CRAVE - Part - 14 in Hindi Thriller by Aarika Shadow books and stories PDF | CRAVE - Part - 14

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CRAVE - Part - 14

दृश्य वहीं से शुरू होता है...


फ्लाइट के अंदर... ✈️


जुशेंग अपनी सीट पर शांत बैठा था।


उसकी नज़र बार-बार फोन की स्क्रीन पर टिक जा रही थी।


आँखों से नींद कोसों दूर थी।


वह बस फोन को देखता रहा।


बहुत धीमी आवाज़ में बोला—


"मुझे माफ़ कर देना, वाइफी..."


"मैं तुम्हारी कॉल का जवाब नहीं दे पाया।"


"लेकिन चिंता मत करना..."


"मैं आ रहा हूँ।"


"बहुत जल्द... तुम्हारे पास।"


"और फिर..."


"तुम्हारी सारी नाराज़गी एक ही पल में खत्म कर दूँगा।" ❤️


इतना कहकर उसने फोन की स्क्रीन देखी।


उस पर युई की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगी थी।


जुशेंग हल्का-सा मुस्कुराया...


और आँखें बंद कर लीं।


---


कुछ देर बाद...


रात के 11 बजे...


फ्लाइट लैंड हुई।


एयरपोर्ट के बाहर पहले से ही काली गाड़ियाँ कतार में खड़ी थीं।


चारों तरफ ब्लैक आउटफिट पहने लोग सिर झुकाकर खड़े थे।


सबसे पहले सेरा बाहर निकला।


उसके चेहरे पर हमेशा की तरह गंभीर भाव थे।


उसके पीछे...


जुशेंग उतरा।


चेहरे पर मास्क...


आँखों पर काला चश्मा...


और उसके कदमों में वही रौब...


जिसे देखकर किसी का भी दिल काँप जाए।


उसने चारों तरफ एक नज़र डाली।


पूरा इलाका उसके लोगों से घिरा हुआ था।


सेरा आगे बढ़ा।


"बॉस..."


"सब तैयार है।"


वह तुरंत कार स्टार्ट करके ड्राइविंग सीट पर बैठ गया।


पीछे जुशेंग बैठ गया।


"चलो।"


"जी, बॉस।"


कार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।


कुछ देर बाद...


जुशेंग बोला—


"यहाँ सुरक्षा और बढ़ा दो।"


"इतनी कि मालिक तक खबर पहुँच जाए..."


"कि अब हम उसकी अगली चाल के लिए तैयार हैं।"


"जी, बॉस।"


सेरा कुछ पल चुप रहा।


फिर बोला—


"लेकिन बॉस..."


"आपने मुझे वहीं रुकने के बजाय अपने साथ क्यों बुला लिया?"


कुछ क्षण कार में खामोशी छाई रही।


फिर जुशेंग ने धीमे स्वर में कहा—


"क्योंकि मुझे पता है..."


"मालिक कोई बड़ा खेल खेल रहा है।"


"उसने इतनी आसानी से वो जगह छोड़ी है..."


"तो इसका मतलब साफ है..."


"वो किसी और बड़ी चाल की तैयारी कर चुका है।"


सेरा ने हैरानी से पूछा—


"क्या?"


जुशेंग की आँखों में ठंडी चमक उभर आई।


"वो क्या करेगा..."


"ये मैं अच्छी तरह जानता हूँ।"


"अब मुझे सिर्फ़ उस पल का इंतज़ार है।"


"अगर उसने वैसा किया..."


"तो..."


"I will kill him." 😈


उसकी आँखें गुस्से से लाल हो उठीं।


कुछ पल बाद उसने खुद को शांत किया।


"सेरा..."


"अब से वाइफी की सुरक्षा तुम्हारी जिम्मेदारी है।"


"हर वक्त।"


सेरा चौंक गया।


"लेकिन... बॉस..."


जुशेंग ने उसकी बात बीच में ही काट दी।


"मुझे तुम पर भरोसा है।"


"तुम अपनी लेडी बॉस की रक्षा करोगे।"


सेरा ने सिर झुका लिया।


"जी, बॉस।"


जुशेंग खिड़की से बाहर अँधेरे को देखते हुए बोला—


"अब खेल सिर्फ़ एक तरफ़ से नहीं होगा..."


"दोनों तरफ़ से होगा।"


"वरना खेल का मज़ा ही क्या..." 😏


यह कहते ही उसकी आँखों में एक अजीब-सी अँधेरी चमक उतर आई।


सेरा ने पहली बार अपने बॉस को इस रूप में देखा...


और अनजाने में ही उसके भीतर डर उतर गया।


---


अगला दृश्य...


जुशेंग और युई का कमरा...


युई नाइट सूट पहने गहरी नींद में थी।


लेकिन उसका चेहरा बेचैन था।


माथे पर पसीने की बूँदें साफ दिखाई दे रही थीं।


मानो वह किसी डरावने सपने में फँसी हो।


नींद में ही वह बड़बड़ाने लगी—


"प्लीज़..."


"उन्हें छोड़ दो..."


