tumhari shadi hai chapter 9 in Hindi Love Stories by Luna Rinn books and stories PDF | तुम्हारी शादी है भाग 9

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तुम्हारी शादी है भाग 9



रात का वक्त ,

अधीरा हवेली के दरवाजे पर खड़ी हुई थी। उसने इस वक्त सुर्ख दुल्हन कलर का लहंगा चोली के ऊपर दुपट्टा रखा हुआ था , जो नेट का था। जिसमें उसके चेहरा तो दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी वह अपनी आंखें बड़ी कर बार-बार इधर-उधर देख रही थी। जैसे घुंघट से बाहर देखने की कोशिश कर रहे हो। तभी उसके कानो में अद्विक की आवाज पड़ती है। जो किसी से बात करते हुए आ रहा था।

अधीरा अपना सर घूमाकर देखती हैं। जहां अधिक ब्लैक कलर के कुर्ता पजामा पहने पैरों में चमड़े की जूतियां आस्तीनों को कोनी तक फोल्ड करें सीने से बटन खोले आगे की तरफ बड़ा रहा था। उसका कोल्ड डोमिनेटिंग औरा कोल्ड फेस परफेक्ट जॉ लाइन जो उसके रुतबे को दर्शा रही थी। वह काफी अट्रैक्टिव लग रहा था। एक पल के लिए तो अधीरा अपनी नज़रें उससे फिरा ही नहीं पाती हैं।

 तभी वहां पर एक दासी जो उससे कुछ कम ही उम्र की होगी वह अधीरा की तरफ देखते हुए , " रानी सा आप चलिए फिर राजा साहब कुछ वक्त में आ रहे हैं। " बोलते हुए वह उसे गाड़ी की तरफ इशारा कर देती है।

अधीरा खुद से बडबडाते हुए , " रानी सा ! ऐसा क्यों लग रहा है जैसे यह कोई हॉरर मूवी की रानी सा बोल रही हो मुझे ? " खुद कुछ सोचते हुए लहंगे को मुट्ठी में भर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगती है।

पर उसका पूरा ध्यान अद्विक पर था जो अभी साइड में खड़े होकर किसी से कुछ बात कर रहा था। तभी वह किसी से टकरा जाती हैं। वह गिरती के सामने से एक शख्स उसे संभाल लेता है। अधीरा आधी झुक चुकी थी उस शख्स के हाथ अधीर के खुले हुए पेट पर चल चुके थे। अधीर एकदम अनकंफरटेबल होकर जल्दी से दूर हो जाती है और नजर उठाकर सामने खड़े आदमी को देखने लगती हैं।

वह आदमी चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लिए अपने दोनों हाथों को जोड़ते हुए , " अपनी कार्य सफलतापूर्वक कर कर आएंगे , बोलते हुए वह मुस्कुराहट आगे की तरफ बढ़ता है कि उसके हाथ एक बार फिर से अधीर की खुली हुई कमर पर चल जाते हैं।

अधीरा घूरते हुए उसे देखती रह जाती है। उसने अपनी मुट्ठियां मजबूती से कसी हुई थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे अभी उसके पूरे शरीर में सांप लौट गए हो। वह अपने कमर पर हाथ रख अपने नाखूनों को उस जगह पर घुसाने लगती है। उसे जगह से गिन आ रही थी। वही अद्विक जो अभी बात कर रहा था।

।।।। अद्वीक फोन हाथ में घूमाते हुए उस शख्स के हाथ में रखते हुए बोला , " आप जानते हैं ना ! आपको क्या ? करना है। पूरे एक हफ्ते तक आप में से कोई भी हमसे कांटेक्ट नहीं करेगा और ना ही किसी को करने की अनुमति हम दे रहे हैं। जो होगा हम खुद देख लेंगे सबको इस उद्देश्यों को मनाना होगा। " उसकी आवाज में एक रोब था। वह आगे की तरफ बढ़ जाता है।

