राहुल की जिंदगी धीरे- धीरे पटरी पर लौट रही थी.
ऑफिस में उसे काम करते हुए कुछ समय हो चुका था और अब लोग उसे पहले की नजर से नहीं देखते थे.
उसकी मेहनत ने उसे एक अलग पहचान दिलानी शुरू कर दी थी.
लेकिन राहुल के बारे में अभी भी एक बात ऐसी थी, जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं था.
खुद राहुल भी उस प्रतिभा को कोई खास महत्व नहीं देता था.
उस दिन ऑफिस में सुबह से ही काफी भागदौड थी.
अंजलि एक जरूरी Meeting की तैयारी कर रही थी. मैनेजर भी लगातार फाइलें देख रहे थे. कुछ ही देर में एक बडा क्लाइंट ऑफिस आने वाला था.
अचानक Presentation से जुडी एक समस्या सामने आ गई.
कंप्यूटर पर बनी पूरी Presentation खुल नहीं रही थी.
ये क्या हो गया? मैनेजर ने परेशान होकर कहा.
आईटी टीम को फोन किया गया, लेकिन वे उस समय दूसरी बिल्डिंग में थे.
समय तेजी से निकल रहा था.
अंजलि ने घडी देखी.
क्लाइंट बस आने वाला है।
पूरे ऑफिस में तनाव फैल गया.
तभी राहुल अपनी सीट से उठा.
सर, अगर आप कहें तो मैं देख सकता हूँ।
मैनेजर ने उसकी तरफ देखा.
तुम?
जी सर।
तुम्हें इसका अनुभव है?
राहुल ने कुछ पल सोचा.
थोडा- बहुत।
मैनेजर ने मजबूरी में लैपटॉप उसकी तरफ बढा दिया.
राहुल ने स्क्रीन पर नजर डाली.
उसने फाइल खोली.
फिर कुछ सेटिंग्स Check कीं.
कुछ मिनट तक वह चुपचाप काम करता रहा.
अंजलि दूर खडी उसे देख रही थी.
राहुल की उंगलियाँ कीबोर्ड पर तेजी से चल रही थीं.
कुछ ही देर बाद स्क्रीन पर Presentation खुल गई.
हो गया सर।
मैनेजर ने हैरानी से पूछा,
इतनी जल्दी?
राहुल ने सिर हिलाया.
जी।
मैनेजर ने फाइल Check की.
सब कुछ सही था.
तुमने सीखा कहाँ से?
राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
बस. खुद से।
अंजलि ने पहली बार उसे गौर से देखा.
उसे आश्चर्य हो रहा था.
राहुल, तुम्हें कंप्यूटर और टेक्निकल काम भी आता है?
राहुल ने कंधे उचकाए.
थोडा बहुत।
थोडा बहुत?
अंजलि मुस्कुरा दी.
अभी तो तुमने पूरा सिस्टम बचा लिया।
राहुल कुछ नहीं बोला.
Meeting सफलतापूर्वक खत्म हो गई.
क्लाइंट के जाने के बाद मैनेजर ने राहुल को अपने केबिन में बुलाया.
राहुल, एक बात बताओ।
जी सर?
तुमने ये सब सीखा कहाँ से?
राहुल कुछ देर चुप रहा.
फिर बोला,
जब मेरे पास करने के लिए कुछ नहीं होता था, तब मैं कंप्यूटर पर चीजें सीखता था।
किसने सिखाया?
किसी ने नहीं।
फिर?
जो समझ नहीं आता था, उसे बार- बार करके देखता था।
मैनेजर उसकी बात सुनकर प्रभावित हुए.
तुम्हारे अंदर सीखने की अच्छी क्षमता है।
राहुल ने सिर झुका लिया.
धन्यवाद सर।
मैनेजर ने कहा,
मैं चाहता हूँ कि आगे से ऑफिस के कुछ टेक्निकल कामों में तुम भी शामिल रहो।
जी सर।
राहुल के बाहर निकलते ही अंजलि सामने खडी थी.
तो ये राज है?
राहुल थोडा हैरान हुआ.
कौन सा राज?
तुम्हें कंप्यूटर और टेक्निकल काम इतनी अच्छी तरह आते हैं और तुमने मुझे कभी बताया तक नहीं?
राहुल मुस्कुरा दिया.
आपने कभी पूछा नहीं।
अंजलि ने भौंहें चढाईं.
