This is one-sided love - Part 26 in Hindi Love Stories by Ankit Khatri books and stories PDF | एकतरफा प्यार है ये - भाग 26

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एकतरफा प्यार है ये - भाग 26



रात काफी हो चुकी थी।

शहर की ज्यादातर सड़कें सुनसान हो गई थीं।

राहुल अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आंखों में नींद नहीं थी।

बार-बार उसके दिमाग में वही पुरानी तस्वीर घूम रही थी।

तस्वीर में खड़ा वह युवक...

वही राहुल था।

लेकिन उसके साथ खड़े लोग कौन थे?

और तस्वीर के पीछे लिखे तीन शब्द—

“Trust no one.”

राहुल ने आंखें बंद कर लीं।

“मैं आखिर कौन था?”

उसने खुद से सवाल किया।

कोई जवाब नहीं मिला।

धीरे-धीरे उसकी आंखें भारी होने लगीं।

कुछ ही देर में वह गहरी नींद में चला गया।

और तभी...

उसके सामने एक बिल्कुल अलग दुनिया खुल गई।

चारों तरफ हरियाली थी।

हल्की बारिश हो रही थी।

आसमान बादलों से घिरा था।

राहुल एक सुनसान रास्ते पर खड़ा था।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह यहां कैसे पहुंचा।

तभी पीछे से किसी लड़की की हंसी सुनाई दी।

राहुल ने पलटकर देखा।

एक लड़की बारिश में खड़ी थी।

उसके हाथ में नीला छाता था।

चेहरे पर वही मुस्कान...

वही आंखें...

राहुल कुछ पल उसे देखता रह गया।

फिर लड़की ने मुस्कुराकर कहा—

“इतनी देर क्यों कर दी?”

राहुल के दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई।

“तुम...?”

लड़की उसके पास आई।

“तुम्हें हमेशा देर होती है।”

राहुल ने उसका चेहरा देखने की कोशिश की।

“मैं तुम्हें जानता हूं?”

लड़की हंसने लगी।

“इतनी जल्दी भूल गए?”

राहुल कुछ बोल नहीं पाया।

अचानक हवा तेज हुई।

लड़की का दुपट्टा हवा में उड़ने लगा।

राहुल ने हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लिया।

जैसे ही उसने उसका हाथ पकड़ा...

उसके दिमाग में एक के बाद एक तस्वीरें चमकने लगीं।

वह और वही लड़की साथ चल रहे थे।

कॉलेज जैसा कोई स्थान...

दोनों चाय पी रहे थे।

लड़की राहुल से नाराज थी।

फिर वही लड़की मुस्कुराते हुए राहुल को देख रही थी।

और अचानक एक दृश्य आया—

राहुल उस लड़की के सामने घुटनों के बल बैठा था।

उसके हाथ में एक छोटा-सा फूल था।

लड़की की आंखों में आंसू थे।

फिर राहुल ने उसकी तरफ देखकर कहा—

“अंजलि, मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा।”

राहुल का दिल जोर से धड़कने लगा।

“अंजलि...”

उसने सपने में ही नाम दोहराया।

लड़की मुस्कुराई।

“अब याद आया?”

राहुल उसके पास जाने लगा।

लेकिन तभी सब कुछ बदल गया।

बारिश तेज हो गई।

चारों तरफ अंधेरा छा गया।

दूर से किसी कार की हेडलाइट दिखाई दी।

एक आदमी चिल्ला रहा था—

“राहुल! भागो!”

राहुल ने पीछे मुड़कर देखा।

कुछ लोग उसकी तरफ दौड़ रहे थे।

फिर अचानक तेज आवाज हुई।

एक कार...

ब्रेक की चीखती आवाज...

और राहुल सड़क पर गिर गया।

अंजलि चीख रही थी—

“राहुल!”

राहुल ने हाथ बढ़ाया।

“अंजलि...!”

लेकिन अंजलि उससे दूर होती चली गई।

राहुल पूरी ताकत से उसकी तरफ दौड़ने लगा।

“अंजलि!”

अचानक एक तेज आवाज हुई।

राहुल की आंखें खुल गईं।

वह अपने बिस्तर पर बैठा था।

उसकी सांसें तेज चल रही थीं।

माथे पर पसीना था।

कमरे में अंधेरा था।

उसने चारों तरफ देखा।

वह अकेला था।

“अंजलि...”

उसके मुंह से फिर वही नाम निकला।

राहुल ने अपने सीने पर हाथ रखा।

दिल बहुत तेज धड़क रहा था।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह सपना था या कोई पुरानी याद।

लेकिन एक बात बिल्कुल साफ थी—

उस सपने में अंजलि थी।

और वह अंजलि को सिर्फ जानता नहीं था...

वह उससे बहुत करीब था।

राहुल बिस्तर से उठा और खिड़की के पास चला गया।

बाहर सुबह की हल्की रोशनी दिखाई देने लगी थी।

उसने अपने चेहरे को शीशे में देखा।

“अंजलि...”

