tumhari shadi hai chapter 5 in Hindi Love Stories by Luna Rinn books and stories PDF | तुम्हारी शादी है - 5

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तुम्हारी शादी है - 5



अधीरा बड़ी-बड़ी आंखों से अद्विक को देख रही थी। जो उसके ऊपर लेटे हुए लगातार उसके सीने को ब्लाउज के ऊपर से ही सहला रहा था और स्माइल के साथ ही उसकी इयर लॉब को चूम रहा था। अधीरा उसके सीने पर हाथ रख उसे खुद से दूर करते हुए , " तुम , तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है ? मैंने पहले ही कहा था भले ही तुम मुझे जबरदस्ती अपनी पत्नी बनाकर ले आओ लेकिन मैं तुम्हें पत्नी का कोई सुख नहीं दूंगी। समझे तुम! छोड़ो मुझे। " बोलते हुए वह अपने पैरों को मूव करती है।

उसके पैरों से एक छन की तेज आवाज होती हैं। वो अपने पैरों को देखने लगती हैं। जहां मोटी–मोटी सी पायले बंधी हुई थी।

अद्विक अधीरा का चेहरा अपनी तरफ करते हुए , " क्या हुआ पत्नी जी ? वह क्या है ना जब हम दोनों एक दूसरे के आगोश की गहराई में डूब रहे होंगे तब हमे सेटिस्फेक्शन के लिए यह आवाज सुननी है। " बोलते हुए वह उसकी ब्लाउज को कंधे से सरका वहां पर चूमने लगता है।

वह काफी एग्रेसिव हो रहा था। उसकी आंखें बेहद लाल थी और शरीर एकदम तप रहा था। जैसे उसके पैरों में मोटी–मोटी बेड़ियां बांध दी गई हो वह अद्विक के सीने पर अपने नाखून हटाते हुए , " तुम तुम्हारा दिमाग खराब हो गया! अगर तुमने मेरे साथ कुछ भी करने की कोशिश करी तो मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं। "

 अद्विक जो उसे बराबर किस कर रहा था। चूम रहा था अधीरा के हाथ ऐसे बीच में लाने पर उसका पूरा दिमाग खराब हो जाता है।

वो उसके दोनों हाथों को पकड़ बेड पर पुश करते हुए , " पत्नी जी हमें जरा भी बर्दाश्त नहीं है कोई भी हमारे काम में दखलअंदाजी करें और यहां तो आप सीधा हमें हमारा काम करने से रोक रही हैं। "

वह उसके दोनों हाथों को क्रॉस करते हुए ऊपर की तरफ लगा एक हाथ से पिन कर देता है और दूसरे हाथ को उसके ब्लाउस पर रख उसके कंधे से ब्लाउज नीचे की तरफ खीसका देता हैं। जिससे उसकी क्लीवेज और ज्यादा शो करने लगती हैं। पूरे कमरे में अंधेरा था सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी जो अधीरा के चेहरे पर पड़ रही थी। उसका खूबसूरत सा बेदाग चेहरा किसी सोने की तरह चमक रहा था।

 अद्विक उसे लाल आंखों से देखने लगता है। उसकी आंखें लाल थी। वह जैसे उसमें कहीं गुम सा हो गया हो अधीरा के शरीर से निकलती वो भीनी–भीनी खुशबू में कहीं खो रहा था। वह उसकी गर्दन पर झुक उसकी गर्दन को लिक करने लगता है। अधिरा पूरे शरीर में रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

उसका पूरा शरीर कांप चुका था। वो काफी देर तक इसी तरह उसके शरीर को कभी गर्दन , गले और माथे पर चुमते हुए उसके सीने को बराबर सहलाते हुए दबा रहा था। अधीरा उसे देख रही थी उसके मुंह से अब आवाज तक निकलना बंद हो चुकी थी।

अधीर की आंखों से आंसू धीरे-धीरे बहने लगते हैं अधिक जो किसी पागल की तरह उसे पर हावी हो चुके था उसकी आंखें धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं और वह सीधा उसके ऊपर ही गिर जाता है उसका सर काफी भारी हो चुका था अधीर जो रो रही थी अधिक को खुद के ऊपर महसूस कर उसके सास और ज्यादा तेज हो जाते हैं। वह उसे खुद से छुड़ाने लगती है पर नींद में भी अद्विक की पकड़ अधीरा के हाथों पर मजबूत थी। वो टस से मस नहीं हुआ था।

अधीरा उसे खुद से दूर करते हुए , " यह तुमने , तुमने बिलकुल अच्छा नहीं किया है , मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं मुझे अपनी पत्नी बनाना चाहते है ना में तुम्हे किसी जन्म में नही अपनाऊंगी बस एक मौका और उसके बाद तुम मुझे कभी देख तक नहीं पाओगे। "

नेक्स्ट मॉर्निंग ,

सूरज परवान चढ़ चुका था। सफेद पर्दे जो हवा की वजह से हिल रहे थे। अधीरा की आंख धीरे-धीरे खुलती हैं और उसकी नजर सीधा अद्विक के चौड़े सीने पर चली जाती हैं। उसे अपने शरीर में कुछ अजीब सा महसूस होता है और वह अद्विक को देखने लगती हैं। वह इस वक्त अद्विक के ऊपर थी। वह भी पूरी तरीके से उसके ऊपर सो रही थी। उसके दोनों हाथ अद्विक के सीने पर थे और चेहरा उसके सीने पर धसा हुआ था।

