CRAVE - Part - 12 in Hindi Thriller by Aarika Shadow books and stories PDF | CRAVE - Part - 12

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CRAVE - Part - 12

दृश्य वहीं से शुरू होता है...

युई धीरे से अपना फोन नीचे रख देती है।

उसकी आँखों से निकला आँसू का एक कतरा गाल पर बह जाता है।

वह उसे हल्के से पोंछती है, फिर अपने पेट पर हाथ रखकर मुस्कुराने की कोशिश करती है।

"कोई बात नहीं, बच्चा... 😊"

"अगर पापा से बात नहीं हुई, तो ज़रूर किसी ज़रूरी काम में बिज़ी होंगे।"

उसने गहरी साँस ली और खुद को संभालते हुए नीचे चली गई।

---

डाइनिंग हॉल...

समर जैसे उसी का इंतज़ार कर रहा था।

युई को देखते ही बोला—

"आइए, भाभी जी।"

युई हल्की मुस्कान के साथ बोली—

"हाँ... लंच का समय हो गया है ना।"

"और आपने भी अभी तक कुछ नहीं खाया होगा।"

"चलिए, साथ में खाना खाते हैं।"

यह सुनकर समर ने राहत की साँस ली।

---

कुछ देर बाद...

डाइनिंग टेबल पर...

युई, समर और रामू काका साथ बैठे थे।

युई ने कहा—

"रामू काका, ज़रा सब्ज़ी दीजिए... खत्म हो गई है।"

"जी, बड़ी मालकिन।"

रामू काका ने प्लेट में सब्ज़ी परोस दी।

समर चुपचाप सब देख रहा था।

तभी खाते-खाते युई ने पूछा—

"समर जी..."

"आपको पता है ना... हसबैंड कहाँ गए हैं?"

यह सुनते ही समर का हाथ एक पल के लिए रुक गया।

उसके चेहरे पर हल्की बेचैनी आ गई।

लेकिन अगले ही पल उसने मुस्कुराने की कोशिश की।

"क्यों, भाभी जी?"

"क्या हुआ?"

युई ने धीमे स्वर में कहा—

"बस... कल सुबह से नहीं हैं।"

"इसलिए पूछ रही थी।"

समर ने नज़रें झुका लीं।

"सॉरी, भाभी जी..."

"मुझे सच में नहीं पता कि वो कहाँ हैं।"

युई कुछ पल चुप रही।

फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली—

"कोई बात नहीं..."

"आराम से खाइए।"

उसके बाद दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी फैल गई।

---

कुछ देर बाद...

हॉल में...

समर जाने लगा।

"तो मैं चलता हूँ, भाभी जी।"

"अगर किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो, तो मुझे ज़रूर बताइएगा।"

युई मुस्कुराकर बोली—

"जी..."

"आप भी अपना ध्यान रखिए।"

समर ने एक बार मुड़कर युई को देखा...

और वहाँ से चला गया।

---

दूसरी ओर... दिल्ली...

एक सुनसान सड़क...

जुशेंग कुर्सी से बँधा हुआ बैठा था।

उसके सामने लाल रंग का मास्क पहने एक लड़का खड़ा था।

जुशेंग होंठों पर हल्की मुस्कान लाते हुए बोला—

"इतनी हिम्मत..."

"मुझे बाँधोगे?"

लड़का हँस पड़ा।

"हमें सिर्फ़ तुम्हें तड़पाने का ऑर्डर मिला है..."

"मारने का नहीं।"

जुशेंग ज़ोर से हँसने लगा।

"चूहे..."

"कब से शेर को मारने की बातें करने लगे?" 😏

लड़का बोला—

"हँस लो..."

"जब तक मालिक का नया ऑर्डर नहीं आ जाता।"

इतने में...

धाँय! धाँय! 🔫

चारों तरफ गोलियों की आवाज़ गूँज उठी।

काले मास्क पहने लोग अचानक अंदर घुस आए।

दोनों तरफ से भयंकर गोलीबारी शुरू हो गई।

कुछ ही देर में पूरा इलाका शांत हो गया।

जुशेंग अब आज़ाद खड़ा था।

उसके पास एक युवक आया।

"बॉस..."

"सब खत्म हो गया।"

वह सेरा था।

जुशेंग ने ठंडी आवाज़ में कहा—

"अब देखते हैं..."

"मालिक अगली चाल क्या चलता है।"

सेरा बोला—

"बॉस, रात की फ्लाइट तैयार है।"

जुशेंग ने गहरी साँस ली।

"ठीक है।"

"यहाँ कुछ लोगों को छोड़ दो।"

"मालिक की हर हरकत पर नज़र रखनी होगी।"

"जी बॉस।"

सेरा मुड़ने ही वाला था कि—

"सेरा..."

"जी बॉस?"

"तुम भी मेरे साथ चलोगे।"

"लेकिन बॉस..."

"चलो।"

"जी बॉस।"

---

वहीं...

वरेला विला...

युई अपने कमरे में थी।

थकान और मानसिक तनाव की वजह से उसकी आँखें भारी होने लगीं।

कुछ ही देर में वह गहरी नींद में सो गई। 😴

---

एक अंधेरा कमरा...

हल्की रोशनी में एक आदमी कुर्सी पर बैठा था।

उसकी डरावनी हँसी पूरे कमरे में गूँज रही थी।

उसके सामने खड़ा आदमी बोला—

"मालिक..."

"हमने रोकने की पूरी कोशिश की..."

"लेकिन जब तक हम पहुँचे..."

"सब खत्म हो चुका था।"

वह आदमी कोई और नहीं...

