CRAVE - Part - 10 in Hindi Thriller by Aarika Shadow books and stories PDF | CRAVE - Part - 10

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CRAVE - Part - 10

अगला दृश्य...

एक खूबसूरत रेस्टोरेंट...

बाहर से देखने पर वह जगह किसी सपने जैसी लग रही थी। ✨

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अपनी यादों और भावनाओं को सजाकर इसे बनाया हो।

आसमान के रंग जैसा हल्का नीला एहसास...

बादलों जैसी सफेद सजावट...

चारों तरफ छोटे-छोटे झरने और फूलों से सजा हुआ गार्डन।

ज्यादा भीड़ नहीं थी।

बस एक शांत माहौल था, जहाँ लोग मुस्कुराते हुए बातें कर रहे थे।

गार्डन के बीचों-बीच खाने के लिए खूबसूरत टेबल लगी हुई थीं।

हर तरफ आसमानी और गुलाबी रंग के फूलों से सजे गमले उस जगह को और भी खास बना रहे थे। 🌸

वेटर भी हल्के नीले और सफेद रंग के कपड़ों में थे।

सब कुछ इतना सुंदर था जैसे किसी महंगी पेंटिंग का हिस्सा हो।

जैसे ही समर की कार वहाँ आकर रुकी...

युई बाहर निकली।

और कुछ पल के लिए बस उस जगह को देखती रह गई।

उसके मन में आया—

"ये जगह कितनी खूबसूरत है..."

"बिल्कुल मेरे सपनों जैसी।" 💙

पीछे खड़ा समर चुपचाप उसे देख रहा था।

उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी।

तभी दूसरे दरवाजे से सिम्मी बाहर आई।

वह चारों तरफ देखकर हैरान रह गई।

"Oh my God!"

"यार... हम कहाँ आ गए?" 😳

समर पीछे से आते हुए बोला—

"रेस्टोरेंट में।"

सिम्मी ने उसे घूरकर देखा।

"वो तो मुझे भी दिख रहा है।"

"मैं जगह की बात कर रही हूँ।"

तभी युई की नजर रेस्टोरेंट के नाम पर पड़ी।

वह अचानक रुक गई।

नाम देखकर उसके चेहरे पर हल्का सा अजीब भाव आया।

"ये नाम..."

सिम्मी ने बोर्ड देखा और मुस्कुराई।

"हाँ, नाम भी बहुत अच्छा है।"

"रोज़ रेस्टोरेंट।"

युई कुछ पल चुप रही।

"हम्म..."

समर ने उसकी खामोशी महसूस कर ली।

इसलिए तुरंत बात बदलते हुए बोला—

"भाभी जी, चलिए अंदर चलते हैं।"

युई ने हल्की मुस्कान दी।

"ठीक है।"

---

दिल्ली...

एक अंधेरा कमरा।

जुशेंग एक बड़ी कुर्सी पर बैठा था।

उसके चेहरे पर गहरी सोच और खतरनाक शांति थी।

उसने सामने खड़े आदमी की तरफ देखा।

"बताओ..."

"ये किसने किया?"

सामने वाला डर के बावजूद चुप रहा।

"मैं नहीं बताऊंगा..."

"चाहे जो हो जाए।"

जुशेंग कुछ पल शांत रहा।

फिर अचानक हल्की हँसी हँसने लगा।

उसकी हँसी में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।

सामने खड़ा आदमी घबरा गया।

कुछ देर बाद जुशेंग ने ठंडी आवाज में कहा—

"ले जाओ इसे।"

"और सच बाहर निकालो।"

तभी एक लड़का अंदर आया।

वह जुशेंग के सामने आकर खड़ा हो गया।

"बॉस..."

"हमने पता कर लिया।"

"ये काम किसी और का नहीं..."

"मालिक का है।"

जुशेंग की आँखों में चमक आ गई।

"तो..."

