tumhari shadi hai chapter 7 in Hindi Love Stories by Luna Rinn books and stories PDF | तुम्हारी शादी है - 7

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तुम्हारी शादी है - 7



करीब 20 मिनट के बाद अधीरा नहा धोकर बाहर आती हैं उसने इस वक्त रेड कलर का लहंगा और चोली पहना हुआ था। उसके गीले गीले बाल उसकी कमर पर झूल रहे थे। वह एक नजर कैमरे में डालती हैं। अद्विक इस वक्त कमरे में मौजूद नहीं था। वह गहरी सांस ले मीरर के सामने आकर खड़ी हो जाती है। वो जल्दी-जल्दी तैयार होने लगती है और कुछ ही देर बाद वह सीधा नीचे आ जाती हैं।

उसकी पायल की झंकार से वह पूरी हवेली गूंज उठी थी। उसने बहुत ही भारी-भारी पायल पहनी थी। वह पूरे में अपनी सरसरी नजर डालती है। पर उसे कोई भी नहीं दिखता उसके चेहरे पर एक खुशी की लहर दौड़ जाती है। वो लहंगे को मुट्ठी पकड़ में तेज कदमों से सीडीओ से नीचे उतरते हुए सीधा दरवाजे तक आती हैं।

तभी उसके कानों में एक रौबदार आवाज पढ़ती है , " कहां जा रहे हो आप ? वह भी इतनी सुबह-सुबह। क्या आपको आरती नहीं करनी चाहिए ? " अधीरा अपनी आंखें बंद कर लेती हैं। वह इस आवाज को बहुत अच्छे से जानती है।

वो पीछे की तरफ पलट जबरदस्ती की स्माइल चेहरे पर चिपकाते हुए , " हां दादी सा मैं बस आ ही रही थी। " बोलते हुए वह अपने लहंगे को छोड़ धीरे कदमों से उनके पास आने लगती हैं।

ज्योति जी जो एकटक उसे देख रही थी। उनकी नजर सीधा अधिरा की मांग पर चली जाती है। जो एकदम सुनी थी। उनका चेहरा लाल हो जाता है।

वह तेजी से चिल्लाते हुए , " अद्विक हमारे सामने आइए अभी। कहां है आप ? "

अद्विक जो अभी स्टडी रूम से बाहर निकल रहा था। उनकी आवाज पर उसकी उनके नजदीक आकर खड़ा हो जाता है।

ज्योति जो उसे देखते हुए , " क्या है यह सब? "

वो एक नजर अधिरा को देखता है और फिर उनकी तरफ देखते हुए , " क्या हुआ मा सा ? "

" हमारे साथ चलिए। " बोलते हुए वह उसे अधीरा के सामने लाकर से खड़ा कर देती हैं।

वह दोनों एक दूसरे को देखते अधीरा मुंह बनाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है। ज्योति जी उसके एक्सप्रेशंस को देखा , " आप दोनों अभी हमारे साथ पहले मंदिर चलिए। "

घर के अंदर ही एक छोटा सा मंदिर बनाया हुआ था। जो बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था। उसके अंदर भगवान की मूर्ति रखी गई थी और उन्हें तरह-तरह के फूल के गहने पेहनाए हुए थे। जो देखने में बहुत खूबसूरत थे अंदर चेहरे लाइट थी जो हमेशा जगमगाती रहती थी। ज्योति जी सीधा मंदिर में जाती है।

और वहां भगवान के पैरों पास रखे हुए सिंदूर को उठाकर अद्विक के हाथ में देते हुए , " अपनी पत्नी की मांग भरिए आप अभी के अभी। "

फिर अधीरा की तरफ देखते हुए , " आप इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हैं ? अभी आपकी नई-नई शादी हुई है और आप इस तरीके से लापरवाही दिखा रही हैं रही हैं। आप चाहती क्या है ? आप हमें बताएंगी क्या आप इस शादी से खुश नहीं है ? "

अधीरा जिसने कुछ कहने के लिए अपने होंठ हिलाए थे उसकी नजर सीधा अद्विक पर चली जाती है। जो गहरी नजरों से उसे ही देख रहा था। अधीरा अपना सिर ना में हीला देती हैं। अद्विक थोड़ा सा उसके नजदीक आ एक चुटकी सिंदूर ले उसकी पूरी मांग को सिंदूर से सजा देता है। अधीरा अपनी आंखें मजबूती से बंद कर लेती है।

वह एक वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करती थी। उसे इंडियन कल्चर की ज्यादा नॉलेज नहीं थी और वह हमेशा से ही एरोगेंट वे में रहती थी। उसे सिंदूर या शादी इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं था , ना ही कोई दिलचस्पी थी। वह अपनी मुट्ठियों में लहंगे को भर लेती है।

