This is one-sided love - Part 12 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 12

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 12

सुबह का अलार्म बजते ही राहुल की आँख खुल गई.

कुछ पल तक वह चुपचाप बिस्तर पर बैठा रहा.

फिर उसकी नजर कुर्सी पर रखे नए कपडों पर पडी.

आज उसकी जिंदगी का एक नया दिन था.

उसकी पहली नौकरी का पहला दिन.

राहुल ने कपडे उठाए और तैयार होने चला गया. आज उसके चेहरे पर रोज वाली उलझन नहीं थी. उसके अंदर एक अलग तरह की घबराहट थी—कुछ खोने की नहीं, बल्कि कुछ साबित करने की.

आईने के सामने खडे होकर उसने खुद को देखा.

आज से सब बदलना है।

उसने खुद से कहा.

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.

राहुल?

अंजलि की आवाज सुनकर उसने जल्दी से जवाब दिया—

जी मैम।

तैयार हो?

जी।

राहुल बाहर आया तो अंजलि ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.

अच्छे लग रहे हो।

राहुल थोडा झेंप गया.

पहला दिन है ना।

इसलिए इतना तनाव मत लो।

तनाव तो होगा ही मैम।

अंजलि मुस्कुराई.

एक बात याद रखना।

क्या?

पहले दिन तुम्हें किसी को प्रभावित नहीं करना है. सिर्फ अपना काम समझना है।

राहुल ने सिर हिलाया.

और हाँ.

अंजलि ने गंभीर होकर कहा—

किसी से डरना मत, लेकिन किसी से बदतमीजी भी मत करना।

जी।

गलती हो तो स्वीकार करना।

जी।

और सबसे जरूरी.

अंजलि कुछ पल रुकी.

किसी को अपनी मजबूरी मत बताना।

राहुल ने उसकी तरफ देखा.

क्यों?

क्योंकि दुनिया में हर कोई मदद करने वाला नहीं होता।

राहुल ने उस बात को ध्यान से अपने मन में बिठा लिया.

समझ गया।

कुछ देर बाद वह कंपनी के लिए निकल गया.

आज वही रास्ता उसे बिल्कुल अलग लग रहा था.

कल तक वह उस इमारत के सामने खडा होकर सोच रहा था कि क्या उसे नौकरी मिलेगी.

आज उसी इमारत के अंदर वह एक कर्मचारी के रूप में जा रहा था.

रिसेप्शन पर पहुँचते ही एक लडकी ने पूछा—

जी?

राहुल ने थोडा घबराते हुए कहा—

मैं राहुल हूँ. आज से मेरी जॉइनिंग है।

लडकी ने कंप्यूटर में कुछ देखा.

ओह. राहुल. आपको तीसरी मंजिल पर भेजा गया है. वहाँ Human Resources से मिल लीजिए।

जी, धन्यवाद।

राहुल लिफ्ट के सामने जाकर खडा हो गया.

लिफ्ट में उसके साथ कुछ कर्मचारी भी खडे थे. सब अपने- अपने फोन में व्यस्त थे.

राहुल थोडा असहज महसूस कर रहा था.

तीसरी मंजिल पर पहुँचकर वह Human Resources विभाग में गया.

एक कर्मचारी ने उसे कुछ फॉर्म दिए.

इन्हें भर दीजिए।

राहुल ने फॉर्म लेना शुरू किया.

लेकिन तभी उसकी नजर एक कॉलम पर जाकर रुक गई.

Emergency Contact.

उसका हाथ रुक गया.

कुछ सेकंड तक वह खाली जगह को देखता रहा.

उसके पास लिखने के लिए कोई नाम नहीं था.

जिसे वह अपना कह सके.

वह चुपचाप बैठा रहा.

पास बैठे कर्मचारी ने पूछा—

क्या हुआ?

राहुल ने सिर उठाया.

कुछ नहीं।

उसने कुछ देर सोचने के बाद अंजलि का नाम लिख दिया.

लेकिन तुरंत उसे लगा कि शायद उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था.

फिर उसने नाम काट दिया.

और खाली छोड दिया.

कुछ मिनट बाद Human Resources अधिकारी ने फॉर्म देखे.

Emergency contact क्यों खाली है?

राहुल ने शांत आवाज में कहा—

मेरे पास फिलहाल कोई नहीं है।

अधिकारी ने उसे कुछ पल देखा.

ठीक है, बाद में दे देना।

राहुल ने सिर हिला दिया.

इसके बाद उसे उसके विभाग में भेज दिया गया.

वहाँ उसका परिचय बाकी कर्मचारियों से कराया गया.

ये राहुल हैं. आज से हमारे साथ काम करेंगे।

एक कर्मचारी ने हाथ बढाया.

हाय, मैं अमित।

हाय।

पहला दिन है?

जी।

टेंशन मत लेना. यहाँ सब ठीक है।

राहुल को थोडी राहत मिली.

लेकिन तभी पीछे से एक आवाज आई—

पहले दिन सबको यही लगता है।

राहुल ने पीछे मुडकर देखा.

