ध्रुव की तारा
भाग - २४
लेखिका "अनामिका"
कॉलेज पहुँचते ही ध्रुव सबसे पहले तारा को लेकर उसके हॉस्टल की तरफ़ बढ़ा। हाथ में भारी सूटकेस उठाए वह तारा को उसके कमरे के रास्ते तक छोड़ आया।
"चलो, अब ध्यान से अंदर जाओ और सारा सामान समेट लेना," ध्रुव ने मुस्कुराते हुए तारा का बैग उसके हाथ में दिया।
तारा ने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा, "हाँ, और तुम भी सीधे अपने हॉस्टल जाकर थोड़ा आराम कर लेना। फाइनल ईयर है, तो पढ़ाई अभी से बहुत ध्यान से करनी है... ऑल द बेस्ट ध्रुव!"
"तुम्हें भी सेकंड ईयर के लिए ऑल द बेस्ट, तारा। कोई भी ज़रूरत हो तो बस एक कॉल कर देना," कहते हुए ध्रुव ने एक आख़िरी बार तारा को देखा और हल्के से मुस्कुराकर अपने हॉस्टल की ओर मुड़ गया।
अगले ही दिन से दोनों अपनी-अपनी पढ़ाई में पूरी तरह जुट गए। तारा जानती थी कि फाइनल ईयर की वजह से ध्रुव पर प्रोजेक्ट्स, प्लेसमेंट्स और परीक्षाओं का कितना भारी दबाव है। इसलिए वह कभी उससे मिलने की बेवजह ज़िद नहीं करती थी।
उनकी मुलाकातें अब लंबी बातों के बजाय लाइब्रेरी के किसी कोने में साथ बैठकर पढ़ाई करने तक सीमित हो गई थीं, या फिर कभी-कभार मेस में एक साथ दोपहर का लंच कर लेना ही उनके दिन की सबसे ख़ूबसूरत याद बन जाता। जब भी ध्रुव थक जाता या परेशान दिखता, तारा अपनी समझदारी और प्यार भरी बातों से उसका हौसला बढ़ा देती। प्यार के इस नए अहसास ने उनकी पढ़ाई में रुकावट बनने के बजाय उन्हें एक-दूसरे का संबल बना दिया था।
हॉस्टल लौटे कुछ हफ़्ते बीत चुके थे और कैंपस में 'कैंपस प्लेसमेंट' की हलचल शुरू हो चुकी थी। पहली बड़ी कंपनी के इंटरव्यू और ग्रुप डिस्कशन (GD) के लिए माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ था। तारा खुद अंग्रेज़ी लिटरेचर की स्टूडेंट थी और उसकी भाषा पर बेहतरीन पकड़ थी, इसलिए वह ध्रुव और उसके दोस्तों की तैयारी में मदद कर रही थी।
लाइब्रेरी के बाहर लॉन में बैठी तारा ध्रुव, उसके हॉस्टल के दोस्तों और अपनी रूममेट्स को इंटरव्यू में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रोफेशनल इंग्लिश वर्ड्स, बॉडी लैंग्वेज और कॉन्फिडेंस से बात करने की टिप्स दे रही थी।
तभी ध्रुव के एक दोस्त का नाम अनाउंस हुआ। जाने से पहले बाकी दोस्त मुस्कुराते हुए ध्रुव को छेड़ने लगे, "अरे भाभी! आप अब सिर्फ़ भैया को ही ट्रेन करो, हम लोग चलते हैं!" यह कहकर वे सब हँसते हुए वहाँ से खिसक गए।
अब लॉन में सिर्फ़ ध्रुव और तारा अकेले रह गए थे। तारा तुरंत ध्रुव की टाई ठीक करते हुए हिदायतें देने लगी, "ध्रुव, ध्यान रखना... 'I think' की जगह 'I believe' बोलना, और अपनी बात रखते वक्त आई-कांटैक्ट बनाए रखना। तुमने वो टेक्निकल पॉइंट्स ठीक से याद किए ना? नर्वस मत होना बिल्कुल!"
ध्रुव ने उसे टकटकी लगाए देखा और मुस्कुराते हुए बोला, "तारा, तुम मेरा हौसला बढ़ा रही हो या मुझे और नर्वस कर रही हो?"