तभी वह शख्स जो अभी हवेली के अंदर की तरफ आ रहा था। उसकी नजर अद्विक पर थी। वह टेढ़ी मुस्कुराहट के साथ आगे की तरफ बढ़ जाता है। वही अद्विक उसके लिए तो वह शख्स जैसे कोई चींटी बराबर था। वह सरासर इग्नोर कर आगे बढ़ जाता है। अधीरा जो अभी भी उस शख्स को घूर रही थी।

अद्विक उसके नजदीक पहुंच उसके थोड़ा और नजदीक खड़े होते हुए , " आप अभी तक यहीं खड़ी है ? हमने आपसे कहा था ना आप गाड़ी में बैठकर हमारी प्रतिष्ठा करिए पत्नी जी , हम नहीं चाहते कि हमारी वजह से आपके पैरों में दर्द हो। क्योंकि जो दर्द हम आपको वहां जाकर देने वाले हैं वह दर्द आपसे फिर बर्दाश्त नहीं होगा। " बोलते हुए वह उसके हाथ को पकड़ आगे की तरफ बढ़ जाता है।

जिस तरीके से अद्विक ने उसका हाथ पकड़ा था। अधीरा की चूड़ियों से भरे हुए हाथ कस की छनक कि आवाज के साथ उसकी तरफ कदम बढ़ा देते हैं। अधीरा उसके साथ-साथ चल रही थी। वही अद्विक बिना किसी इमोशन के आगे बड़ा रहता अधीरा के दिमाग में कुछ चल रहा है। कुछ देर बाद वह दोनों ही गाड़ी में बैठकर वहां से निकल जाते हैं।

।।। कुछ दूरी तक करीब 6 , 7 गाड़ियां उनके पीछे चल रही थी पर जैसे-जैसे रास्ता आगे की तरफ बढ़ रहा था। वैसे-वैसे गाड़ियां पीछे से कम होती चली जा रही थी। करीब 2 घंटे के बाद अद्विक गाड़ी रूकती है रात होने की वजह से अधीरा गाड़ी में बैठने के साथ ही सो चुकी थी। गाड़ी रुकने के करीब 10 मिनट बाद ही अधीरा की आंख खुलती है।

वह इधर-उधर देखती हैं उसे नींद की वजह से अभी चीज़ समझ में नहीं आ रही थी। वो तेजी से अपनी आंखें खोलती है। गाड़ी को पूरा खाली देख एकदम उसकी सांसे तेज हो जाती है। वह इधर-उधर देखती हैं , वह इस वक्त गाड़ी में अकेली थी और गाड़ी जंगल के बीच एक कच्चे रास्ते पर रुकी हुई थी। अधीरा जल्दी से दरवाजा खोल बाहर की तरफ अपने कदम बढ़ा इधर-उधर देखने लगती हैं।

उसके चेहरे पर कुछ परेशानी सी झलक रही थी और उसका घूंघट सरक कर सर पर आ चुका था। तभी उसे झाड़ियो से कुछ आवाज आने लगती हैं। वो इधर-उधर देखने लगती है। उसका गला पूरी तरीके से सूख चुका था , माथे पर ठंडे पसीने थे , वह बड़ी-बड़ी पलके झपकाते हुए इधर-उधर देख रही थी। जैसे किसी को ढूंढ रही हो। तभी उसे अपने पेट पर किसी की उंगलियों का एहसास होता है। वह अपने कमर में छिपा हुआ एक छोटा चाकू निकाल पलटते हुए सीधा उस शख्स की गर्दन पर रख देती है।

वह शख्स जो पहले से ही काफी अलर्ट था और फुर्ती में था वह अधीरा के हाथ को पकड़ उसे घूमाते हुए मोड़कर उसके पेट से लगाते हुए , " आप हमारी अर्धांगिनी है , हमारी पत्नी और आप ही हमें खुद यमदूध के पास भेजना चाहती हैं , भरी जवानी में कुंवारी विधवा हो जाएगी। "

अधीरा उसकी बात पर अपनी कलाई एक को छुड़ाते हुए , " यह तुम क्या कर रहे हो ? मेरा हाथ छोड़ो। और तुम इस तरीके से मुझे अकेला छोड़कर कहां चले गए थे हां ? ऐसे तो बड़ी-बड़ी बातें करते हो शादीशुदा है , पत्नी है मेरी हर कदम पर साथ दूंगा। ना जाने क्या ? क्या ? बिला बिला बिला और अब ऐसे मुझे अकेला रास्ते पर छोड़कर चले गए थे। "