"चूहा छुप रहा है।" 😏

"लेकिन शेर की नजर से ज्यादा देर बच नहीं सकता।"

लड़का बोला—

"बॉस, जैसा आपने कहा था..."

"हमने उन लोगों को सुरक्षित निकाल लिया।"

"वे लोग अब ठीक हैं।"

जुशेंग ने आँखें बंद कर लीं।

"हम्म..."

"उन्हें छोड़ दो।"

"वो भी शायद उसी खेल का हिस्सा बन गए थे।"

लड़का—

"जी बॉस।"

---

पुलिस स्टेशन...

रेहान अपने सीनियर के सामने खड़ा था।

"जी सर।"

सीनियर ने गंभीर आवाज में कहा—

"तुम्हें ये काम इसलिए दिया गया है..."

"क्योंकि मुझे भरोसा है कि तुम इसे संभाल सकते हो।"

"जी सर।"

"फाइल के बारे में कुछ पता चला?"

रेहान ने जवाब दिया—

"जी सर।"

"एक फैक्ट्री का कनेक्शन मिल रहा है।"

"कुछ मजदूरों के नाम भी मिले हैं।"

"लेकिन पूरी जानकारी अभी बाकी है।"

"जल्द पता चल जाएगा।"

सीनियर ने संतुष्ट होकर कहा—

"मुझे तुमसे यही उम्मीद है।"

और वहाँ से चले गए।

---

रेस्टोरेंट...

युई, समर और सिम्मी खाना खा रहे थे।

लेकिन युई आज भी शांत थी।

उसके अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी।

जिसका कारण उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था।

अचानक वह बोली—

"मैं थोड़ा वॉशरूम होकर आती हूँ।"

सिम्मी बोली—

"मैं भी चलती हूँ।"

युई ने मना कर दिया।

"नहीं, तुम यहीं रुको।"

"मैं अभी आती हूँ।"

युई वहाँ से चली गई।

कुछ देर बाद...

समर ने अचानक सिम्मी का हाथ पकड़ लिया।

उसकी आवाज सख्त थी।

"मिस सिम्मी..."

"मुझसे दूर रहा करो।"

"मुझे बिल्कुल पसंद नहीं कि कोई मेरे साथ इस तरह करे।"

सिम्मी चौंक गई।

"समर..."

"छोड़िए..."

"दर्द हो रहा है।"

समर ने तुरंत उसका हाथ छोड़ दिया।

फिर बोला—

"ये तुम्हारे लिए अच्छा होगा।"

"जितना हो सके..."

"मुझसे दूर रहो।"

और वह वहाँ से चला गया।

सिम्मी उसे जाते हुए देखती रही।

"खुद को पता नहीं क्या समझता है..." 😒

उधर वॉशरूम में...

समर अपने हाथ धो रहा था।

बार-बार...

जैसे किसी उलझन को अपने अंदर से निकालने की कोशिश कर रहा हो।

वह आईने में खुद को देखकर हल्की मुस्कान के साथ बोला—

"I like you..."

"तुम जल्दी ही मेरी बनोगी।"

"और मैं वादा करता हूँ..."

"हमारे बीच कोई नहीं आएगा।" 😏

उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गई।

अगला दृश्य...

रेस्टोरेंट का वॉशरूम...

युई की हालत ठीक नहीं थी।

वह लगातार परेशान थी और कमजोरी महसूस कर रही थी।

उसका चेहरा बिल्कुल मुरझा गया था...

जैसे किसी खूबसूरत फूल की चमक अचानक खो गई हो। 🌸

कुछ देर बाद उसने अपना चेहरा धोया।

आईने में खुद को देखा।

हल्की सी मुस्कान लाने की कोशिश की।

"ठीक हूँ..."

उसने खुद से कहा।

लेकिन शरीर शायद उसकी बात नहीं मान रहा था।

जैसे ही वह वॉशरूम से बाहर निकली—

अचानक उसकी आँखों के सामने सब घूमने लगा।

उसके कदम लड़खड़ाने लगे।

"आह..." 😟

उसने खुद को संभालने की कोशिश की।

लेकिन अगले ही पल...

