आगे के भाग में दृष्टि और दिपक अपने परिणाम का बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि कब आएगा उनके परीक्षा का परिणाम।
आखिर कब उनके सब्र का अंत होने वाला ही है।
दो दिन बाद उनका परिणाम जाहिर होने वाला है। दोनों थोड़ा सा टेंशन और बहुत सारे आत्मविश्वास के साथ यही इच्छा में की कब उनकी जिंदगी में खुशियां आने ही वाली है पर आप सभी को पता है कि हमेशा खुशियां अकेली नहीं आती थोडी उलझन और परीक्षाएं भी लेके आती है।
उनके साथ भी बस यही होने वाला था। परिणाम तो आया पर सिर्फ दृष्टि पास हुईं। इस परिणाम पर दोनों को भरोसा नहीं हो रहा था कि ये कैसे हो सकता है क्योंकि दिपक तो कई सालों तैयारी कर रहा था। तो कैसे वो फैल हो सकता था।
दोनों ने ये सोचा कि एक उच्च विभाग में जाकर चेक करवाएंगे । तब तक ये फैसला लेना था कि दृष्टि को नौकरी करनी चाहिए या नहीं। भले ही दृष्टि ने जीवन में कुछ करने का सपना देखा था पर उसे वो दिपक के साथ पूरा होते हुए देखना था। दिपक एक ऐसा लड़का था जो हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने में सहाय करना चाहता था तो वो कैसे दृष्टि को आगे बढ़ने से रोक सकता था इसलिए दिपक ने उसे समझाया कि ये उसकी कामयाबी वो उसे नहीं छोड़
सकती। इतने समझाने पर वो मान तो गई पर वो अभी दुसरी बार परिणाम चेक करवाना चाहती पर उसके लिए एक महिने का वक्त लग सकता था इसलिए उसने नौकरी में जोइनिंग करने का सोचा और इसमें दिपक भी उसके साथ था ।
" हमेशा ऐसा इंसान ढूंढना चाहिए जो आपको आगे बढ़ाते ना कि बार बार आपको पीछे धकेले।"
अब तो वो वक्त आ ही गया जब घर में सब कुछ बताना ही था ।
अब दिपक के परिवार ने दृष्टि को बहु मान लिया था । उन्हें पहले तो दिक्कत थी पर लिपट के समझाने पर वो सब भी मान गए।
अब तो। दृष्टि के सारे सपने पूरे हो गए थे। बस उसे एक ही चिंता थी कि उसकी मां कैसी होगी । उसके बाप ने उसकी मां का क्या हाल किया होगा। दिपक को उसने ये सबकुछ बताया और उसके गांव गए । वो अंदर ही अंदर बहुत डरी हुई थी उसके आगे उसके बचपन का मंजर आ जाता है और वो बहुत गरम जाती है कि उसकी मां कैसी होगी।
उसके घर पहुंचने पर पता चलता है कि उसके पापा के बहुत शराब पीने की वजह से उनके सारे काम नहीं कर रहे और वो सरकारी अस्पताल में भर्ती है और उसकी मां मजदुरी करके अपना पेट पाल रही है कि काश कोई चमत्कार हो जाए और उसे उसकी बेटी वापस मिल जाए।
दृष्टि को अब तो उसकी मां भी मिल गई । अब दृष्टि और दिपक कजरी को अपने घर ले गए।
अब कुछ दिनों बाद दृष्टि का जोइनिंग भी था और दिपक के परिणाम की चेकिंग भी थी ।
दोनों बहुत चिंता में साथ ही एक आशा भी थी कि सब अच्छा ही होगा। दोनों परिणाम चैक कराने गए ।
री-चेकिंग कि प्रकिया शुरू हो चुकी थी। एक अधिकारी ने कहा कि आज री चेकिंग के परिणाम बाहर नहीं पड़ेंगे ।
कल जो भी होगा पता चल जाएगा। दूसरे दिन सब जगह अखबार टीवी सब जगह यही चर्चा थी कि एक युवक ने परीक्षा पुरे अंक पाकर सबसे उच्च पद हासिल किया है।
तब तो दृष्टि और दिपक की खुशी का ठीकाना ही न रहा जो इतने सालों से उन्होंने सपने देखे थे वो आज साक्षात उनकी आंखों के सामने पुरे हो रहे हैं।
आज दृष्टि और दिपक की छोटा-सा परिवार पुरा हो गया।
हर इंसान की जिंदगी मुसीबतें आती है पर उन मुसीबतो से भागने के बजाय उन्हें हल करने वो आसान हो जाती है।
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