मालिक था।

उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

"यही तो मेरा प्लान था।"

"अब किंग को लगेगा कि सब शांत हो गया है।"

"और फिर..."

"वो बिना किसी डर के अपनी सबसे प्यारी पत्नी के पास लौट आएगा..."

"जिसकी पत्नी पहले से ही उससे नाराज़ है।"

"दोनों मिलेंगे..."

"और उसके बाद..."

"उन्हें फिर से अलग करने का मज़ा ही कुछ और होगा।" 😈

उसकी आँखों में एक अजीब सी दीवानगी थी।

सामने खड़ा आदमी हैरानी से उसे देख रहा था।

"लेकिन... लेडी बॉस?"

मालिक की आँखें लाल हो गईं।

"वो मेरी है..."

"सिर्फ़ मेरी।"

"और मैं उसे हासिल करके रहूँगा।"

"उस किंग से..."

"जिसने हमेशा मेरे रास्ते की हर चीज़ मुझसे छीन ली।"

इतना कहते ही उसकी आँखों के सामने अतीत की तस्वीर उभर आई...

---

फ्लैशबैक...

"माँ..."

"मुझे ये खिलौना बहुत पसंद है..."

एक छोटा बच्चा मासूमियत से बोला।

माँ ने सख्त आवाज़ में कहा—

"नहीं।"

"ये तुम्हारे बड़े भाई का है।"

"उसे दे दो।"

"लेकिन माँ..."

चटाक! 👋

एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा।

"जो कहा है, वही करो।"

बड़ा भाई मुस्कुराते हुए खिलौना लेकर चला गया।

छोटा बच्चा वहीं खड़ा रोता रह गया...

---

फ्लैशबैक समाप्त...

मालिक ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।

उनमें वर्षों की जलन...

अधूरापन...

और सब कुछ छीन लेने की ज़िद साफ दिखाई दे रही थी।

"इस बार नहीं..."

"बचपन से लेकर आज तक..."

"हर चीज़ उसे मिली..."

"और मेरे हिस्से में सिर्फ़ खाली हाथ आए।"

"अब बहुत हो गया..."

"इस बार मैं छीनूँगा।"

"फिर देखेंगे..."

"अपने प्यारे किंग को कितना दर्द होता है..." 😈

इतना कहकर वह फिर से ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा।

उसकी हँसी पूरे अंधेरे कमरे में गूँज उठी...

अगला दृश्य...

मालिक इतना कहकर वहाँ से जाने लगा।

उसके चेहरे पर अब भी वही रहस्यमयी मास्क था।

---

कुछ देर बाद...

एक काली कार आकर एक बहुत बड़े बंगले के सामने रुकी।

पूरा बंगला सफेद और आसमानी (स्काई ब्लू) रंग से सजा हुआ था।

चारों तरफ़ सिर्फ़ आसमानी रंग के खूबसूरत फूल खिले हुए थे। 🌸

हल्की ठंडी हवा चल रही थी।

वहाँ की शांति किसी स्वर्ग से कम नहीं लग रही थी।

बंगले का हर कोना बेहद सलीके और खूबसूरती से सजाया गया था।

तभी कार का दरवाज़ा खुला।

मालिक नीचे उतरा।

उसका खतरनाक आभामंडल (Aura) अब भी वैसा ही था।

धीरे-धीरे वह अंदर जाने लगा।

तभी अचानक...

दो लोग दौड़ते हुए उसके सामने आकर घुटनों के बल गिर पड़े।

"प्लीज़... मालिक!"

"हमें बचा लीजिए।"

"हमसे गलती हो गई..."

मालिक उनके सामने झुक गया।

उसकी आवाज़ इस बार बेहद शांत और नरम थी।

"क्या हुआ?"

"आप लोग इस तरह क्यों रो रहे हैं?"

आदमी काँपती आवाज़ में बोला—

"मालिक..."

"हमारे बच्चे की तबीयत बहुत खराब है।"

"इलाज के लिए पैसों की बहुत ज़रूरत थी।"

"इसलिए... मजबूरी में हमने विला का एक सामान चुरा लिया।"

"हमें माफ़ कर दीजिए..."

"हमारा कोई गलत इरादा नहीं था।" 😢

मालिक कुछ पल तक उन्हें देखता रहा।

फिर उसने धीरे से उस औरत की आँखों से आँसू पोंछ दिए।

"कोई बात नहीं, सरला काकी..."

"लेकिन..."

"आपने मुझसे एक बार कहा क्यों नहीं?"

सरला काकी रोते हुए बोली—

"मालिक..."

"आपने हम लोगों के लिए पहले ही बहुत कुछ किया है।"

"अब और कैसे माँगते?"

मालिक हल्का-सा मुस्कुराया।

"नहीं, काकी..."

"आप लोगों की मदद करना मेरा फ़र्ज़ है।"

इतना कहकर उसने अपनी जेब से एक चेक निकाला और उनके हाथ में रख दिया।

"चिंता मत कीजिए..."

"सब ठीक हो जाएगा।"

सरला काकी की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।

"भगवान आपको हमेशा खुश रखे, मालिक..." 🙏

वह और उसका पति बार-बार उसे आशीर्वाद देने लगे।

मालिक ने बस हल्के से सिर हिलाया।

"अब जाइए..."

"और अपने बच्चे का अच्छे से इलाज कराइए।"

दोनों कृतज्ञता से उसे देखते हुए वहाँ से चले गए।

उनके जाने के बाद...

मालिक ने एक बार उस खूबसूरत बंगले की ओर देखा।

उसके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान उभरी।

फिर वह धीरे-धीरे उस आलीशान भवन के अंदर चला गया...

✍️ A. shadow 🖤
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