उसकी आँखें बंद होने लगीं।

वह गिरने ही वाली थी कि तभी—

किसी ने उसे संभाल लिया। 😳

युई किसी के सहारे में आ गई।

वह इंसान उसे देखकर घबरा गया।

उसकी नज़रें बार-बार युई के चेहरे पर जा रही थीं।

"कुछ नहीं होगा..."

"आप ठीक हैं..."

"कुछ नहीं होगा।"

उसने घबराहट में कहा।

फिर सावधानी से उसे उठाया और मदद के लिए आगे बढ़ने लगा।

उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।

जैसे सामने वाला इंसान उसके लिए बहुत खास हो...

लेकिन युई अभी भी बेहोशी जैसी हालत में थी।

और उसे नहीं पता था कि इस पल में कौन उसके इतने करीब आ चुका है... 👀

अगला दृश्य...

अस्पताल...

समर युई को अपनी बाहों में संभाले हुए अंदर आया।

उसकी आवाज में घबराहट साफ दिखाई दे रही थी।

"डॉक्टर!"

"कोई डॉक्टर है?"

"जल्दी आइए!" 😰

उसके चेहरे पर डर और गुस्सा दोनों थे।

तभी एक मेल डॉक्टर वहाँ आया।

"जी, बताइए क्या हुआ?"

समर ने तुरंत कहा—

"पहले इन्हें देखिए।"

डॉक्टर ने जैसे ही युई को चेक करने के लिए हाथ बढ़ाया...

समर ने तुरंत रोक दिया।

"रुकिए।"

"आप इन्हें टच मत कीजिए।"

डॉक्टर हैरान रह गया।

"लेकिन सर..."

"बिना चेक किए कैसे पता चलेगा कि इन्हें क्या हुआ है?"

समर की आवाज सख्त थी।

"कोई फीमेल डॉक्टर को बुलाइए।"

डॉक्टर ने स्थिति समझते हुए सिर हिलाया।

"जी... पहले इन्हें अंदर लेकर चलते हैं।"

---

कुछ देर बाद...

युई अस्पताल के बेड पर लेटी थी।

उसका चेहरा बिल्कुल शांत था...

लेकिन कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी।

जैसे कोई नाजुक फूल थककर झुक गया हो। 🌸

फीमेल डॉक्टर उसका चेकअप कर रही थीं।

कुछ समय बाद डॉक्टर बाहर आईं।

समर तुरंत उनके पास गया।

"डॉक्टर..."

डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा—

"गुड न्यूज।"

"वो बिल्कुल ठीक हैं।"

ये सुनते ही समर की आँखों में राहत आ गई।

लेकिन साथ ही उस पल का डर भी याद आ गया।

"शी इज फाइन..."

उसने धीमे से कहा।

फिर तुरंत पूछा—

"लेकिन ऐसा हुआ क्यों?"

डॉक्टर बोलीं—

"ज्यादा तनाव की वजह से ऐसा हुआ।"

"और प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ऐसा होना सामान्य है।"

"उन्हें बस आराम और खुशी का माहौल चाहिए।"

समर ने राहत की साँस ली।

"थैंक यू डॉक्टर..."

"बहुत-बहुत धन्यवाद।"

डॉक्टर हल्की मुस्कान के साथ बोलीं—

"ये हमारा काम है।"

और वहाँ से चली गईं।

समर वापस कमरे में आया।

वह युई के पास बैठ गया।

कुछ पल तक बस उसे देखता रहा।

उसके हाथ हल्के-हल्के काँप रहे थे।

उस पल को याद करके...

जब युई उसकी आँखों के सामने गिरने वाली थी।

उसके मन में बस एक ही बात चल रही थी—

"अगर समय पर मैं वहाँ नहीं होता तो..." 😔

उसने धीरे से युई का हाथ देखा।

"आप ठीक हैं..."

वह बस इतना ही बोल पाया।

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