उसने धीरे से नाम दोहराया।

उसी वक्त दरवाजे पर दस्तक हुई।

“राहुल?”

अंजलि की आवाज थी।

राहुल कुछ पल के लिए जम गया।

वही आवाज...

ठीक वही आवाज जो उसने सपने में सुनी थी।

उसने जल्दी से दरवाजा खोला।

सामने अंजलि खड़ी थी।

“तुम ठीक हो?”

राहुल उसे लगातार देखता रहा।

अंजलि ने पूछा,

“क्या हुआ?”

राहुल ने अचानक कहा,

“मैंने आपको सपने में देखा।”

अंजलि का चेहरा बदल गया।

“क्या?”

“हां।”

अंजलि की धड़कन तेज हो गई।

“सपने में... क्या हुआ था?”

राहुल ने आंखें बंद करके याद करने की कोशिश की।

“बारिश थी।”

अंजलि बिल्कुल शांत हो गई।

“फिर?”

“आपके हाथ में नीला छाता था।”

अंजलि की आंखें फैल गईं।

वह कुछ बोल नहीं पाई।

क्योंकि राहुल की बात बिल्कुल सही थी।

छह साल पहले...

वह और राहुल एक बारिश वाली शाम इसी तरह मिले थे।

अंजलि ने धीरे से पूछा,

“और?”

राहुल ने उसकी तरफ देखा।

“आपने मुझे कहा था... कि मैं हमेशा देर करता हूं।”

अंजलि की आंखों में आंसू आ गए।

वह मुंह फेरकर खड़ी हो गई।

राहुल ने पूछा,

“क्या ये सच था?”

अंजलि ने कुछ नहीं कहा।

“मैम?”

अंजलि ने धीरे से अपनी आंखें पोंछीं।

“हो सकता है।”

“और मैंने आपको सपने में एक नाम से बुलाया।”

अंजलि ने डरते हुए पूछा,

“कौन सा नाम?”

राहुल ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—

“अंजलि।”

अंजलि के हाथ कांपने लगे।

राहुल को यह नाम कैसे याद आया?

उसने तो कभी राहुल को अपने पुराने रिश्ते की पूरी सच्चाई नहीं बताई थी।

राहुल ने आगे कहा,

“मुझे नहीं पता क्यों... लेकिन सपने में ऐसा लग रहा था कि आप मेरे लिए बहुत खास थीं।”

अंजलि के होंठ कांपे।

वह कुछ कहना चाहती थी।

बहुत कुछ कहना चाहती थी।

लेकिन उसने खुद को रोक लिया।

“राहुल...”

“जी?”

“अगर तुम्हें यादें आने लगें तो घबराना मत।”

“क्या मेरी याददाश्त वापस आ रही है?”

अंजलि ने उसकी तरफ देखा।

“शायद।”

राहुल की आंखों में उम्मीद जागी।

“तो मैं अपना पूरा अतीत याद कर सकता हूं?”

“हां।”

“और शायद ये भी याद कर सकूं कि मैं आपको पहले से क्यों जानता था?”

अंजलि ने धीमे से कहा,

“शायद।”

राहुल ने सिर पकड़ लिया।

अचानक उसके दिमाग में फिर वही सड़क दिखाई दी।

बारिश...

कार...

अंजलि की चीख...

और एक आदमी का चेहरा।

राहुल की सांस रुक गई।

उसने आंखें खोल दीं।

“मैंने किसी को देखा।”

अंजलि घबरा गई।

“किसे?”

राहुल ने आंखें बंद करके याद करने की कोशिश की।

लेकिन चेहरा धुंधला था।

सिर्फ उसकी कलाई दिखाई दे रही थी।

और उस कलाई पर वही निशान था...

जो पुरानी तस्वीर में दिखाई दिया था।

राहुल ने धीरे से कहा—

“वही निशान...”

अंजलि के चेहरे का रंग उड़ गया।

अब यह सिर्फ सपना नहीं था।

राहुल की याददाश्त सच में लौटने लगी थी।

लेकिन उसके साथ-साथ वह रात भी वापस आ रही थी...

जिस रात राहुल उसकी जिंदगी से गायब हुआ था।

अंजलि ने राहुल की तरफ देखा।

उसकी आंखों में डर और उम्मीद दोनों थे।

क्योंकि अगर राहुल को सब कुछ याद आ गया...

तो उसे अपने प्यार की याद भी आएगी।

लेकिन शायद...

उसे यह भी याद आ जाएगा कि उसके साथ हुआ क्या था।

और उस सच का सामना करने के लिए...

क्या अंजलि तैयार थी?

राहुल की याददाश्त लौट रही थी।

लेकिन हर लौटती याद के साथ...

एक पुराना दुश्मन भी उसके करीब आ रहा था।