"प्लीज़... ऐसा मत करो..."


"मैं आपको बचा लूँगी..."


"आप आँखें बंद मत कीजिए..."


अचानक...


"आह्ह्ह!" 😨


युई चीखते हुए उठ बैठी।


उसका दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।


वह घबराकर अपने माथे का पसीना पोंछने लगी।


"हे भगवान..."


"फिर वही सपना..."


"लेकिन..."


"पहले तो ऐसा नहीं होता था।"


"दवाइयाँ लेने के बाद भी ये सपना फिर कैसे आने लगा?"


उसने सिर पकड़ लिया।


"आखिर..."


"वो कौन है...?"


"जो मुझे बचा रहा है..."


"जो मेरे लिए रो रहा है..."


"आखिर कौन है वो...?"


युई की आँखें भर आईं।


"आह..."


"मैं पागल हो जाऊँगी..." 💔


उसने जल्दी से टेबल पर रखा पानी उठाया और एक ही साँस में पी लिया।


कुछ देर बाद खुद को समझाते हुए बोली—


"मुझे दोबारा सो जाना चाहिए..."


"लेकिन..."


"ये सपना मुझे सोने ही कहाँ देता है..."


वह धीरे-धीरे उठी।


और बालकनी में चली गई।


ऊपर चमकते चाँद को देखते हुए उसकी आँखें फिर नम हो गईं।


"ये सब क्या हो रहा है, भगवान...?"


"पहले हसबैंड की नाराज़गी..."


"और अब ये बार-बार आने वाला सपना..."


"आखिर मेरे साथ क्या हो रहा है...?"


इतना कहते ही उसका हाथ अनायास अपने पेट पर चला गया।


उसने आँखें बंद कर लीं।


"नहीं..."


"मुझे बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना है..."


"मेरे बच्चे के लिए..."


वह बालकनी के झूले पर बैठ गई।


चाँद को देखते-देखते...


पता ही नहीं चला...


कब उसकी आँख लग गई। 🌙


---


अगला दृश्य...


कुछ देर बाद...


वरेला विला...


एक कार आकर रुकी।


उसके पीछे चल रही बाकी सारी गाड़ियाँ वहीं से लौट गईं।


कार से सबसे पहले जुशेंग उतरा।


उसके साथ सेरा भी था।


जुशेंग ने शांत स्वर में कहा—


"तुम अपना काम कर चुके हो।"


"अब जाकर आराम करो।"


"जी, बॉस।"


सेरा वहाँ से चला गया।


जुशेंग कुछ पल तक खामोशी से पूरे विला को देखता रहा।


उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।


फिर वह धीरे-धीरे अंदर चला गया।


---


कुछ देर बाद...


जुशेंग और युई का कमरा...


जैसे ही जुशेंग ने दरवाज़ा खोला...


उसकी नज़र सबसे पहले बिस्तर पर गई।


लेकिन...


बिस्तर खाली था।


एक पल के लिए उसका दिल तेज़ी से धड़क उठा।


उसने पूरे कमरे में नज़र दौड़ाई।


"वाइफी...?"


कोई जवाब नहीं।


तभी उसकी नज़र खुली हुई बालकनी पर पड़ी।


उसने राहत की एक गहरी साँस ली...


और धीरे-धीरे बालकनी की ओर बढ़ गया।


जैसे ही उसकी नज़र झूले पर सोई हुई युई पर पड़ी...


वह वहीं ठिठक गया।


युई ठंडी हवा की वजह से खुद में सिमटकर सो रही थी।


उसके चेहरे पर मासूमियत थी...


लेकिन थकान और उदासी भी साफ दिखाई दे रही थी।


जुशेंग उसे एकटक देखता रह गया।


उसकी आँखें अनायास ही नम हो गईं।


बहुत धीमी आवाज़ में उसके होंठ हिले—


"वाइफी..." ❤️


दृश्य वहीं से जारी है...


जुशेंग कुछ पल तक युई को खामोशी से देखता रहा।


उसकी आँखों में उन दिनों की दूरी साफ दिखाई दे रही थी...


वो खालीपन...


जो सिर्फ़ युई की कमी से पैदा हुआ था। 💔


उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया...


और बेहद नर्मी से युई के गाल को छू लिया।


बहुत धीमी आवाज़ में उसके होंठ हिले—


"वाइफी..." ❤️


जैसे ही युई को उस स्पर्श का एहसास हुआ...



नींद में ही उसके चेहरे पर सुकून भरी एक हल्की-सी मुस्कान खिल उठी। 😊


मानो उसे अपने सबसे अपने इंसान की मौजूदगी महसूस हो गई हो।


जुशेंग ने वह मुस्कान देखी...


तो उसके होंठों पर भी अनायास एक हल्की मुस्कान आ गई।


उसने धीरे से अपना चेहरा दूसरी ओर फेर लिया...


जैसे उसे पहले से ही पता था...


कि उसकी वाइफी उसके स्पर्श को कभी नहीं भूल सकती। 🌙❤️


✍️ A.Shadow 🖤 

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