ऑफिस में रात के करीब आठ बज चुके थे।
एक-एक करके कर्मचारी घर जा चुके थे।
पूरी बिल्डिंग में अब सिर्फ कुछ ही कमरों की लाइट जल रही थी।
अंजलि अपने केबिन में बैठी लैपटॉप पर काम कर रही थी।
सामने फाइलों का ढेर लगा था।
लेकिन उसका ध्यान बार-बार घड़ी की तरफ जा रहा था।
उसे उम्मीद थी कि राहुल भी अब तक घर चला गया होगा।
तभी केबिन के बाहर से आवाज आई—
“मैम?”
अंजलि ने सिर उठाया।
दरवाजे पर राहुल खड़ा था।
“तुम अभी तक गए नहीं?”
“एक रिपोर्ट पूरी करनी थी।”
“कल कर लेते।”
“कल प्रोजेक्ट की दूसरी मीटिंग है। सोचा आज ही खत्म कर दूं।”
अंजलि ने उसे कुछ सेकंड देखा।
फिर बोली,
“तुम काम को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लेते हो।”
राहुल मुस्कुराया।
“शायद।”
“शायद नहीं। पक्का।”
राहुल हंस पड़ा।
अंजलि को उसके चेहरे पर आई मुस्कान देखकर अच्छा लगा।
वह कुछ पल उसे देखती रही।
राहुल ने पूछा,
“क्या हुआ?”
“कुछ नहीं।”
“आप मुझे ऐसे क्यों देख रही थीं?”
अंजलि थोड़ा झेंप गई।
“बस देख रही थी।”
राहुल ने सिर हिलाया और अपनी फाइल उठाने लगा।
तभी अंजलि ने कहा,
“बैठो।”
“जी?”
“चाय पियोगे?”
राहुल थोड़ा हैरान हुआ।
“आप चाय बनाएंगी?”
“क्यों? मैं चाय नहीं बना सकती?”
“ऐसा नहीं है।”
“तो?”
“आप कंपनी की बॉस हैं।”
अंजलि मुस्कुराई।
“ऑफिस में बॉस हूं। चाय के लिए नहीं।”
वह केबिन से बाहर चली गई।
कुछ मिनट बाद वह दो कप चाय लेकर वापस आई।
एक कप राहुल के सामने रख दिया।
“लो।”
राहुल ने कप उठाया।
“Thank you, मैम।”
दोनों कुछ देर चुपचाप चाय पीते रहे।
केबिन में अजीब-सी शांति थी।
अंजलि को इस खामोशी में भी सुकून महसूस हो रहा था।
उसे याद आया कि कभी वह और राहुल घंटों बिना कुछ कहे एक-दूसरे के पास बैठा करते थे।
उसे आश्चर्य हुआ कि इतने साल बाद भी राहुल के साथ बैठना उसे वैसा ही सुकून देता था।
लेकिन राहुल के लिए यह सिर्फ एक शांत शाम थी।
उसके लिए अंजलि एक अच्छी बॉस थी।
शायद उससे थोड़ी ज्यादा अच्छी।
लेकिन वह उस भावना को कोई दूसरा नाम नहीं दे सकता था।
राहुल ने चाय का कप नीचे रखा।
“मैम, एक बात पूछूं?”
“हां।”
“आप मेरी इतनी मदद क्यों करती हैं?”
अंजलि कुछ पल के लिए चुप हो गई।
“क्योंकि तुम इसके लायक हो।”
“लेकिन आपने मुझे सड़क से उठाकर घर दिया, नौकरी दी, मेरा इलाज कराया... इतना सब कोई किसी अनजान आदमी के लिए नहीं करता।”
अंजलि की आंखों में हल्की नमी आ गई।
“शायद तुम मेरे लिए पूरी तरह अनजान नहीं हो।”
राहुल ने उसकी तरफ देखा।
“मतलब?”
अंजलि तुरंत संभल गई।
“मेरा मतलब है... मुझे लगता है कि मैं तुम्हें पहले से जानती हूं।”
राहुल ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“लेकिन मुझे तो कुछ याद नहीं।”
“मुझे पता है।”
कुछ सेकंड दोनों के बीच खामोशी रही।
राहुल ने धीरे से पूछा,
“क्या मैं कभी आपको पहचान पाऊंगा?”
अंजलि का दिल जोर से धड़क उठा।
“शायद।”
“और अगर नहीं पहचान पाया तो?”
अंजलि ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
“तो मैं इंतजार करूंगी।”
राहुल इस जवाब का मतलब नहीं समझ पाया।
“किस चीज का?”
अंजलि हल्का-सा मुस्कुराई।
“तुम्हारी याददाश्त का।”
राहुल भी मुस्कुरा दिया।
“आप बहुत अजीब हैं, मैम।”
“और तुम बहुत सवाल करते हो।”
दोनों हंस पड़े।
उसी समय बाहर तेज बारिश शुरू हो गई।
कुछ देर बाद राहुल ने खिड़की से बाहर देखा।
“बारिश बहुत तेज है।”
अंजलि ने भी बाहर देखा।
“तुम आज मेरे साथ चलना।”
“मैं?”