अद्विक उसके डरे हुए चेहरे को गौर से देख रहा था। उसके बाल जो पसीने की वजह से भीग कर कर गालों से चिपक चुके थे। वह अपने होठों को हल्का सा गोल घूमाते हुए उसके चेहरे पर फूंक मारता है। अधीरा की आंखें बंद हो जाती है। उसकी धड़कने एक बार फिर से तेज हो चुकी थी।

अद्विक उसके बाल को कान के पीछे कर अपनी पकड़ कमर पर थोड़ी सी और मजबूत कर खुद के नजदीक ले आता है। अधीरा बिल्कुल उससे चिपक चुकी थी। वह हल्का सा पीठ को पीछे की तरफ ब्लेड कर रखी थी। जिससे उसका सीन ऊपर की तरफ उठ चुका था और अद्विक बिल्कुल उसके ऊपर ही झुकने लगता है।

 अधीरा धीरे-धीरे ब्लेंड होते हुए , " यह तुम , तुम क्या कर रहे हो ? अगर तुमने मेरे साथ कुछ करने की कोशिश की ना देख रहे हो ना मेरे हाथ में चाकू है , एक बार में ही काम तमाम कर दूंगी भूलो मत मैं अधीरा राजपूत हूं , मुझे सर काटना बहुत अच्छे से आता है। "

अद्विक उसकी बात पर स्मिर्क करते हुए उसके नाजुक से हाथ पर थोड़ा सा अपने अंगूठे का प्रेशर बनता है। जिसके साथ चाकू छूट कर नीचे गिर जाता है। अधीरा अपना सर टेढ़ा कर उस गिरे हुए चाकू को देखने लगती है। आसपास काफी अंधेरा था। सिर्फ गाड़ी की लाइट्स की वजह से वहां पर कुछ रोशनी हो रही थी।

जिसमें उन दोनों का चेहरा चमक रहा था। अद्विक अधीरा के चेहरे को देखने लगता है। कुछ लाइट का रिफ्लेक्शन और कुछ चांदनी रात की चांद की रोशनी जो उसके सुंदर से खूबसूरत चेहरे पर पढ़ रही थी। जिससे उसका चेहरा और ज्यादा अट्रैक्टिव लग रहा था।

।।।। अद्विक उसके चेहरे के पास आ गहरी सांस लेते हुए , " आपको हमसे डरने की जरूरत नहीं है , आप हमारी पत्नी है और हम जो करेंगे डंके की चोट पर करेंगे रही बात आपको छोड़ने की तो मरते दम तक आपको नहीं छोड़ेंगे आपका पीछा तो हमसे नहीं छूटने वाला है। आप हमारी इकलौती पत्नी जो ठहरी। " बोलते हुए वह उसके गले पर नाक को धीरे-धीरे रब करने लगता है।

अधीरा कसमसाते हुए , " यह तुम क्या कर रहे हो ? छोड़ो मुझे। "
फिर खुद से , " उफ्फ में ही पागल हूं क्या ? इतना अच्छा खासा मौका था यहां से आसानी से भाग सकती थी पर नहीं अंधेरा का डर जाएगा। " नहीं मेरा,

वह बडबडाते हुए इधर-उधर देखने लगती है। तभी उसे अपने सीने पर तेज दर्द होता है। वह अपना सर हल्का सा झुकाकर अद्विक को देखती हैं। जिसने अभी-अभी उसके सीने पर बाइट किया था।

 अधीरा आंखे छोटी करते हुए , " अगर तुमने इस बार मुझे बाइट किया ना मैं सच में तुम्हें कच्चा चबा जाऊंगी। "

