काश मेरे पापा विचित्र होते by Wajid Husain

काश मेरे पापा विचित्र होते by Wajid Husain in Hindi Novels
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीराम बहादुर रेलवे अस्पताल में कंपाउंडर थे। डोरिये की कमीज़, ख़ाकी नेकर और पैरों में घिसी हु...