This is one-sided love - Part 23 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 23

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 23

सुबह से ही कंपनी की बिल्डिंग में एक अलग तरह की हलचल थी।

कल तक जिस राहुल को ज्यादातर कर्मचारी सिर्फ एक साधारण कर्मचारी समझते थे, आज उसी राहुल की चर्चा हर डिपार्टमेंट में हो रही थी।

कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की रिपोर्ट आज बोर्ड के सामने रखी जानी थी।

यह वही प्रोजेक्ट था, जिसमें कंपनी के कई अनुभवी कर्मचारी महीनों से लगे हुए थे। प्रोजेक्ट में लगातार समस्याएं आ रही थीं और डेडलाइन भी करीब थी।

लेकिन राहुल ने सिर्फ कुछ दिनों में उस प्रोजेक्ट की पूरी दिशा बदल दी थी।

उसने पुराने सिस्टम की कमियां खोजीं, नई रणनीति बनाई और पूरी टीम को एक अलग तरीके से काम करने के लिए तैयार किया।

सबसे हैरानी की बात यह थी कि राहुल ने यह सब बिना किसी दिखावे के किया था।

उसे अपनी काबिलियत का घमंड नहीं था।

सुबह करीब ग्यारह बजे मीटिंग शुरू हुई।

बोर्ड रूम में कंपनी के बड़े अधिकारी मौजूद थे।

अंजलि भी अपनी सीट पर बैठी थी।

राहुल स्क्रीन के सामने खड़ा था।

उसके हाथ में कुछ फाइलें थीं।

चेहरा शांत था, लेकिन आंखों में आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल किया,

“राहुल, अगर आपकी रणनीति इतनी अच्छी है तो क्या आपको भरोसा है कि इससे कंपनी को अपेक्षित परिणाम मिलेंगे?”

राहुल ने बिना घबराए जवाब दिया,

“सर, सौ प्रतिशत परिणाम की गारंटी कोई नहीं दे सकता। लेकिन अगर हम पुराने तरीके से काम करते रहे तो नुकसान लगभग तय है। मेरा तरीका जोखिम को कम करता है और कंपनी को लंबे समय में ज्यादा फायदा दे सकता है।”

कमरे में खामोशी छा गई।

अधिकारी ने दोबारा पूछा,

“और अगर आपकी रणनीति असफल हुई?”

राहुल ने कुछ सेकंड सोचा।

फिर बोला,

“तो जिम्मेदारी मेरी होगी।”

अंजलि ने उसकी तरफ देखा।

उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

यही राहुल था।

वह हमेशा अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता था।

प्रेजेंटेशन आगे बढ़ा।

राहुल ने आंकड़े समझाए, पुराने रिकॉर्ड दिखाए और नई रणनीति के फायदे बताए।

लगभग चालीस मिनट बाद उसकी प्रस्तुति खत्म हुई।

राहुल ने रिमोट नीचे रखा।

“बस इतना ही, सर।”

कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।

फिर कंपनी के चेयरमैन ने धीरे से ताली बजाई।

“Excellent work, Rahul.”

उनकी आवाज सुनते ही बाकी अधिकारी भी तालियां बजाने लगे।

पूरा कमरा तालियों से गूंज उठा।

राहुल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

लेकिन उसकी नजर सबसे पहले अंजलि पर गई।

अंजलि भी तालियां बजा रही थी।

उसकी आंखों में खुशी थी।

बहुत गहरी खुशी।

राहुल ने हल्का-सा सिर झुका दिया।

मीटिंग खत्म हो गई।

लोग एक-एक करके बाहर जाने लगे।

कुछ कर्मचारी राहुल के पास आए।

“भाई, कमाल कर दिया।”

“इतनी जल्दी पूरा सिस्टम समझ कैसे लिया?”

“तुम्हारे दिमाग में आखिर चलता क्या है?”

राहुल हंस दिया।

“मुझे खुद नहीं पता।”

एक कर्मचारी ने मजाक किया,

“तुम जरूर पहले से किसी बड़ी कंपनी में काम करते होंगे।”

राहुल की मुस्कान अचानक हल्की पड़ गई।

उसके दिमाग में कुछ चमका।

एक बड़ा ऑफिस...

कुछ लोग...

एक टेबल...

और किसी की आवाज—

“राहुल, तुम्हें इससे कहीं ज्यादा बड़ा काम करना है।”

राहुल ने तुरंत आंखें बंद कर लीं।

तस्वीर गायब हो गई।

“राहुल?”

अंजलि की आवाज सुनकर उसने आंखें खोलीं।

“जी, मैम?”

“तुम ठीक हो?”

“हां।”

अंजलि ने उसे ध्यान से देखा।

“कुछ याद आया?”

राहुल कुछ पल चुप रहा।

“बस... एक धुंधली-सी तस्वीर।”

अंजलि के दिल की धड़कन तेज हो गई।

“क्या देखा?”

“याद नहीं।”

राहुल ने अपना माथा दबाया।

“लेकिन ऐसा लगता है जैसे मैं पहले भी इसी तरह का काम कर चुका हूं।”

अंजलि ने धीमे से कहा,

“शायद तुम्हारा अतीत तुम्हें धीरे-धीरे याद आ रहा है।”

राहुल ने उसकी तरफ देखा।

“मैम, कभी-कभी मुझे डर लगता है।”

“किस बात का?”