अद्विक उसकी बात पर उसी जगह पर धीरे-धीरे जीब को घुमाते हुए बहुत ही सेडक्टिव अंदाज में , " आप हमारी पत्नी है और हमारा पूरा हक बनता है। हमने आपसे कहा था जब तक हम आपको कुछ नहीं करेंगे जब तक हमारा मन ना चाहे पर आप है जो इस अंधेरी गहरी रात में भीगी भागी सी लड़की बनकर हमारे सामने आकर हमें छेड़ने की कोशिश कर रही हैं। " बोलते हुए होटो को धीरे-धीरे उसके सीने और गले पर चला रहा था। अधीरा सीहर उठती है वह अपनी मुट्ठियां और मजबूत कर लेती है।

अद्विक के हाथ उसके पेट पर आ जाते हैं। उसे कुछ अजीब सा लगता है। वह नजर झुकाकर उसके पेट पर देखता है पर साड़ी होने की वजह से उसे दिखाई नहीं दे रहा था। वो दुपट्टे को थोड़ा साइड करता है। उसकी आंखें एकदम डार्क हो जाती हैं।

वह घुटनों के बल बैठ उसकी कमर को गौर से देखते हुए , " आपके यहां पर यह जख्म कैसे हैं ? " बोलते हुए वह अंगूठे से धीरे-धीरे उसकी कमर के हिस्से को सहला रहा था और उस पर फूंक मार रहा था।

अधीरा के पूरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसके पूरे शरीर में झुर्री छा चुकी थी। वह अपनी कमर को अद्विक की पकड़ से छुड़ाते हुए , " यह तुम , तुम क्या कर रहे हो ? तुम्हारा दिमाग खराब है। तुम्हें आइडिया भी है , तुम क्या कर रहे हो ? छोड़ो मुझे। "

अद्विक उसकी बात पर उसे घूरते हुए , " अगर आपने यहां से एक कदम भी हिलाया तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा। "

।।। अधीर अपना मन मसूस कर रह जाती है। उस वक्त रात के 4:00 रहे थे। जब वह दोनों बीच सड़क पर खड़े थे। तभी उन्हें किसी की चलने की आवाज सुनाई देती है। अधीरा जो अभी खड़ी हुई थी।

वह एकदम से अद्विक के बालो पर अपनी पकड़ बनाते हुए , " यह आवाज , आवाज कैसी थी ? यहां , यहां कोई जंगली जंगली भालू है क्या ? " उसकी आवाज ही उसके डर को साफ जाहिर कर रही थी।

अद्विक उसकी बात पर खड़े होते हुए , " यह आप क्या कर रही हैं ? आप हमारे इस तरीके से बाल खींचेंगी तो हमारे बच्चे होने से पहले ही हम टकले हो जाएंगे। और फिर क्या कहेंगे वह हमारे बारे में ? और वैसे भी हमें इस तरीके से अपने सर में दर्द नहीं चाहिए , हम तो बिस्तर पर इस दर्द को बर्दाश्त करना चाहेंगे। " अधीर अपने दांत किटकिटाने लगती है। जैसे वह अभी के अभी इस आदमी को जिंदा निकल जाएगी।

" हमें लेने के लिए काका आए हैं। "

अधीरा इधर-उधर देखने लगती है। तभी उसकी नजर एक बैलगाड़ी पर जाती है। जिस पर दो बैल बंधे हुए थे और एक आदमी जिसने धोती पर एक पुराना सा घिसा हुआ कुर्ता डाला था और सर पर लाल कलर का कपड़ा लपेट हुआ था , हाथ में पतली सी डंडी लिए आगे की तरफ आता है।

और जल्दी से अपनी बेलगाड़ी से उतरते हुए , " प्रणाम राजा साहब हमें आने में थोड़ी देरी हो गई , हमें माफ करिएगा और बाकी चीज हमने वहां पर पहले ही करवा दि हैं बस आपका ही इंतजार किया जा रहा है। " अद्विक सिर हिला देता है और वह गाड़ी से बैग निकालकर सीधा बैलगाड़ी पर रख देता है।

अधीरा उस बैलगाड़ी को हैरानी से देखते हुए खुद से , " ओह गॉड , यह क्या है ? मैंने तो सिर्फ स्टोरी में पढ़ा था और स्कूल बुक्स में देखा था की बैलगाड़ी जैसी चीज होती हैं पर आज के टाइम पर भी लोग 21st सेंचुरी में भी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। काश मेरे पास फोन होता तो मैं अभी इसकी फोटो क्लिक करके इंटरनेट पर वायरल कर देती। "

