This is one-sided love - Part 18 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 18

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 18

कंपनी के बडे project की सफलता के बाद ऑफिस का माहौल बदल चुका था.

राहुल अब पहले वाला नया कर्मचारी नहीं रहा था.

उसके काम की चर्चा मैनेजमेंट तक पहुँच चुकी थी और कई बडे अधिकारी उसके काम से प्रभावित थे.

लेकिन हर किसी को राहुल की बढती पहचान पसंद नहीं थी.

ऑफिस में एक ऐसा व्यक्ति भी था, जिसे राहुल की सफलता बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही थी.

उसका नाम था विक्रम.

विक्रम पिछले आठ साल से कंपनी में काम कर रहा था.

कंपनी के लगभग हर बडे project में उसका हाथ रहा था.

वह अनुभवी था, तेज दिमाग वाला था और ऑफिस में उसकी अच्छी पकड थी.

उसे पूरा भरोसा था कि कंपनी में उससे बेहतर कोई नहीं.

लेकिन राहुल के आने के बाद पहली बार किसी ने उसकी जगह को चुनौती दी थी.

और यह बात विक्रम को अंदर से परेशान कर रही थी.

एक सुबह विक्रम राहुल की सीट के पास आकर रुक गया.

तो तुम ही हो राहुल?

राहुल ने कंप्यूटर से नजर हटाई.

जी।

विक्रम ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

सुना है बडे project में बहुत अच्छा काम किया है तुमने।

जी, पूरी टीम ने किया था।

विक्रम ने उसकी तरफ ध्यान से देखा.

अच्छी बात है. लेकिन एक बात याद रखना.

राहुल चुप रहा.

एक project की कामयाबी से कोई बडा खिलाडी नहीं बन जाता।

राहुल ने शांत आवाज में कहा,

जी, मैं भी ऐसा नहीं सोचता।

विक्रम कुछ पल उसे देखता रहा.

उसे उम्मीद थी कि राहुल पलटकर जवाब देगा.

लेकिन राहुल की शांति ने उसे और परेशान कर दिया.

वह बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया.

दूर खडी अंजलि ने पूरी बातचीत देख ली थी.

वह राहुल के पास आई.

विक्रम से संभलकर रहना।

राहुल ने पूछा,

क्यों मैम?

वह कंपनी का बहुत पुराना कर्मचारी है. उसे अपनी जगह और अपने अनुभव पर बहुत गर्व है।

राहुल ने मुस्कुराकर कहा,

मुझे किसी से मुकाबला नहीं करना है।

अंजलि ने गंभीर होकर कहा,

लेकिन कभी- कभी लोग खुद मुकाबला शुरू कर देते हैं।

राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया.

कुछ दिनों बाद कंपनी को एक नया महत्वपूर्ण काम मिला.

मैनेजमेंट ने फैसला किया कि इस बार project को दो टीमों में बाँटा जाएगा.

एक टीम का नेतृत्व विक्रम करेगा.

दूसरी टीम की जिम्मेदारी राहुल को दी गई.

यह सुनते ही ऑफिस में हलचल मच गई.

विक्रम के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दिया.

राहुल टीम लीड करेगा?

मैनेजर ने कहा,

हाँ।

विक्रम ने कुछ नहीं कहा.

लेकिन उसके चेहरे से साफ था कि उसे यह फैसला पसंद नहीं आया.

Meeting खत्म होने के बाद उसने राहुल से कहा,

अब असली काम शुरू होगा।

राहुल ने पूछा,

मतलब?

बडे project में किसका अनुभव ज्यादा काम आता है, ये जल्द पता चल जाएगा।

राहुल ने शांत होकर कहा,

मैं पूरी कोशिश करूँगा।

विक्रम हँसा.

कोशिश और अनुभव में बहुत फर्क होता है।

राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया.

project शुरू हुआ.

दोनों टीमों को एक ही लक्ष्य दिया गया था.

कम समय में बेहतर परिणाम.

विक्रम अपनी टीम को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास में था.

उसने कई सालों के अनुभव के आधार पर योजना बनाई.

राहुल ने अपनी टीम के साथ बैठकर पहले हर सदस्य की क्षमता समझी.

फिर काम बाँटा.

जिसे जो काम सबसे अच्छी तरह आता है, वही करेगा।

एक कर्मचारी ने पूछा,

अगर समय कम पड गया तो?

राहुल ने कहा,

हम समय से पहले पूरा करने की कोशिश करेंगे।

उसकी टीम में उत्साह था.

लेकिन विक्रम की टीम में राहुल को लेकर चर्चा होने लगी.

देखते हैं नया लडका कितना टिकता है।

project के बीच में एक बडी समस्या आ गई.

क्लाइंट ने अचानक कुछ बदलाव माँग दिए.

विक्रम की टीम की पूरी योजना बिगड गई.

उसके कई घंटे के काम को दोबारा करना पडने वाला था.

विक्रम गुस्से में था.

ये बदलाव पहले क्यों नहीं बताया गया?

उसकी टीम के लोग परेशान हो गए.

दूसरी तरफ राहुल ने क्लाइंट की नई जरूरतों को ध्यान से समझा.

