.

आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है।

बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए।

फिर भी.

अंजलि ने उसकी बात रोक दी.

बस अपना काम ईमानदारी से करना. यही काफी है।

दोनों वापस घर की तरफ चल पडे.

रास्ते में राहुल असामान्य रूप से खुश था.

वह बार- बार अपनी जेब में रखा नियुक्ति पत्र निकालकर देख रहा था.

अंजलि ने मुस्कुराकर पूछा—

कितनी बार देखोगे?

पता नहीं।

पहली नौकरी है, इसलिए?

हाँ।

कुछ पल बाद राहुल ने कहा—

मैम, मैं अपनी पहली सैलरी से आपके लिए कुछ खरीदना चाहता हूँ।

अंजलि ने तुरंत कहा—

बिल्कुल नहीं।

क्यों?

क्योंकि तुम्हारी पहली सैलरी तुम्हारी होगी. उससे अपनी जरूरत की चीज खरीदना।

लेकिन मैं.

राहुल।

जी?

मुझे तुम्हारी सैलरी नहीं चाहिए।

राहुल चुप हो गया.

गाडी आगे बढती रही.

लेकिन उसके मन में अब एक और सवाल पैदा हो चुका था.

अंजलि उसके लिए इतना कुछ क्यों कर रही थी?

वह उसे सिर्फ एक इंसान समझकर मदद कर रही थी या उसके पीछे कोई और वजह थी?

उधर अंजलि भी खिडकी से बाहर देख रही थी.

उसके मन में भी कुछ सवाल थे.

राहुल की चिंता उसे बाकी लोगों से अलग क्यों लगती थी?

उसकी खुशी देखकर उसे इतनी खुशी क्यों होती थी?

और सबसे बडा सवाल—

राहुल उसके घर में आया तो आखिर उसकी जिंदगी में ऐसा क्या बदल गया था?

दोनों के पास सवाल थे.

लेकिन जवाब.

अभी किसी के पास नहीं था.