 वह एक्साइटमेंट में उस बैलगाड़ी को देख रही थी। अद्विक जाकर बैलगाड़ी के एक साइड बैठ जाता है। अधीरा उसे बैठता हुआ देख खुद भी आकर बैठने की कोशिश करने लगती है। पर बैलगाड़ी उसे कुछ ऊंची थी जिस वजह से वह चढ़ ही नहीं पा रही थी।

अधिक उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए , " आप चाहे तो हमारी मदद ले सकती हैं , हम बुरा नहीं मानेंगे। "

अधीरा उसे घूरती है और बैलगाड़ी में रखे हुए एक डंडा जो इस से बंधा हुआ था उसे पकढ़ते हुए , " मरते दम तक में तुमसे मदद नहीं लूंगी। मदद माय फुट। "

 अद्विक उसकी बात पर अपनी आंखों को गोल घूमा लेता है। जैसे वह यह सब कुछ काफी ज्यादा इंजॉय कर रहा हो। अधीरा बार-बार चढ़ने की कोशिश कर रही थी। पर कभी उसका पैर स्लिप हो जाता है , तो कभी कुछ हो रहा था। वह उस गाड़ी पर चढ़ ही नहीं पा रही थी।

 अद्विक बैलगाड़ी से उतर जाता है , " जब आपका हो जाए तो आप हमें बता दीजिएगा तब तक हम भी इस सुबह के खूबसूरत नजारे का आनंद ले लेते हैं। " बोलते हुए वह सूरज को देखने लगता है।

उसकी आंखें भी बिल्कुल सूरज की तरह चमक रही थी। बिल्कुल लाल जैसे वह सूरज को प्रणाम कर रहा हो और करीब 10 मिनट बाद वह पलटता है। जहां अधीरा अभी भी कोशिश में लगी हुई थी। अद्विक उसके पास आता है। अधीरा सीर घूमाकर उसे देखती हैं और फिर से चलने लगती है। अद्विक उसे कंधे से पकड़ अपनी तरफ घुमा देता है।

अधीरा एकदम उसके सामने आकर , " यह तुम क्या ? . " उसकी आवाज बस यही तक सीमित रह जाती है।

अद्विक उसे कमर से पकड़ कर एक ही बार में बैलगाड़ी पर बैठा देता है। अधीरा बड़ी-बड़ी पलके झपकाते हुए उसे देखने लगती हैं।

वो अपने दोनों हाथ उसके इधर-उधर रखते हुए , " आप हमारी पत्नी है। अद्विक अधीरा सिंह सहरावत है आप और आपसे हम सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि आप वहां जाकर हमारा नाम नहीं डुबाएं लोग हमें भगवान की तरह पूछते हैं और हम चाहते हैं कि आप वहां पर ऐसा कुछ ना करें जिससे हमें या आपको कोई परेशानी हो।

।।।।। वरना आपको पता नहीं है अभी यहां की सजा बहुत ही ज्यादा खतरनाक हो सकती है। जिसे सुनने के बाद शायद आपको हमसे भी भय आए क्योंकि जब तक हम शांत हैं हमें शांत ही रहने दीजिए। " बोलते हुए वह वैसे ही एक हाथ बैलगाड़ी पर रखकर बैठ जाता है।

 अधीरा उसकी बातों में धमकी साफ महसूस कर चुकी थी। जिसे महसूस कर उसे रोंगटे खड़े होने लगते हैं।

वह खुद से बडबडाते हुए मुंह बनाकर बोली , " जैसे कि उनके डराने से मैं तो डर ही जाऊंगी में तो कोई छोटी सी बच्ची हूं ना जो उनकी धमकी से डर जाउंगी। आगे , आगे देखो मैं क्या ? करती हूं। बहुत शौक से लाए हो ना अब तो यहां कोई है भी नहीं मुझे रोकने वाला। " वह खुशी से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती है और गांव के नजारे का मजा उठाने लगती है।


मिलते है अगले भाग में ओर मेरे प्यारे रीडर please follow kar lo or comment bhi karna