“इस बात का कि अगर मुझे सब कुछ याद आ गया... तो शायद मेरी जिंदगी फिर बदल जाएगी।”

अंजलि कुछ पल चुप रही।

फिर उसने कहा,

“बदलाव हमेशा बुरा नहीं होता, राहुल।”

राहुल उसे देखता रहा।

अंजलि मुस्कुराई।

“तुम्हें अपने अतीत से डरने की जरूरत नहीं है। तुम आज जो हो, वो भी कम नहीं है।”

राहुल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

“Thank you, मैम।”

अंजलि ने सिर हिलाया।

“और हां... आज तुमने बहुत अच्छा काम किया।”

“मैंने तो बस अपना काम किया है।”

“नहीं।”

अंजलि की आवाज में गर्व था।

“तुमने सिर्फ काम नहीं किया। तुमने उन लोगों को गलत साबित किया जिन्होंने तुम्हें कमजोर समझा था।”

राहुल कुछ नहीं बोला।

अंजलि ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,

“मुझे तुम पर गर्व है।”

ये शब्द सुनते ही राहुल कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल शांत हो गया।

उसके दिल में एक अजीब-सी गर्माहट पैदा हुई।

वह समझ नहीं पा रहा था कि अंजलि के मुंह से ये शब्द सुनकर उसे इतनी खुशी क्यों हो रही थी।

उसने बस धीरे से कहा,

“Thank you, मैम।”

अंजलि मुस्कुराई।

लेकिन उसके भीतर एक अलग ही कहानी चल रही थी।

कभी राहुल ने उससे कहा था—

“एक दिन मैं ऐसा मुकाम हासिल करूंगा कि तुम्हें मुझ पर गर्व होगा।”

तब अंजलि ने हंसकर कहा था,

“मुझे तुम्हारे बड़े आदमी बनने का इंतजार नहीं है।”

आज वही राहुल उसके सामने खड़ा था।

लेकिन उसे कुछ याद नहीं था।

अंजलि की आंखें भर आईं।

उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

राहुल ने पूछा,

“मैम, आप ठीक हैं?”

“हां।”

“आपकी आंखों में आंसू हैं।”

अंजलि ने तुरंत मुस्कुराते हुए कहा,

“खुशी के हैं।”

राहुल चुप हो गया।

वह उसकी बात समझ नहीं पाया।

कुछ देर बाद राहुल वहां से चला गया।

अंजलि अकेली खड़ी उसे जाते हुए देखती रही।

उसके कदमों में अब पहले जैसी कमजोरी नहीं थी।

राहुल बदल रहा था।

वह अपने पैरों पर खड़ा हो रहा था।

और अंजलि को सबसे ज्यादा खुशी इसी बात की थी।

वह चाहती तो राहुल को उसके अतीत के बारे में सब कुछ बता सकती थी।

उसे बता सकती थी कि वह कौन है।

लेकिन वह राहुल पर कोई दबाव नहीं डालना चाहती थी।

वह चाहती थी कि राहुल खुद अपने अतीत तक पहुंचे।

उसी शाम अंजलि अपने केबिन में बैठी थी।

उसने दराज खोली।

अंदर एक पुरानी तस्वीर रखी थी।

तस्वीर में वह और राहुल साथ खड़े थे।

अंजलि ने तस्वीर हाथ में ली।

उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई।

“देख रहे हो राहुल?”

उसने तस्वीर से कहा,

“आज फिर तुमने मुझे गर्व करने का मौका दिया।”

तभी उसका फोन बजा।

स्क्रीन पर एक अनजान नंबर था।

अंजलि ने कॉल उठाई।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही।

फिर एक भारी आवाज आई—

“तुम राहुल के बहुत करीब जा रही हो।”

अंजलि का चेहरा गंभीर हो गया।

“आप कौन हैं?”

“तुम्हें जितना जानना चाहिए, उतना जान चुकी हो।”

“राहुल के बारे में आप क्या जानते हैं?”

दूसरी तरफ से हल्की हंसी सुनाई दी।

“राहुल कौन है... ये अगर तुम्हें पता चल गया, तो तुम्हारे पिता का सबसे बड़ा राज भी तुम्हारे सामने आ जाएगा।”

अंजलि के हाथ कांप गए।

“मेरे पिता का?”

कॉल अचानक कट गई।

अंजलि कुछ सेकंड तक फोन को देखती रही।

फिर उसने धीरे से राहुल की तस्वीर उठाई।

उसके चेहरे पर अब खुशी नहीं थी।

सिर्फ चिंता थी।

उसे समझ आ गया था कि राहुल की जिंदगी में लौटती उसकी पहचान सिर्फ एक खोई हुई याद नहीं थी।

उस पहचान के पीछे कोई ऐसा राज था, जिसे कुछ लोग आज भी छिपाना चाहते थे।

और शायद...

इसीलिए राहुल को सालों पहले दुनिया से गायब कर दिया गया था।

अंजलि ने दृढ़ आवाज में कहा—

“चाहे कुछ भी हो जाए, राहुल... अब मैं तुम्हें दोबारा नहीं खोने दूंगी।”

उधर राहुल ऑफिस से बाहर निकल रहा था।

अचानक वह गेट के पास रुक गया।

उसके दिमाग में फिर वही आवाज गूंजी—

“राहुल... अगर कभी तुम्हें अपने अतीत की तलाश करनी पड़े, तो R को याद रखना।”

राहुल ने पीछे मुड़कर ऑफिस की बिल्डिंग को देखा।

उसके चेहरे पर सवाल था।

R कौन था?

और उसे क्यों लग रहा था कि उसकी पूरी जिंदगी का सबसे बड़ा राज इसी एक अक्षर के पीछे छिपा है?