ज्योति जी उसके हाथ में थाली देते हुए , " चलिए अब चलकर भगवान की आरती कीजिए। "

अधीरा उस थाली को देखने लगती है। उसे नहीं पता था पूजा कैसे की जाते हैं। वह प्लेट को लेकर उल्टी डायरेक्शन में घूमाने लगती हैं आरती की , ज्योति जी का चेहरा लाल हो जाता है। वही अद्विक उसे बुरी तरीके से घूरते हुए उसके बगल में खड़ा हो जाता है और उसके हाथ पर अपना हाथ रख उसे डायरेक्शन देने लगता है। अधीरा उसे एक नजर देखने के बाद मुंह बनाते हुए वैसे ही उसके साथ-साथ अपने हाथों को घूमने लगते हैं। थोड़ी देर बाद जब आरती पूरी होती हैं। वह ज्योति जी की तरह बढ़ जाते हैं और प्रसाद देने लगती हैं।

ज्योति जी उसे देखते हुए , " पहले आप अपने पति को दीजिए और उनके पैर छुईए। "

अधीरा एक नजर अद्विक को देखने के बाद ज्योति जी की तरफ देखते हुए , " हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे वह हमारे पति हो सकते हैं। पर मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी और यह आप क्या कह रही हैं ? पत्नियां पति के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलती है ना कि उनकी जगह उनके पैरों में है। "

अद्विक देखने के बाद ख़ामोशी से खड़ा रहता है उसे बस इंतजार था उसकी मासा के अगले कदम का ज्योति जी उसके हाथ से प्लेट लेते हुए , " यह आप कैसी बातें कर रही हैं ? आप भूल रही हैं शायद की पति को भगवान का दर्जा दिया गया है। इसीलिए पत्नी की जगह पति के पैरों में होती है। अगर आपने उनके पैर नहीं छुए तो आज आपको पूरा दिन ना कुछ खाने को मिलेगा और ना ही एक बूंद पानी सोच लीजिए आप क्या करना चाहती हैं। "

अधीरा अपनी मुट्ठियां मजबूती से बंद करें अद्विक को देखती हैं। जो स्ट्रेट फेस के साथ वहां खड़ा हुआ था। जैसे उसे उन दोनों के बीच बोलने में जरा भी इंटरेस्ट ना हो।

अधीरा उसके पास आती हैं और खुद से बढ़बढ़ाते हुए , " पैर छूने है , तुम्हें तो मैं अभी बताती हूं। तुम्हारी सारी भगवान गिरी मैने ना निकाल दी तो मेरा नाम भी अधीरा राजपूत नहीं। " बोलते हुए अपने नाखूनों को बुरी तरीके से अद्विक के पैरों में गड़ा देती हैं।

अद्विक के चेहरे पर उसकी हरकत पर छोटी सी स्माइल आ जाती है। उसे पूरा यकीन था अधीरा जरूर ऐसा ही कुछ करेगी और वह जो काम को उसने सीधा-सीधा कर लिया तो वह अधीरा ही क्या करीब 2 मिनट के बाद अधीरा ऊपर की तरफ उठती है।

और जबरदस्ती स्माइल के साथ ज्योति जी की तरफ देखती हैं , " अब ठीक है मासा। " खुन्नस में वह एक नजर अद्विक को देखते हैं।

ज्योति जी उसकी तरफ देखते हुए , " हां और अब से तुम्हें यही करना है। सुबह शाम तुम्हें सोने से पहले और उठने के बाद अपने पति के पैरों को छूना है समझी आप। "

अधीरा अपना सर धीरे से हिला देती हैं और मन में बड़बड़ाती हैं , " पति के पैर माय फुट मैने भी तुमसे अपने पैर ना दबवा लिए तो मेरा नाम भी अधीरा राजपूत नहीं। " वह बड़बड़ा रही थी और वही ज्योति जी आगे निकल चुकी थी।

तभी उसे अपने कंधे पर गहरी सांसें महसूस होती हैं। वह हल्का सा पीछे होकर अद्विक को देखती है। जो उसके कंधे पर अपना सर टिकाए उसे ही देख रहा था। अधीरा दूर हटने लगती है।

अद्विक उसकी खुली हुई कमर पर अपनी उंगलियां फसाते हुए , " हमें बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा आपके पैर दबाने में और खासकर तब जब हम आपके पैरों को अपने कंधे पर रख उन्हें बेहद अच्छे तरीके से दबाएंगे की आपको बाद में चलने में भी बहुत सुकून मिलेगा। "

उसके चेहरे पर शरारत सब दिख रही थी। अधीरा का चेहरा गुस्से से भर जाता है और वह अपने पैर को उसके पैर पर लगभग कसके मारते हुए वहां से आगे बढ़ जाती हैं।


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मिलते है अगले भाग में ओर मेरे प्यारे रीडर please follow kar lo or comment bhi karna