“हां।”
“मैं खुद चला जाऊंगा।”
“रात बहुत हो गई है।”
“मैं संभाल लूंगा।”
अंजलि ने थोड़ा सख्त होकर कहा,
“मैंने कहा ना, साथ चलना।”
राहुल ने मुस्कुराते हुए सिर हिला दिया।
“जी, मैम।”
कुछ देर बाद दोनों ऑफिस से बाहर निकले।
बारिश लगातार हो रही थी।
अंजलि ने छाता खोला।
लेकिन हवा इतनी तेज थी कि छाता बार-बार एक तरफ झुक रहा था।
राहुल ने उसका हाथ पकड़कर छाता ठीक कर दिया।
अंजलि अचानक रुक गई।
राहुल ने तुरंत हाथ हटा लिया।
“Sorry।”
अंजलि ने कुछ नहीं कहा।
उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।
कभी राहुल इसी तरह बारिश में उसका हाथ पकड़ा करता था।
उसे सब याद था।
राहुल को कुछ भी याद नहीं था।
दोनों कार तक पहुंचे।
अंजलि ड्राइविंग सीट पर बैठी।
राहुल उसके बगल में बैठ गया।
कार चल पड़ी।
कुछ किलोमीटर तक दोनों शांत रहे।
फिर राहुल ने अचानक पूछा,
“मैम, क्या आपको बारिश पसंद है?”
अंजलि मुस्कुराई।
“बहुत।”
“मुझे भी।”
“तुम्हें कैसे पता?”
राहुल कुछ पल सोचता रहा।
“पता नहीं। बस लगता है।”
अंजलि ने उसकी तरफ देखा।
शायद कुछ यादें उसके भीतर अब भी जिंदा थीं।
बस उन्हें बाहर आने का रास्ता नहीं मिल रहा था।
कुछ देर बाद राहुल ने सीट से सिर टिकाया।
“आपके साथ बैठकर मुझे अजीब-सा सुकून मिलता है।”
अंजलि का हाथ स्टीयरिंग पर ठहर गया।
उसने कुछ नहीं कहा।
राहुल ने आगे कहा,
“पता नहीं क्यों।”
अंजलि की आंखों में आंसू आ गए।
लेकिन उसने उन्हें गिरने नहीं दिया।
“शायद इसलिए क्योंकि तुम्हें मुझ पर भरोसा है।”
राहुल ने धीरे से कहा,
“हां... शायद।”
कार आगे बढ़ती रही।
लेकिन दोनों के बीच की दूरी पहले जैसी नहीं रही थी।
अब राहुल अंजलि के साथ सहज महसूस करने लगा था।
वह अपनी परेशानियां उससे साझा करने लगा था।
अंजलि भी उसकी छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखने लगी थी।
लेकिन इस बढ़ती नजदीकी के पीछे एक बड़ा सच छिपा था।
अंजलि जानती थी कि वह राहुल से प्यार करती है।
राहुल अभी उस प्यार से अनजान था।
उसके लिए अंजलि एक भरोसेमंद इंसान थी।
एक ऐसी महिला, जिसके पास रहकर उसे खुद को सुरक्षित महसूस होता था।
कार राहुल के घर के सामने रुकी।
राहुल उतरने लगा।
फिर अचानक पीछे मुड़ा।
“मैम।”
“हां?”
“आज के लिए धन्यवाद।”
“किसलिए?”
“चाय के लिए... साथ आने के लिए... और मेरी जिंदगी में आने के लिए।”
अंजलि की आंखें नम हो गईं।
वह मुस्कुराई।
“Good night, राहुल।”
“Good night, मैम।”
राहुल अंदर चला गया।
अंजलि कुछ देर तक वहीं बैठी उसे देखती रही।
फिर उसकी नजर सड़क के दूसरी तरफ गई।
एक काली कार कुछ दूरी पर खड़ी थी।
उसकी खिड़की के पीछे कोई बैठा हुआ था।
अंजलि को लगा जैसे कोई उन्हें काफी देर से देख रहा था।
उसने ध्यान से देखने की कोशिश की।
लेकिन कार अचानक स्टार्ट हुई और अंधेरे में गायब हो गई।
अंजलि का चेहरा गंभीर हो गया।
उसे समझ आ गया—
राहुल के करीब आना सिर्फ उसकी भावनाओं के लिए खतरा नहीं था।
कोई और भी था, जिसे राहुल और अंजलि की बढ़ती नजदीकियां बिल्कुल पसंद नहीं थीं।
और उस रात पहली बार...
अंजलि को महसूस हुआ कि राहुल की जिंदगी में छिपा अतीत अब सिर्फ यादों के रूप में नहीं...
बल्कि एक खतरे के रूप में वापस लौट रहा था।