बहुत चालाक हो गए हो।
नहीं मैम।
अच्छा? फिर इतना कुछ कैसे आता है?
राहुल ने थोडा गंभीर होकर कहा,
मैम, जब इंसान के पास बहुत कुछ खोने के बाद सिर्फ समय बचता है ना. तो वह उस समय को किसी न किसी चीज में लगा देता है।
अंजलि चुप हो गई.
उसने राहुल के चेहरे को देखा.
उसकी बात में दर्द था.
लेकिन वह दर्द दिखाना नहीं चाहता था.
उसी शाम ऑफिस में एक और अजीब घटना हुई.
एक कर्मचारी अपनी महत्वपूर्ण एक्सेल फाइल को लेकर परेशान था.
कई घंटे की मेहनत के बाद फाइल अचानक खराब हो गई थी.
वह लगभग घबरा गया.
मेरी पूरी फाइल चली गई!
आसपास के लोग उसे समझाने लगे.
राहुल ने उसकी स्क्रीन देखी.
एक मिनट।
उसने कंप्यूटर अपने सामने लिया.
कुछ कमांड चलाए.
फाइल के पुराने वर्जन खोजे.
करीब दस मिनट बाद उसने कहा,
आपकी फाइल मिल गई।
कर्मचारी की आँखें फैल गईं.
क्या?
राहुल ने फाइल खोल दी.
सारा डेटा वापस आ गया था.
भाई, तुमने ये कैसे किया?
राहुल मुस्कुराया.
बस थोडा ध्यान से देखना पडता है।
अब ऑफिस में राहुल को देखने का नजरिया फिर बदल गया.
लेकिन इस बार सिर्फ उसकी मेहनत की वजह से नहीं.
लोगों को एहसास होने लगा था कि राहुल के अंदर कई ऐसी खूबियाँ छिपी हैं, जिनके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी.
अंजलि अपने केबिन में बैठी राहुल के बारे में सोच रही थी.
उसने राहुल को पहली बार देखा था तो उसे लगा था कि यह लडका सिर्फ एक मुश्किल जिंदगी से निकलकर आया है.
लेकिन अब उसे समझ आ रहा था कि राहुल की कहानी उससे कहीं ज्यादा बडी है.
वह मेहनती था.
शांत था.
मुश्किल हालात में घबराता नहीं था.
नई चीजें बहुत तेजी से सीखता था.
और सबसे अजीब बात—
वह अपनी किसी भी प्रतिभा का दिखावा नहीं करता था.
अंजलि के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.
ये लडका आखिर है कौन?
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.
राहुल अंदर आया.
मैम, ये फाइल।
अंजलि ने फाइल ली.
फिर उसे देखते हुए पूछा,
राहुल, तुम्हारे अंदर और कितनी प्रतिभाएँ छिपी हैं?
राहुल हँस पडा.
मुझे खुद नहीं पता।
सच?
जी।
तो पता लगाना पडेगा।
राहुल ने उसे देखा.
क्यों?
अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा,
क्योंकि मुझे लगता है कि तुम जितना खुद को समझते हो, उससे कहीं ज्यादा कर सकते हो।
राहुल कुछ पल चुप रहा.
फिर बोला,
शायद आपने ही मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया है।
अंजलि का चेहरा अचानक गंभीर हो गया.
उसने धीरे से कहा,
और तुमने मुझे ये सिखाया है कि किसी इंसान को देखकर उसके बारे में फैसला नहीं करना चाहिए।
दोनों कुछ पल एक- दूसरे को देखते रहे.
फिर राहुल फाइल देकर बाहर चला गया.
अंजलि की नजर दरवाजे पर टिकी रही.
उसके मन में फिर वही एहसास जागा.
वह राहुल की जिंदगी को समझना चाहती थी.
उसके अतीत को जानना चाहती थी.
उसकी छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना चाहती थी.
और शायद.
उसके दिल में राहुल के लिए जो लगाव बढ रहा था, उसका कारण भी अब धीरे- धीरे साफ होने लगा था.
राहुल सिर्फ अपनी जिंदगी बदल नहीं रहा था.
वह अंजलि की जिंदगी में भी एक ऐसी जगह बना रहा था, जहाँ से उसे हटाना अब आसान नहीं था.
लेकिन राहुल की इस अजीब प्रतिभा का असली इस्तेमाल अभी बाकी था.
क्योंकि आने वाले दिनों में यही हुनर उसे एक ऐसी मुसीबत से बचाने वाला था, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.