एक युवक उसे ध्यान से देख रहा था.

उसका नाम रोहित था.

चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखों में कुछ अलग था.

राहुल ने सिर्फ इतना कहा—

जी।

रोहित ने बिना कुछ कहे अपना काम शुरू कर दिया.

राहुल को उसके व्यवहार से थोडी अजीब अनुभूति हुई.

लेकिन उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

पहले कुछ घंटे राहुल को काम समझने में लगे.

कागजों की जाँच, कंप्यूटर पर एंट्री, रिकॉर्ड संभालना और कुछ जरूरी प्रक्रियाएँ.

शुरुआत में उसे कई चीजें समझ नहीं आईं.

दो बार उससे छोटी- सी गलती भी हुई.

लेकिन उसने तुरंत उसे ठीक किया.

अमित ने कहा—

तुम जल्दी सीख रहे हो।

राहुल मुस्कुराया.

बस कोशिश कर रहा हूँ।

दोपहर के खाने के समय बाकी कर्मचारी कैंटीन चले गए.

राहुल भी उनके साथ गया.

वह एक कोने में बैठकर खाना खाने लगा.

अमित उसके पास बैठ गया.

तुम कहाँ से हो?

राहुल ने कुछ पल सोचा.

फिर बोला—

यहीं आसपास से।

परिवार?

राहुल का हाथ रुक गया.

नहीं।

अमित ने उसकी आँखों में कुछ देखा.

सॉरी।

कोई बात नहीं।

राहुल ने बात बदल दी.

तुम यहाँ कब से काम कर रहे हो?

अमित ने मुस्कुराकर जवाब दिया—

तीन साल से।

दोनों बातें करने लगे.

धीरे- धीरे राहुल का डर कम होने लगा.

शाम तक उसने काफी काम सीख लिया था.

काम खत्म होने से कुछ देर पहले उसके फोन पर एक मैसेज आया.

अंजलि: पहला दिन कैसा रहा?

राहुल के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई.

उसने जवाब दिया—

अच्छा रहा मैम. काम थोडा मुश्किल था, लेकिन सीख रहा हूँ।

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

मुझे पता था तुम कर लोगे. घर जल्दी आना।

राहुल ने स्क्रीन को कुछ पल देखा.

उसके चेहरे पर एक अलग ही सुकून था.

उसने फोन जेब में रखा और काम खत्म करने लगा.

शाम को ऑफिस से बाहर निकलते समय अमित ने पूछा—

राहुल, घर साथ चलोगे?

राहुल ने मुस्कुराकर कहा—

आज मुझे थोडा जल्दी जाना है।

ठीक है. कल मिलते हैं।

हाँ।

राहुल बाहर निकल आया.

उसके कदमों में आज थकान थी, लेकिन दिल में संतोष था.

पहली बार उसे लगा कि वह अपनी जिंदगी को दोबारा बना सकता है.

उधर घर पर अंजलि उसका इंतजार कर रही थी.

दरवाजा खुला.

राहुल अंदर आया.

अंजलि ने तुरंत पूछा—

आ गए?

जी मैम।

कैसा रहा पहला दिन?

राहुल मुस्कुराया.

बहुत अच्छा।

किसी ने परेशान तो नहीं किया?

नहीं।

फिर राहुल अचानक बोला—

हाँ, एक आदमी थोडा अजीब लगा।

अंजलि का चेहरा गंभीर हो गया.

कौन?

नाम रोहित है।

क्या किया उसने?

कुछ नहीं. बस उसका व्यवहार थोडा अलग लगा।

अंजलि ने कहा—

काम पर ध्यान देना. हर किसी को समझने में समय लगता है।

जी।

राहुल अपने कमरे की तरफ जाने लगा.

लेकिन तभी अंजलि की नजर उसके हाथ पर पडी.

रुको।

राहुल पलटा.

क्या हुआ?

तुम्हारे हाथ पर ये चोट कैसे लगी?

राहुल ने अपने हाथ की तरफ देखा.

शायद ऑफिस की किसी फाइल के किनारे से हल्की खरोंच लगी थी.

कुछ नहीं मैम. छोटी- सी चोट है।

अंजलि उसके पास आई.

बैठो।

मैम, इसकी जरूरत नहीं है।

बैठो राहुल।

अंजलि ने फर्स्ट- एड बॉक्स निकाला और उसकी चोट पर दवा लगाने लगी.

राहुल चुपचाप उसे देखता रहा.

उसके मन में फिर वही सवाल उठा—

अंजलि उसकी इतनी परवाह क्यों करती थी?

लेकिन इस बार उसके मन में एक और सवाल था.

रोहित उसे देखकर इतना अजीब क्यों व्यवहार कर रहा था?

राहुल नहीं जानता था कि उसकी नई नौकरी के साथ उसकी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी प्रवेश कर चुके हैं, जिनका असर आने वाले दिनों में उसकी जिंदगी पर बहुत गहरा पडने वाला था.

और यह तो सिर्फ शुरुआत थी.