रात के करीब साढे दस बज रहे थे.
शहर की सडकें धीरे- धीरे खाली हो रही थीं.
ऑफिस की ऊँची इमारत की लगभग सारी लाइटें बंद हो चुकी थीं.
लेकिन सबसे ऊपर वाली मंजिल के एक कमरे में अभी भी रोशनी जल रही थी.
कमरे में एक आदमी अकेला बैठा था.
उसके सामने लैपटॉप खुला था.
स्क्रीन पर कंपनी की कई रिपोर्टें थीं.
एक फाइल में राहुल का नाम भी था.
उस आदमी ने राहुल की तस्वीर को कुछ देर तक देखा.
फिर धीमे से बोला—
तो आखिर तुम यहाँ तक पहुँच ही गए.
उसका चेहरा अंधेरे में छिपा हुआ था.
सिर्फ उसकी आँखें दिखाई दे रही थीं.
उसने फोन उठाया.
किसी नंबर पर Call किया.
वह कंपनी में काम कर रहा है।
दूसरी तरफ से सवाल पूछा गया.
वह कुछ पल चुप रहा.
फिर बोला—
हाँ. और अब उसकी पहचान बनने लगी है।
दूसरी तरफ से फिर कुछ कहा गया.
उस आदमी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई.
अभी उसे कुछ मत बताना।
Call cut गई.
उसने अपने सामने रखी एक पुरानी फाइल खोली.
फाइल के ऊपर सिर्फ एक अक्षर लिखा था—
R
उसकी उंगलियाँ उस अक्षर पर कुछ देर रुकी रहीं.
फिर उसने फाइल बंद कर दी.
अगली सुबह राहुल हमेशा की तरह ऑफिस पहुँचा.
लेकिन आज कुछ अलग था.
जैसे ही वह अपनी सीट पर बैठा, उसे एक अनजान नंबर से मैसेज आया.
तुम्हें लगता है तुम अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुके हो?
राहुल ने मैसेज पढा.
वह कुछ पल स्क्रीन को देखता रहा.
फिर दूसरा मैसेज आया—
अतीत कभी पीछे नहीं छूटता।
राहुल के चेहरे का रंग बदल गया.
उसने तुरंत नंबर पर Call किया.
फोन बंद था.
राहुल कुछ समझ नहीं पा रहा था.
उसने मैसेज दोबारा पढे.
उसके मन में एक सवाल उठा—
कौन है ये?
उसी समय अंजलि उसके पास आई.
राहुल?
राहुल ने तुरंत फोन नीचे कर दिया.
जी मैम?
क्या हुआ? परेशान लग रहे हो।
कुछ नहीं।
अंजलि ने उसे ध्यान से देखा.
पक्का?
जी।
अंजलि वहाँ से चली गई, लेकिन उसे राहुल के चेहरे की चिंता साफ दिखाई दे रही थी.
दोपहर तक राहुल उस नंबर के बारे में सोचता रहा.
आखिर उसने तय किया कि वह किसी को कुछ नहीं बताएगा.
शायद किसी ने मजाक किया हो.
लेकिन शाम को वही नंबर फिर सक्रिय हुआ.
इस बार सिर्फ एक शब्द आया—
R”
राहुल की उंगलियाँ फोन पर जम गईं.
उसके दिमाग में पुराने दिनों की कुछ धुंधली यादें उभरने लगीं.
एक आवाज.
एक चेहरा.
एक घटना.
लेकिन कुछ भी साफ नहीं था.
उसे बस इतना याद था कि उसके अतीत में कोई ऐसा व्यक्ति था, जिसका नाम“ R” से शुरू होता था.
लेकिन वह कौन था?
राहुल ने सिर पकड लिया.
मुझे याद क्यों नहीं आ रहा?
उधर शहर के दूसरे हिस्से में वही रहस्यमयी आदमी एक कैफे में बैठा था.
उसके सामने एक महिला बैठी थी.
महिला ने पूछा,
तुमने उसे मैसेज क्यों किया?
आदमी ने कॉफी का कप टेबल पर रखा.
क्योंकि मुझे देखना था कि उसकी याददाश्त कितनी बची है।
अगर उसे सब याद आ गया तो?
आदमी कुछ सेकंड चुप रहा.
फिर बोला—
तब बहुत कुछ बदल जाएगा।
महिला ने पूछा,
क्या तुम उसे सच बताओगे?
उस आदमी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
सच?
उसने सिर हिलाया.
अभी नहीं।
क्यों?
क्योंकि राहुल को अभी अपनी नई जिंदगी जीने दो।
महिला ने हैरानी से पूछा,
और अगर वह उस जिंदगी में बहुत आगे निकल गया तो?
