Mafia saiya chapter 8 in Hindi Love Stories by Shilpi Mishra books and stories PDF | Mafia saiya chapter 8

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Mafia saiya chapter 8



अध्याय 8 : एक महीने की बीवी का सौदा

तहखाने के मुहाने पर रुद्र खड़ा था। सिर्फ एक सफेद तौलिया लपेटे हुए। उसके बदन से पानी टपक रहा था, पर उसकी आँखों में पानी नहीं, आग थी।

उसके हाथ में काली बंदूक सीधा आराध्या के माथे पर थी।

"रुद्र! नहीं! गोली मत चलाना!" नित्या आराध्या के सामने आकर खड़ी हो गई।

"हट जा, नित्या।" रुद्र की आवाज बर्फ से भी ज्यादा ठंडी थी। "तूने मेरी बात नहीं मानी। तूने मुझे धोखा दिया।"

"मैंने धोखा नहीं दिया! वो मेरी बहन है! 5 साल से तुमने उसे कैद कर रखा है! कोई भी बहन ऐसा ही करती!"

आराध्या कांप रही थी, "नित्या, तू हट जा... इसे चलाने दे गोली। मैं वैसे भी रोज-रोज मरती हूँ यहाँ।"

रुद्र ने बंदूक थोड़ी नीचे की, पर अब भी तानी हुई थी।

"ठीक है। तुझे अपनी बहन इतनी ही प्यारी है ना... तो सौदा करते हैं।"

नित्या ने कहा, "कैसा सौदा?"

"वही एक महीने वाला।" रुद्र ने तौलिया ठीक किया और एक कदम आगे आया। "पर अब शर्त बदल गई है।"

"अब तुझे सिर्फ अच्छी बीवी नहीं बनना... तुझे मेरी हर बात माननी पड़ेगी। जो मैं कहूँगा, जैसे कहूँगा। मेरे साथ पार्टी में चलना, मेरे दुश्मनों के सामने मेरी बीवी बनकर मुस्कुराना... और रात को..."

रुद्र रुका और नित्या के लाल जोड़े को देखा।

"रात को मेरे साथ इसी बेड पर सोना। मैं तुझे हाथ भी नहीं लगाऊंगा अगर तू नहीं चाहेगी, पर तू मेरी बाहों में सोएगी। हर रात।"

नित्या का चेहरा लाल हो गया, "और मेरी बहन?"

"तेरी बहन ऊपर वाले कमरे में रहेगी। अच्छी तरह। नौकर उसकी देखभाल करेंगे। खाना, कपड़े, दवाई... सब मिलेगा। पर वो इस हवेली से बाहर नहीं जाएगी। एक महीना पूरा होते ही... अगर तूने दिल से कहा कि तू मुझसे प्यार करती है... तो मैं तुम दोनों को छोड़ दूंगा।"

आराध्या चिल्लाई, "नहीं नित्या! इस पागल की बात मत मान! ये तुझे भी बर्बाद कर देगा!"

नित्या ने अपनी बहन का हाथ कसकर पकड़ा। 5 साल बाद मिली थी।

उसने आँखों में आँसू लेकर रुद्र को देखा, "मुझे मंजूर है।"

रुद्र के चेहरे पर पहली बार जीत वाली मुस्कान आई।

"Good girl."

उसने बंदूक नीचे की और ताली बजाई। दो नौकर भागते हुए आए।

"आराध्या मैडम को गेस्ट रूम में ले जाओ। डॉक्टर को बुलाओ। और सुनो... ये मेरी साली है। इज्जत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।"

नौकर आराध्या को ले गए। आराध्या जाते-जाते नित्या को देखकर रो रही थी।

अब तहखाने के बाहर सिर्फ रुद्र और नित्या थे।

रुद्र ने नित्या का हाथ पकड़ा। उसका हाथ ठंडा था, रुद्र का हाथ गर्म।

"चलें, बीवी? हमारी पहली रात अभी बाकी है।"

नित्या को वो फिर से बेडरूम में ले आया।

कमरे में अभी भी गुलाब बिखरे थे।

रुद्र ने अलमारी से एक काली शर्ट निकाली और पहन ली। फिर बेड पर लेट गया और अपनी बाहें फैला दीं।

"आजा। शर्त शुरू होती है... अब से।"

नित्या सहमी हुई खड़ी थी।

"मैं... मुझे नींद नहीं आ रही।"

"तो मैं सुला दूं?" रुद्र ने शरारत से कहा।

नित्या धीरे-धीरे बेड के दूसरे कोने पर आकर लेट गई, जितना हो सके रुद्र से दूर।

रुद्र ने एक झटके में उसे खींचा और अपनी बाहों में भर लिया।

नित्या का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसकी पीठ रुद्र के सीने से लगी थी। रुद्र की मजबूत बाहें उसकी कमर पर थीं।

"छोड़ो मुझे..."

"शर्त याद है ना? बाहों में सोना है।" रुद्र ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा। उसकी दाढ़ी नित्या की गर्दन को छू रही थी। "सो जा, जंगली बिल्ली। मैं तुझे नहीं खाऊंगा। आज नहीं।"

नित्या ने आँखें बंद कर लीं। उसे लगा वो पूरी रात सो नहीं पाएगी।

पर रुद्र की बाहों में एक अजीब सी गर्मी थी, एक सुकून था। 2 दिन से भागते-भागते थकी हुई नित्या को पता ही नहीं चला कब उसकी आँख लग गई।

सुबह जब उसकी आँख खुली तो वो रुद्र के सीने पर सिर रखकर सो रही थी। और रुद्र... जाग रहा था। रात भर सोया ही नहीं था। बस उसे देख रहा था।

"Good Morning, Biwi." रुद्र ने मुस्कुराते हुए कहा।

नित्या हड़बड़ा कर उठी, "तुम... तुम रात भर सोए नहीं?"

"जिसकी किस्मत में तू हो, उसे नींद कैसे आएगी?" रुद्र ने कहा और उठ गया।

तभी नीचे से किसी नौकर के चिल्लाने की आवाज आई - *"मालिक! मालिक! आराध्या मैडम खिड़की से कूद गई!"*

नित्या का दिल बैठ गया।

*अगले अध्याय में क्या होगा?*

क्या आराध्या सच में खिड़की से कूद गई? क्या वो बच पाएगी? क्या नित्या रुद्र को इस हादसे का जिम्मेदार ठहराएगी और अपना सौदा तोड़ देगी? और हवेली में वो कौन है जो आराध्या को भगाने में मदद कर रहा है?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 9 : खिड़की से कूदी बहन