instant millionaire -episode 2 in Hindi Love Stories by aakash kumar books and stories PDF | इंस्टेंट मिलियनेयर - 2

Featured Books
Categories
Share

इंस्टेंट मिलियनेयर - 2

आकाश के हाथ बुरी तरह कांप रहे थे। बारिश की ठंडी बूंदें स्क्रीन पर गिर रही थीं और वाइब्रेशन के साथ स्क्रीन पर चमक रहा नाम मानो उसे किसी दूसरी दुनिया में खींच रहा था—'पर्सनल सेक्रेटरी - मिस्टर सिंघानिया'।
​उसने लड़खड़ाती उंगलियों से कॉल रिसीव की और फोन कान से लगाया।
​"ह-हेलो?" आकाश की आवाज़ गले में ही अटक कर रह गई।
​दूसरी तरफ से एक बेहद भारी, सधी हुई और अदब से भरी आवाज़ आई, "प्रणाम, छोटे मालिक। मैं मिस्टर सिंघानिया बोल रहा हूँ... आपके दादाजी, स्वर्गीय सूर्यभान शाक्य का पर्सनल सेक्रेटरी और लीगल एडवाइज़र।"
​आकाश को अपनी ही धड़कनें कान के पर्दे फाड़ती हुई महसूस हुईं। "मालिक? दादाजी? आप... आप गलत नंबर पर कॉल कर रहे हैं। मैं एक अनाथ हूँ। मेरे आगे-पीछे कोई नहीं है।"
​फोन के उस पार हल्की सी मुस्कान का अहसास हुआ।
​"गलतफहमी स्वाभाविक है, आकाश सर," सिंघानिया ने कहा। "बाईस साल पहले आपके पिता ने परिवार के फैसलों के खिलाफ जाकर शादी की थी, जिसकी वजह से उन्हें बेदखल कर दिया गया। लेकिन आपके दादाजी ने अपनी वसीयत में साफ लिखा था कि उनके जाने के बाद उनकी पूरी जायदाद, 'शाक्य ग्लोबल कॉर्पोरेशन' और उनके स्विस बैंक खातों का इकलौता हकदार सिर्फ उनका पोता होगा... यानी आप।"
​आकाश पत्थर की तरह सुन्न खड़ा रहा।
​सिंघानिया ने आगे कहा, "आपके खाते में ट्रांसफर किए गए पाँच अरब रुपये सिर्फ एक छोटा सा पॉकेट अलाउंस है ताकि आप अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। मुख्य संपत्ति, प्राइवेट जेट, देश-विदेश के महल और कंपनियों के शेयर्स का मालिकाना हक अभी आपको सौंपना बाकी है।"
​"पाँच... अरब... सिर्फ पॉकेट मनी?" आकाश का दिमाग चकरा गया। जिस लड़के ने कल रात आधे पेट सोकर गुजारी थी, जिसके फटे बटुए में दस रुपये भीगे पड़े थे, उसके खाते में पाँच अरब रुपये सिर्फ 'खर्च' के लिए थे!
​"सर, आपकी सुरक्षा के लिए एक ब्लैक मर्सिडीज मेबैक ठीक आपके सामने वाली सड़क पर पहुँच चुकी है। मैं ड्राइवर के साथ वहीं मौजूद हूँ। बाहर मौसम खराब है, कृपया गाड़ी में तशरीफ़ लाइए।"
​आकाश ने चौंककर सड़क की तरफ देखा।
​घने अंधेरे और मूसलाधार बारिश के बीच, दूर से दो चमकदार हेडलाइट्स चमकीं। एक चमचमाती, बुलेटप्रूफ ब्लैक मर्सिडीज ठीक उस टूटी हुई टीन की छत के सामने आकर रुकी। गाड़ी का दरवाज़ा खुला और काले सूट-बूट में हाथ में एक बड़ा छाता लिए एक बुजुर्ग लेकिन प्रभावशाली शख्स बाहर निकला।
​वह सीधा आकाश की तरफ बढ़ा और पूरे सम्मान के साथ सर झुकाकर बोला, "स्वागत है छोटे मालिक। आपकी गरीबी के दिन अब खत्म हुए।"
​आकाश ने अपने फटे जूते और भीगे कपड़े देखे, फिर उस आलीशान गाड़ी को। उसके ज़हन में रिया के वो आखिरी कड़वे शब्द गूंज उठे—'तुम खुद को देखो और मुझे देखो... एक मामूली डिलीवरी बॉय!'
​और कॉलेज के रईसज़ादे विक्रम का वो घमंडी चेहरा।
​आकाश की आँखों में भरा पानी अब गुस्से की चिंगारी में बदल चुका था। उसने भीगा हुआ दस का नोट अपनी जेब में वापस ठूंसा और मन ही मन कहा, "विक्रम... रिया... तुमने सिर्फ गरीब आकाश को देखा था। अब तुम 'शाक्य साम्राज्य' के असली वारिस का सामना करोगे।"
​आकाश गाड़ी की पिछली सीट पर बैठ गया।
​गाड़ी जैसे ही स्टार्ट हुई, सिंघानिया ने पीछे मुड़कर एक प्रीमियम लेदर का फोल्डर आकाश के हाथों में दिया।
​"सर, यह इस शहर के सबसे महंगे 'द ग्रैंड पैलेस' होटल के मालिकाना हक के कागज़ात हैं। यह होटल अब आपका है।"
​आकाश ने चौंककर देखा। "द ग्रैंड पैलेस? पर आज रात तो वहीं—"
​"हाँ सर," सिंघानिया की आँखों में एक गहरी चमक आई, "आज रात उसी होटल के वीआईपी हॉल में विक्रम मल्होत्रा अपने पिता की कंपनी की एनिवर्सरी पार्टी दे रहा है... और मिस रिया भी वहीं मौजूद हैं।" 

आकाश ने मुट्ठी भींच ली और उसकी आँखें गुस्से से लाल हो गईं।

क्या वो उन्हीं फटे हुए कपड़ों में उस आलीशान पार्टी में जाएगा... या शाक्य साम्राज्य के असली वारिस के रूप में ऐसी ग्रैंड एंट्री लेगा कि विक्रम और रिया के होश ही उड़ जाएंगे?

जानने के लिए पढ़ते रहिए - एपिसोड 3