आदमी ने खिडकी के बाहर देखा.
तो उसे वापस नीचे लाने के लिए मुझे और मेहनत करनी पडेगी।
उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी.
उसी शाम राहुल ऑफिस से बाहर निकला.
वह लगातार सोच रहा था कि“ R” कौन हो सकता है.
तभी उसकी नजर सडक के दूसरी तरफ खडी एक काली कार पर पडी.
कार के शीशे काले थे.
राहुल ने कुछ देर कार को देखा.
उसे लगा जैसे अंदर बैठा कोई व्यक्ति उसे देख रहा है.
अचानक कार आगे बढी और कुछ ही सेकंड में भीड में गायब हो गई.
राहुल के मन में बेचैनी बढ गई.
वह घर पहुँचा.
कमरे में अकेला बैठा था.
उसने पुराना बैग खोला.
उसमें कुछ पुराने कागज थे.
एक पुरानी तस्वीर भी थी.
राहुल ने तस्वीर हाथ में ली.
उस तस्वीर में वह खुद था.
लेकिन उसके साथ खडा दूसरा व्यक्ति तस्वीर से काट दिया गया था.
राहुल हैरान रह गया.
तस्वीर के पीछे कुछ लिखा था.
उसने पलटकर देखा.
सिर्फ एक अक्षर था—
R
राहुल के हाथ काँपने लगे.
ये. यहाँ भी?
उसके दिमाग में जैसे कोई बंद दरवाजा खुलने लगा.
उसे एक आवाज याद आई—
राहुल, अगर कभी मैं तुमसे दूर हो जाऊँ. तो मुझ पर भरोसा मत करना।
राहुल ने आँखें बंद कर लीं.
ये किसने कहा था?
लेकिन जवाब नहीं मिला.
अगली सुबह ऑफिस में राहुल सामान्य दिखने की कोशिश कर रहा था.
अंजलि ने फिर उसे परेशान देखा.
राहुल, तुम कुछ छिपा रहे हो?
राहुल ने उसकी तरफ देखा.
कुछ पल तक वह चुप रहा.
फिर बोला,
मैम. क्या आपको लगता है कि इंसान अपने अतीत से पूरी तरह बच सकता है?
अंजलि ने गंभीर होकर कहा,
नहीं।
क्यों?
क्योंकि अतीत चाहे कितना भी पीछे छूट जाए, उसकी कोई न कोई परछाई हमारे साथ चलती रहती है।
राहुल ने धीमे से पूछा,
अगर वो परछाई वापस सामने आ जाए तो?
अंजलि ने कहा,
तो उसका सामना करना चाहिए।
राहुल ने अंजलि की आँखों में देखा.
उसे पहली बार लगा कि शायद वह अकेला नहीं है.
लेकिन तभी उसके फोन पर फिर मैसेज आया.
इस बार सिर्फ एक लाइन थी—
आज रात ग्यारह बजे पुराने पुल पर आओ. अकेले।
नीचे सिर्फ एक अक्षर लिखा था—
R
राहुल की धडकन तेज हो गई.
उसने फोन बंद कर दिया.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि जाना चाहिए या नहीं.
लेकिन उसके अंदर एक सवाल लगातार गूँज रहा था—
आखिर R है कौन?
रात के ग्यारह बजे शहर के पुराने पुल के पास एक काली कार आकर रुकी.
कार का दरवाजा खुला.
वही रहस्यमयी आदमी बाहर निकला.
उसने अपनी घडी देखी.
राहुल आएगा.
कुछ दूर सडक पर एक आदमी की परछाई दिखाई दी.
रहस्यमयी आदमी ने उसकी तरफ देखा.
लेकिन अगले ही पल वह परछाई रुक गई.
वह राहुल नहीं था.
आदमी की आँखों में पहली बार बेचैनी दिखाई दी.
तो फिर.
उसने चारों तरफ देखा.
अचानक पीछे से आवाज आई—
तुम राहुल को ढूँढ रहे हो?
रहस्यमयी आदमी पलटा.
उसका चेहरा पहली बार पूरी रोशनी में आया.
लेकिन वहाँ खडे व्यक्ति को देखते ही उसके चेहरे का रंग उड गया.
तुम.
सामने वाला मुस्कुराया.
बहुत साल हो गए, R।
रहस्यमयी आदमी पीछे हट गया.
अब कहानी में एक नया रहस्य पैदा हो चुका था—
क्या“ R” राहुल का दुश्मन है, पुराना दोस्त है या उसके अतीत का ऐसा राज है, जिसे राहुल खुद भूल चुका है?
और सबसे बडा सवाल.
जिस आदमी ने R को पहचान लिया था, वह आखिर कौन था?