अद्विक ने उसे कमर से पकड़ा हुआ था। अधीरा जिसे रात में सोते टाइम अपने पूरे शरीर में और सीने में तेज दर्द हो रहा था। अब काफी आराम था। उसकी आंखें खुल चुकी थी वो एकटक अद्विक को देखने लगती है। अद्विक का एकदम ठंडा चेहरा उसके शरीर से निकलते हुए नेगेटिव अभाए जो उसे हमेशा की तरह और ज्यादा डरावना बना रही थी। अधिरा उसे देखते हुए उसके ऊपर से उठने लगती हैं।

अद्विक उसे खुद से और जकड़ते हुए , " सो जाओ और हमें भी सोने दो पत्नी जी। " बोलते हुए वह गुनगुनाता हैं और उसकी कमर पर अपनी पकड़ कुछ और मजबूत कर देता है।

अधीरा उसके सीने पर हाथ रख , " तुम छोड़ो मुझे तुम्हें सोना है तो तुम बेशक से सो सकते हो पर मुझे नहीं सोना समझे तुम। "

 अद्विक जो अभी नींद में था। वह एकदम बेड पर पलट जाता है और अधीरा के ऊपर है उसके जो लाइन को पकड़ते हुए , " हमने कहा था ना आपसे अगर आप हमें इज्जत नहीं देंगी तो हम आपसे अपने तरीके से इज्जत करवाएंगे। क्या आप चाहती हैं ? कि हम अपने तरीके से इज्जत करवाए। "

" तुम्हे किया लगता है ? में तुम्हारी इन खोकली धमकियों से डर जाऊंगी मैं बिल्कुल नहीं हरगिज नहीं। होगे तुम कहीं के नवाब , शहजादे या बादशाह या राजा पर मैं अकीरा राजपूत तुमसे बिल्कुल भी नहीं डरती समझे तुम अब हटो मेरे ऊपर से। पता नहीं कैसे लोहे जैसा शरीर है ? ऊपर से मेरे ऊपर ही चढ़ते रहते हो। "

" बीवी है आप हमारी धर्मपत्नी और अर्धांगिनी कहते हैं जिसे , और अगर हम आपके ऊपर नहीं चढ़ेंगे तो फिर किसके ऊपर चढ़ेंगे ? आप क्या चाहती हैं ? कि हम शादी होने के बावजूद बाहर का वह बासी खाना खाएं। "

अधीरा हैरानी से , " बासी खाना! हम यहां खाने की तो बात कर ही नहीं रहे और तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम्हें बासी खाना खिलाऊंगी ? खाना खिलाऊंगी ही क्यों ? तुम हो कौन ? तुम कोई नहीं हो मेरे ? समझे तुम , बड़े आए। "

अद्विक उसे एक आईब्रो उठाकर देखता है और फिर उसके होठों पर अंगूठा रख , " हम खाने की बातें कर ही नहीं रहे पत्नी जी हम तो सिर्फ और सिर्फ इन होठों को खाने की बात कर रहे हैं। हम इस चीज से बात कर रहे हैं इस खाने की बात कर रहे हैं जिसे हम बहुत अच्छे से खाना चाहते हैं , पूरी तरीके से निकलना चाहते हैं वह भी कच्चा। " बोलते हुए वह अपने होठों को बहुत ही अजीब तरीके से गोल घूमता है और उसे लिक करने लगता है।

जैसे वह कोई टेस्टी डिनर हो। अधिरा जैसे ही उसके होठों की हरकत को देखती है। उसके पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था।

 वो अपना चेहरा फिराते हुए , " देखो मेरे साथ , मेरे साथ बकवास करने की जरूरत नहीं। "

अद्विक उसके जॉ लाइन को पकड़ अपने चेहरे के नजदीक क्लास की आंखों में जाते हुए , " पत्नी जी आप हमारी अर्धांगिनी है और एक पति एक पत्नी पति के हमेशा और बराबर के हकदार होती है। तो आप कभी हमसे नज़रे फिरा कर बात नहीं कर सकती चाहे हालात कैसे भी हो , बात कैसी भी हो , वक्त कोई भी हो पर आपकी नजरे सिर्फ और सिर्फ हम पर होनी चाहिए कहीं और नहीं। वरना हमारी आवाज के साथ-साथ बहुत कुछ ऐसा है जिसके बाद आपको सिर्फ तकलीफ ही महसूस होगी तो बेहतर होगा आप हमें अपनी नज़रें सिर्फ और सिर्फ हम तक मौजूद रखें , सीमित रखें। "

अधीरा को अजीब सा महसूस हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था। वह उसकी बातों पर उसके चेहरे को देखते हुए , " हमें नहाना है। " बोलकर वह बात ही पलट देती है।

अद्विक उसके ऊपर से उठ जाता है और उसे अपनी बाहों में उठाते हुए , " चलिए हम साथ में स्नान करते हैं। वैसे भी आज आपकी वजह से कुछ देरी हो चुकी है। हमें हमारे गंगा स्नान को , कोई बात नहीं हम आज आपके साथ स्नान कर सकते हैं। " बोलते हुए वह उसे बाथरूम में ले जाता है। वो उसे देखती रह जाती है। उसके नाखून अद्विक के कंधों पर गढ़ रहे थे , वह कुछ बोल ही नहीं पाई थी।


मिलते है अगले भाग में 😊😊 please mere pyare reader follow kar lo roz nyr chapter kr liye or comments karna na bhule