यह सुनते ही तारा का चेहरा उतर गया। वह घबराकर बोली, "अरे... सच में? क्या मैं तुम्हें परेशान कर रही हूँ? सॉरी ध्रुव, मैं तो बस..."
ध्रुव ने उसका हाथ थामकर हँसते हुए कहा, "अरे चश्मेश! ज़्यादा दिमाग मत चलाओ। तुम साथ हो तो मेरा कॉन्फिडेंस दोगुना हो जाता है।"
तभी माइक पर ध्रुव का नाम पुकारा गया। ध्रुव ने तारा को एक आश्वस्त करने वाली मुस्कान दी और गहरे आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू रूम की तरफ़ कदम बढ़ा दिए।
इंटरव्यू के कुछ दिनों बाद जब प्लेसमेंट का रिजल्ट घोषित हुआ, तो ध्रुव का चयन एक बहुत ही प्रतिष्ठित कंपनी में एक बेहतरीन पोस्ट पर हो गया था। यह खबर सुनते ही उसकी खुशी का ठिकाना न रहा और वह दौड़ता हुआ सीधा लाइब्रेरी की तरफ भागा।
उधर लाइब्रेरी में बैठी तारा किताब खोले हुए भी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रही थी, उसका दिल ध्रुव के रिजल्ट को लेकर लगातार धड़क रहा था। तभी ध्रुव ने दबे पाँव आकर पीछे से तारा को अपनी बाहों में भर लिया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, "तारा, मेरा सिलेक्शन हो गया!"
लाइब्रेरी का माहौल ध्यान में रखते हुए तारा ने अपनी चीख दबाई और नम आँखों से मुस्कुराते हुए उसे कसकर गले लगा लिया। ध्रुव ने प्यार से उसे थोड़ा सा ऊपर उठाया; दोनों की आँखों में इस बड़ी कामयाबी और एक-दूसरे के साथ की बेहिसाब खुशी साफ़ झलक रही थी।
फाइनल सेमेस्टर शुरू होते ही ध्रुव की इंटर्नशिप भी शुरू हो गई। दिन में कंपनी का काम, फिर कॉलेज की क्लासेस और शाम को प्रोजेक्ट्स... इस भागदौड़ को मैनेज करना हॉस्टल के समय-प्रतिबंधों के साथ मुश्किल हो रहा था। इसलिए ध्रुव ने कॉलेज और ऑफिस के बीच ही एक छोटा सा 1BHK फ्लैट किराए पर ले लिया ताकि आने-जाने का वक्त बच सके।
शिफ्टिंग वाले दिन तारा उसकी मदद के लिए सबसे पहले पहुँच गई। उसने ध्रुव के बिखरे हुए सामान को करीने से संभाला, कपड़ों को अलमारी में लगाया और फिर बड़े प्यार से घर के हर कोने को संवारा। बालकनी में छोटे-छोटे पौधे लगाने से लेकर ध्रुव की स्टडी टेबल पर उनकी साथ वाली तस्वीर सजाने तक, तारा ने उस साधारण से कमरे को एक प्यारे से 'घर' का रूप दे दिया।
काम खत्म करके ध्रुव ने कमरे को देखा तो उसकी आँखें खुशी और सुकून से भर आईं। उसने मुस्कुराते हुए तारा का हाथ थाम लिया और बोला, "तुम्हारे बिना यह जगह कभी इतनी खूबसूरत नहीं लगती, तारा।" तारा के चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान तैर गई—उसे लगा जैसे इस छोटे से घर में उनके आने वाले भविष्य की एक नई और सुंदर झलक बस गई हो।
महीने तेज़ी से गुज़रते गए और ध्रुव ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर न केवल अपनी इंटर्नशिप शानदार तरीक़े से पूरी की, बल्कि बेहतरीन अंकों के साथ अपनी ग्रेजुएशन भी कम्प्लीट कर ली। कन्वोकेशन के दिन ब्लैक गाउन और हैट पहने जब ध्रुव अपनी डिग्री हाथ में लिए मुस्कुरा रहा था, तो भीड़ में खड़ी तारा की आँखें गर्व और प्यार से छलक उठीं; ध्रुव का छात्र जीवन अब समाप्त हो चुका था और वे दोनों जानते थे कि यहाँ से उनकी ज़िंदगी और रिश्ते का एक नया, अनजाना अध्याय शुरू होने जा रहा थ।
चौबीसवाँ भाग समाप्त, कहानी जारी है....