उसने अपनी टीम से कहा,

घबराने की जरूरत नहीं है. जो हिस्सा बदलना है, पहले उसे अलग करो. बाकी काम मत रोको।

टीम ने उसी हिसाब से काम शुरू किया.

राहुल ने कुछ तकनीकी बदलाव किए और काम आगे बढता रहा.

अंजलि दूर से दोनों टीमों की प्रगति देख रही थी.

उसे धीरे- धीरे समझ आने लगा कि राहुल की सबसे बडी ताकत उसका शांत रहना था.

मुश्किल आते ही वह घबराता नहीं था.

वह समस्या को छोटे हिस्सों में बाँटकर हल करता था.

तीन दिन बाद दोनों टीमों की प्रगति की समीक्षा हुई.

मैनेजर ने रिपोर्ट देखी.

विक्रम की टीम अच्छी स्थिति में थी.

लेकिन राहुल की टीम उससे आगे निकल चुकी थी.

विक्रम ने रिपोर्ट देखकर भौंहें सिकोड लीं.

ये कैसे हुआ?

मैनेजर ने कहा,

राहुल की टीम ने कुछ काम पहले ही पूरा कर लिया है।

विक्रम ने राहुल की तरफ देखा.

तुमने ये तरीका कहाँ से सीखा?

राहुल ने कहा,

कहीं से नहीं. बस काम को आसान हिस्सों में बाँट दिया।

विक्रम कुछ नहीं बोला.

लेकिन असली मुकाबला अभी बाकी था.

अंतिम प्रस्तुति से एक रात पहले राहुल की टीम की मुख्य फाइल अचानक खुलनी बंद हो गई.

पूरे project का महत्वपूर्ण डेटा उसी फाइल में था.

टीम घबरा गई.

सर, अगर ये फाइल नहीं खुली तो हमारा पूरा काम चला जाएगा।

राहुल ने कंप्यूटर अपने सामने लिया.

वह लगभग एक घंटे तक कोशिश करता रहा.

लेकिन समस्या गंभीर थी.

विक्रम को जब इसकी खबर मिली तो वह राहुल के पास आया.

क्या हुआ?

राहुल ने कहा,

फाइल खराब हो गई है।

विक्रम ने कहा,

अब समझ आया कि अनुभव क्यों जरूरी होता है।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

विक्रम के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी.

लेकिन राहुल ने कोई बहस नहीं की.

वह दोबारा कंप्यूटर पर बैठ गया.

उसने पुराने बैकअप खोजे.

एक- एक फाइल Check की.

करीब दो घंटे बाद अचानक उसकी आँखों में चमक आई.

मिल गया!

टीम के सभी लोग उसके पास आ गए.

पुराना बैकअप मिल चुका था.

डेटा सुरक्षित था.

लेकिन राहुल ने सिर्फ बैकअप से काम चलाने के बजाय पूरी फाइल को दोबारा व्यवस्थित कर दिया.

सुबह तक काम तैयार था.

अगले दिन अंतिम प्रस्तुति हुई.

विक्रम की टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया.

लेकिन राहुल की टीम ने क्लाइंट की नई जरूरतों को ज्यादा बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया.

क्लाइंट ने आखिर में कहा,

राहुल की टीम ने हमारी अपेक्षा से बेहतर काम किया है।

कमरे में तालियाँ बजने लगीं.

मैनेजर ने राहुल की तरफ देखकर कहा,

बहुत बढिया।

राहुल ने अपनी टीम की तरफ देखा.

ये सबकी मेहनत है।

विक्रम चुपचाप खडा था.

उसके चेहरे पर हार की निराशा थी.

लेकिन तभी वह राहुल के पास आया.

कुछ पल तक दोनों आमने- सामने खडे रहे.

फिर विक्रम ने हाथ आगे बढाया.

अच्छा काम किया।

राहुल ने उसका हाथ पकड लिया.

धन्यवाद।

विक्रम ने धीमी आवाज में कहा,

तुममें कुछ तो है।

राहुल मुस्कुराया.

आपसे बहुत कुछ सीखना बाकी है।

विक्रम ने उसकी तरफ देखा.

पहली बार उसके चेहरे पर अहंकार की जगह सम्मान दिखाई दिया.

लेकिन जाते- जाते उसने कहा—

बस एक बात.

जी?

अब से मैं तुम्हें सिर्फ नया लडका नहीं समझूँगा।

राहुल हल्का सा मुस्कुराया.

और मैं आपको अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं, अपना सीनियर समझूँगा।

दोनों की बातचीत दूर से अंजलि सुन रही थी.

उसके चेहरे पर गर्व था.

उसे राहुल की एक और खूबी दिखाई दी थी—

राहुल जीतकर भी किसी को छोटा नहीं करता था.

वह जानती थी कि राहुल की असली लडाई विक्रम से नहीं थी.

उसकी लडाई खुद को उस जिंदगी से बाहर निकालने की थी, जिसमें वह कभी हार चुका था.

और आज.

वह हर दिन उस लडाई में जीत रहा था.

लेकिन राहुल को अभी पता नहीं था कि इस जीत के बाद कंपनी में उसके लिए एक ऐसा प्रस्ताव आने वाला था, जो उसके करियर को एक बिल्कुल नई दिशा देने वाला था.